{"vars":{"id": "127470:4976"}}

92वीं जयंती पर याद किए गए भवानीशंकर व्यास ‘विनोद’, दो प्रतिभाओं को मिला ‘सुरभि सम्मान’

 

RNE Bikaner.

कीर्तिशेष कवि, शिक्षाविद्, संपादक,आलोचक और चिंतक भवानी शंकर व्यास विनोद को 92 वीं जयंती और संस्थान के 46 वें स्थापना दिवस पर ' विनोद वैभव ' समारोह का आयोजन अजित फाउंडेशन में किया गया। संस्थान अध्यक्ष  गोविंद जोशी ने बताया कि समारोह में साहित्यिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में  विनोद के सुदीर्घ एवं अविस्मरणीय अवदान पर विमर्श करते हर वक्ताओं ने कहा कि भवानीशंकर व्यास विनोद का विराट और विरल व्यक्तित्व - कृतित्व नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

कवि-कथाकार मालचन्द तिवाड़ी की अध्यक्षता और  साहित्यकार - रंगकर्मी मधु आचार्य ' आशावादी ' के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस समारोह में बीकानेर  के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त युवा चित्रकार योगेन्द्र कुमार पुरोहित और लोक साहित्य एवं लोक कला के उन्नयन के लिए समर्पित समाजसेवी प्रेम नारायण व्यास को ' सुरभि सम्मान ' अर्पित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें उपरणा, शॉल, श्रीफल, पुस्तकें और सम्मान पत्र भेंट किया गया।

सुरभि के सचिव दिनेश उपाध्याय ने आरंभ में सभी का सम्मान किया और कहा कि वर्ष 1980 में इस संस्थान का शुभारंभ भवानीशंकर व्यास विनोद के मार्गदर्शन और संरक्षण में हुआ और वह तब से निरंतर साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण निर्माण हेतु सृजनात्मक कार्य रही है। उन्होंने कहा कि विनोद जी के देहावसान पश्चात उनकी यह  पहली जयंती है और उन्हें शब्दांजलि और पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने के ध्येय से यह समारोह रखा गया है।
 

मुख्य वक्ता  व्यंग्यकार - स्तंभकार बुलाकी शर्मा ने भवानीशंकर व्यास को अजातशत्रु बताया और कहा  बीकानेर के साहित्यिक वातावरण को स्वस्थ, सुखद और प्रेरणास्पद बनाए रखने में में उनके प्रेरक अवदान को यह शहर कभी विस्मृत नहीं कर सकता।  उन्होंने विनोद जी के अप्रकाशित साहित्य को प्रकाश में लाने की महत्ती आवश्यकता बताई और कहा कि उनके डायरी लेखन में  आधी सदी के बीकानेर का ऐसा इतिहास दर्ज है जो तिथियों से ज्यादा संवेदना से ओतप्रोत है, जो अब तक अप्रकाशित है।
       

मुख्य अतिथि मधु आचार्य आशावादी ने कहा कि विनोद जी युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें अपनी सामर्थ्य से आगे बढ़ाते रहे। उन्होंने एक साहित्यिक पीढ़ी तैयार की। उन्होंने कहा कि विनोद जी की जयंती पर उनका स्मरण कर समाज ने अपने जीवित होना सबूत दिया है कि वह उनसे कभी उऋण नहीं हो सकती।
       

अध्यक्ष मालचंद तिवाड़ी ने कि विनोद जी जैसी विरल दृष्टि और अनुशासन विरल लोगों में होता है। वे दूसरों का विस्तार करने को अपनी उपलब्धियों का विस्तार मानते थे। हिंदी और राजस्थानी में उनके साहित्यिक अवदान को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकेगा, साहित्य को आगे बढ़ाने में वे अंतिम समय तक समर्पित रहे।
     

गीतकार राजेंद्र स्वर्णकार ने स्वरचित गीत से मां सरस्वती जी वंदना की तथा वरिष्ठ साहित्यकार वैद्य विद्यासागर शर्मा पंचारिया ने स्वरचित गीत के माध्यम में विनोद को शब्दांजलि अर्पित की। 
     

विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय, जयपुर  के चांसलर और सेवानिवृत आईएएस डॉ. ललित के पंवार द्वारा भवानी शंकर व्यास 'विनोद' की दी गई भावांजलि का वाचन डॉ. विष्णुदत्त जोशी ने किया।
        

कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने भवानी शंकर व्यास के हिंदी साहित्य में अवदान पर पत्रवाचन करते हुए कहा कि कवि सम्मेलनों के दौर में बीकानेर के काव्य संसार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रतिष्ठा दिलाने में उनका सर्वाधिक योगदान रहा है। 
     

शिक्षाविद ओमप्रकाश सारस्वत ने अपने पत्र वाचन में शिक्षा और संपादन क्षेत्र में व्यास के अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया और कहा कि कई राष्ट्रीय शिक्षा आयोगों के सदस्य के रूप में उन्होंने शिक्षा नीति को हर आयु वर्ग के छात्रों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखकर बनाने में योगदान दिया।
   

आलोचक डॉ. नमामी शंकर आचार्य ने अपने पत्र वाचन में आधुनिक राजस्थानी कविता और आलोचना के क्षेत्र में व्यास के सृजन का सम्यक विवेचन - विश्लेषण करते हुए कहा कि उन्होंने राजस्थानी कविता की नया मुहावरा दिया है।
         

गोविंद जोशी ने स्वयं को विनोद जी का दत्तक - पुत्र और शिष्य बताया और विनोद जी के ही अंदाज और हावभाव में उनका एक गीत सुनाकर ऐसा अहसास कराया जैसे विनोद स्वयं वहां उपस्थित जो गए हों।
       

जोधपुर से आईं व्यास की सुपुत्रियां डॉ. सुमन बिस्सा और सरोज बिस्सा ने उनकी भावुक स्मृतियां साझा की तब पूरा सभागार भावुक हो गया।
     

सुरभि संस्थान की ओर से सभी अतिथियों का माला, उपरणा, शॉल और स्मृति चिह्न से सम्मानित किया गया तथा सुरभि अध्यक्ष गोविंद जोशी का 'शब्द रंग ' संस्था की ओर से माला, शॉल, श्रीफल अर्पित कर सम्मान किया गया।
         

वरिष्ठ कवि-कथाकार संजय पुरोहित और युवा कवि राजा सांखी के संयुक्त संचालन में आयोजित इस समारोह में आगंतुकों का संस्थान की ओर से आभार प्रदर्शन युवा पत्रकार सुमित शर्मा ने किया।
       

कवि सरल विशारद, कमल रंगा,  महेश उपाध्याय, विप्लव व्यास, कासिम बीकानेरी, मयंक जोशी, डॉ. शंकरलाल स्वामी, डॉ. अजय जोशी, संजय श्रीमाली, शांतिप्रसाद बिस्सा, डॉ. विजय शंकर आचार्य, 
रेवंतराम गोदारा, भंवरलाल उपाध्याय, मनोज कश्यप, 

 

डॉ.मोहम्मद फारूक, डॉ. जीके नागपाल, नंदलाल पंचारिया,गणेशनाथ सिद्ध, गिरिराज पारीक, डॉ. नरसिंह बिनानी, अशफाक कादरी, आत्माराम भाटी, आनंद छंगाणी, अल्लादीन निर्वाण, जुगल पुरोहित, मोहन राम सुथार समेत उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने विनोद को पुष्पांजलि अर्पित की।