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Bikaner CM Road Show : घनी आबादी की गलियों से गुजरे भजनलाल, अर्जुनराम और जेठानंद साथ रहे

 
दो आसान रास्ते छोड़ भाजपा ने क्यों चुनी शहर की तंग गलियां?

 

 

 

Rudra News Express Bikaner. 

नगर निगम चुनाव के बीच रविवार को बीकानेर में सियासी गरमाहट उस समय चरम पर पहुंच गई, जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पार्षद प्रत्याशियों के समर्थन में शहर की गलियों से गुजरे। इसे रोड शो कहा गया, लेकिन जिस तरह मुख्यमंत्री शहर की बेहद तंग गलियों से होकर गुजरे, उसे जनसंपर्क कहना भी गलत नहीं होगा। कई जगह सड़क इतनी संकरी थी कि एक वाहन के निकलने में भी मुश्किल हो रही थी। ऐसे में छतों और सड़क किनारे खड़े लोगों का अभिवादन करते मुख्यमंत्री का काफिला आगे बढ़ता रहा।

पहली बार पार्षदों के लिये सीएम सड़क पर : 

बीकानेर के चुनावी इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब कोई मुख्यमंत्री सीधे पार्षद प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने शहर की ऐसी अंदरूनी गलियों तक पहुंचा। मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास रहे। बाद में बीकानेर पूर्व की विधायक सिद्धि कुमारी भी रोड शो में शामिल हो गईं।

चुनावी माहौल में CM का दौरा क्यों अहम?

मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब बीकानेर की स्थानीय राजनीति में कई मोर्चे एक साथ खुले हुए हैं। कांग्रेस में दलित अध्यक्ष से पार्टी के ही कार्यकर्ताओं की ओर से मारपीट का मामला भाजपा को लगातार हमलावर होने का अवसर दे रहा है। दूसरी ओर भाजपा के भीतर महावीर रांका टिकट प्रकरण भी चर्चा में है। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री का बीकानेर आना केवल चुनाव प्रचार भर नहीं माना जा सकता। यह स्थानीय भाजपा संगठन और प्रत्याशियों के लिए राजनीतिक ऊर्जा बढ़ाने वाला कदम भी है।

आखिर शहर की तंग गलियों में ही रोड शो क्यो : 

जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री के रोड शो की रूपरेखा तय करते समय शुरुआती तौर पर दो अपेक्षाकृत सुगम रूट पर विचार हुआ था। पहले विकल्प में नाल एयरपोर्ट से गंगाशहर की ओर आते हुए बीकानेर पूर्व और पश्चिम दोनों विधानसभा क्षेत्रों को छूकर लक्ष्मीनाथ मंदिर, शीतलागेट, नथूसरगेट और गोकुल सर्किल होते हुए वापस नाल एयरपोर्ट जाने की योजना पर विचार हुआ।

दूसरा विकल्प नाल एयरपोर्ट से भीमसेन सर्किल, तीर्थंकर, जूनागढ़, आंबेडकर सर्किल, पवनपुरी, नागणेचीजी मंदिर, सिनेमैजिक रोड होते हुए गंगाशहर-भीनासर और फिर लक्ष्मीनाथ मंदिर तक जाने का था। दोनों रूट आवागमन और सुरक्षा के लिहाज से अपेक्षाकृत सुविधाजनक माने गए।

इसके बाद तीसरा विकल्प सामने आया, शहर के पुराने और घनी आबादी वाले हिस्से से होकर निकलने का। गोकुल सर्किल, नथूसरगेट, बारहगुवाड़ चौक, आचार्य चौक, मोहता चौक, तेलीवाड़ा, दाऊजी मंदिर, कोटगेट और महात्मा गांधी मार्ग होते हुए जूनागढ़ तथा आसपास के बीकानेर पूर्व के वार्डों को छूने वाला यह रास्ता सुरक्षा और यातायात दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था। फिर भी स्थानीय भाजपा संगठन, नेताओं और विधायक स्तर पर इसी रूट को अंतिम रूप दिया गया।

‘कम सफर, ज्यादा असर’ का फार्मूला : 

इस रूट के पीछे दो प्रमुख राजनीतिक गणित बताए जा रहे हैं।  पहला, कम दूरी में घनी आबादी वाले पुराने शहर के बड़े हिस्से को कवर करना। पूर्व और पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर करीब 12 वार्डों तक मुख्यमंत्री की सीधी मौजूदगी दर्ज हो सकती थी।

