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Bikaner : साहित्यकारों, शायरों, कलाकारों ने जनकवि सदीक को यादकिया , गीतों और ग़ज़लों से श्रद्धांजलि समारोह

 

RNE Bikaner.

"आपको सलाम मेरा, सबको राम-राम, अब तो बोल आदमी का आदमी है नाम..."
 

जनकवि स्वर्गीय मोहम्मद सदीक का नाम आते ही उनकी इंसानियत, सामाजिक चेतना और सांप्रदायिक सौहार्द से ओतप्रोत रचनाएं स्वतः स्मृतियों में गूंज उठती हैं। "मजा करो महाराज आज थांरी पाँचू घी में है..." जैसे व्यंग्य गीत हों या "सांवरिये री सारंगी..." जैसी संवेदनशील रचनाएं, सदीक साहब का साहित्य आज भी समाज को आईना दिखाता है।

जनकवि मोहम्मद सदीक की 28वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को राजमाता सुदर्शना कला दीर्घा, नागरी भंडार में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इसमें साहित्यकारों, शायरों, कलाकारों, पत्रकारों, परिजनों और साहित्य प्रेमियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

गीतों और ग़ज़लों से श्रद्धांजलि : 

इस मौके पर गीतकार संजय आचार्य 'वरुण' ने उनके साहित्य के गंभीर मूल्यांकन और उनके नाम से साहित्यिक पुरस्कार शुरू किए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने सदीक का लोकप्रिय गीत "आपको सलाम मेरा, सबको राम-राम" सुनाकर उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया।

समारोह में जनकवि सदीक की पोती और दुबई निवासी युवा ग़ज़लकार-गीतकार कौसर ने उनके लोकप्रिय गीतों तथा अपनी स्वरचित ग़ज़ल की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर माहौल भावुक बना दिया।

वरिष्ठ कवयित्री मनीषा आर्य सोनी, संगीता सेठी और सलीम भाटी ने "पीर का नीर से क्या रिश्ता है", "हर उबलता साँस मेरा गीत बन गया" तथा "इंया किंया रे भाई इंया किया" जैसी रचनाओं की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। अब्दुल शकूर सिसोदिया ने सदीक साहब पर लिखी अपनी कविता सुनाई, जबकि 12 वर्षीय असमा ने उनकी कविता का प्रभावशाली पाठ किया।

ये बोले वक्ता : 

समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि मोहम्मद सदीक का साहित्य मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और सांप्रदायिक सद्भाव का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि सदीक साहब को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब साहित्य समाज में मानवीय मूल्यों और भाईचारे की स्थापना का माध्यम बने।

विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध शायर इरशाद अज़ीज़ ने कहा कि सदीक साहब इंसानियत और मोहब्बत के सच्चे शायर थे। वहीं  वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हनुमान कस्वां, साहित्यकार कमल रंगा तथा शायर डॉ. नासिर जैदीने भी सदीक साहब के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में गीतकार कौसर भाटी ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि विप्लव व्यास ने संचालन किया।