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लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने इस्तीफा नामंजूर किया, ममता के इस्लाम में चले जाने को लेकर यह कहा
RNE Prayagraj.
पिछले कई दिनों से लगातार सुर्खियों में बनी अभिनेत्री और साध्वी ममता कुलकर्णी को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। खबर यह है किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दे चुकी ममता एक बार फिर से अखाड़े की महामंडलेश्वर बन गई है।
उनका इस्तीफा नामंज़ूर हो गया है। खुद ममता ने कहा है, दो दिन पहले मेरे पट्टा गुरु लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी पर कुछ लोगों ने गलत आक्षेप लगाए थे। इस भावना में आकर मैंने अपने पद से इस्तीफा दिया, लेकिन उन्होंने इस्तीफा नामंजूर कर दिया।
इसके साथ ही इस्तीफा देने के दो दिन बाद ममता कुलकर्णी या साध्वी ममता फिर से महामंडलेश्वर श्रीयामाई ममता नंद गिरि बन गई। दूसरी ओर किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा, ममता कुलकर्णी किन्नर अखाड़ा की अंग थी, हैं और रहेंगी।
किस वजह से और कैसे यह बातें सामने आई हैं उस बारे में महामंडलेश्वर स्वामी यामाई ममतानंद गिरी से वार्ता हो रही है। ममता कुलकर्णी के किन्नर अखाड़ा में महामंडलेश्वर बनने से कुछ लोग ज्यादा परेशान हैं। जबकि यही ममता कुलकर्णी अगर इस्लाम में चली जातीं तो धर्म के तथाकथित ठेकेदार तब क्या करते? इस बारे में तब कोई कुछ नहीं बोलता।
24 जनवरी को संन्यास के साथ बनी महामंडलेश्वर :
गौरतलब है कि प्रयागराज महाकुंभ में 24 जनवरी को ममता को महामंडलेश्वर बनाया गया था। अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उनका पिंडदान और पट्टाभिषेक कराया था। ममता को नया नाम श्रीयामाई ममता नंद गिरि मिला था।
इस्तीफा देते वक्त ये कहा :
गौरतलब है कि महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा देते वक्त ममता ने कहा था, मैं महामंडलेश्वर यामाई ममता नंद गिरि अपने पद से इस्तीफा दे रही हूं। किन्नर अखाड़े में मुझे लेकर समस्याएं हो रही हैं। मैं 25 साल से एक साध्वी थी और हमेशा साध्वी रहूंगी। मुझे महामंडलेश्वर का सम्मान दिया गया था, लेकिन ये कुछ लोगों के लिए आपत्तिजनक हो गया था। चाहें वो शंकराचार्य हों या कोई और हों।