दूसरा  लंबे और चौड़े रास्तों से बचना। यदि रोड शो गंगाशहर-भीनासर, जूनागढ़, पवनपुरी और जेएनवी कॉलोनी की तरफ किया जाता तो लंबी सड़क के दोनों ओर बड़ी भीड़ जुटाना पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण होता। लंबा सफर तय करने के बावजूद अपेक्षाकृत कम वार्ड कवर होते। इसलिए "कम सफर में ज्यादा असर" का फार्मूला अपनाते हुए पुराने शहर का रूट चुना गया।

..जैसी आशंका थी, वैसा ही हुआ : 

रूट को लेकर जो चुनौतियां पहले से सामने आ रही थीं, वे रोड शो के दौरान दिखाई भी दीं। शुरुआती हिस्से में नेताओं और कार्यकर्ताओं के वाहनों के काफिले को हटाकर मुख्यमंत्री की गाड़ी को तेजी से मोहता चौक तक लाया गया। यहां तेलीवाड़ा हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और विधायक जेठानंद व्यास खुली गाड़ी में सवार हुए और रोड शो शुरू हुआ।

रास्तेभर नारे-स्वागत : 
इसके बाद रास्ते भर फूलों की बारिश, भाजपा के झंडों और नारों के बीच काफिला आगे बढ़ा। जगह-जगह लोग मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए खड़े नजर आए। जूनागढ़ पहुंचते-पहुंचते रोड शो सभा में बदल गया। बड़ी संख्या में पार्षद प्रत्याशी वहां मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सरकार के काम गिनाए और निगम चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताने की अपील की।

CM के सामने ही सड़क की ‘मरम्मत’ : 

रोड शो की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी जल्दबाजी साफ दिखाई दी। एक ओर मुख्यमंत्री का काफिला आगे बढ़ रहा था, दूसरी ओर आगे चल रही डामर-कंकरीट से भरी गाड़ी सड़क के गड्ढे भरती नजर आई। यानी जिस रास्ते से मुख्यमंत्री को गुजरना था, उसकी मरम्मत का काम काफिले के आगे-आगे ही चलता रहा। कई जगह आवारा पशु भी काफिले के बीच तक पहुंच गए। इससे सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हुए।

भाजपा के झंडे भी ‘काफिले’ से आगे-आगे पहुंचे : 

पार्टी की तैयारियों का एक और दिलचस्प पहलू नजर आया। मुख्यमंत्री की गाड़ी से आगे पार्टी कार्यकर्ताओं से भरी एक गाड़ी चल रही थी। इसमें फूल-मालाओं के साथ भाजपा के झंडे और दुपट्टे रखे थे। रास्ते में मौजूद लोगों को इन्हें बांटा जा रहा था, ताकि मुख्यमंत्री के गुजरने के समय सड़क किनारे भाजपा के झंडे लहराते और स्वागत का माहौल दिखाई देता। यह तस्वीर अपने आप में बता रही थी कि भीड़ और स्वागत के दृश्य को लेकर पार्टी की तैयारियां कितनी तंग समय-सीमा में की गई थीं।

भाजपा के लिए अवसर बड़ा, तैयारी उतनी बड़ी नहीं दिखी : 

कुल मिलाकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बीकानेर दौरा शहर भाजपा के लिए निश्चित तौर पर बड़ा राजनीतिक अवसर रहा। मुख्यमंत्री सीधे पार्षद प्रत्याशियों के समर्थन में शहर की गलियों तक पहुंचे। इससे प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ना स्वाभाविक है। इसके बावजूद सवाल यह है कि "क्या स्थानीय भाजपा संगठन इस बड़े राजनीतिक अवसर के लिए उतनी मजबूत जमीन तैयार कर पाया, जिस पर निगम चुनाव में बड़ी जीत की इमारत खड़ी की जा सके?

क्या रहा रोड शो का संदेश : 

रोड शो ने संदेश तो दिया, लेकिन व्यवस्थाओं में दिखी हड़बड़ी, आखिरी समय तक चलती तैयारियां, आवारा पशुओं की मौजूदगी और मुख्यमंत्री के काफिले के आगे झंडे-दुपट्टे बांटती गाड़ी यह भी संकेत देती रही कि संगठन के स्तर पर तैयारी उस राजनीतिक महत्वाकांक्षा के अनुरूप नहीं थी, जिसके साथ मुख्यमंत्री को बीकानेर की गलियों में उतारा गया था। यानी मुख्यमंत्री का दौरा भाजपा के लिए ‘बूस्टर डोज’ जरूर रहा, लेकिन इस बूस्टर डोज का चुनावी असर कितना होगा, यह अब 9 सितंबर को मतदाता तय करेंगे।