Bikaner Mayor Election : डोटासरा से मुलाकात के बाद डागा ने वापस लिया पर्चा, अब कल्ला-शेखावत आमने-सामने
Rudra News Express, Bikaner.
बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव की तस्वीर शुक्रवार को साफ हो गई। कांग्रेस के बागी पार्षद नवरतन डागा ने अपना निर्दलीय नामांकन वापस ले लिया। इसके साथ ही अब महापौर पद के लिए कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला और भाजपा के डॉ. सुरेन्द्र सिंह शेखावत के बीच सीधा मुकाबला रह गया है। डागा की नाम वापसी से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा से उनकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद उन्होंने नामांकन वापस लेने पर सहमति जताई।
डागा ने 16 सितंबर को अनिल कल्ला के सामने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर कांग्रेस के सामने चुनौती खड़ी कर दी थी। उनके नामांकन के बाद महापौर चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई थी। अब नाम वापसी के बाद वह स्थिति खत्म हो गई है।
कांग्रेस के पास 42, भाजपा के 27 पार्षद :
80 सदस्यीय नगर निगम में कांग्रेस ने 42 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा के 27 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। 10 निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद भी जीतकर आए हैं। कांग्रेस के लिए डागा की नाम वापसी का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ खड़े हुए अपने ही पार्षद अब चुनाव मैदान से हट गए हैं। वहीं भाजपा की ओर से डॉ. सुरेन्द्र सिंह शेखावत मैदान में हैं। अंतिम फैसला 21 सितंबर को होने वाले महापौर चुनाव में पार्षदों के मतदान से होगा।
डागा की नामवापसी में मेघवाल-सियाग की बड़ी भूमिका :
डागा की नाम वापसी के प्रयासों में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल और देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग की भूमिका सामने आई। इनके माध्यम से डागा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा से मुलाकात की।
हालांकि, डागा की नाम वापसी के बदले किसी राजनीतिक समझौते या भविष्य की जिम्मेदारी को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
भाजपा के लिये रास्ते लगभग बंद :
भाजपा के पास 27 पार्षद हैं और उसके प्रत्याशी डॉ. सुरेन्द्र सिंह शेखावत महापौर पद के चुनाव में मैदान में हैं।
ऐसे में भाजपा के लिए अपने 27 पार्षदों के अलावा अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाना चुनावी गणित का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। कांग्रेस के पास 42 पार्षद होने के बावजूद महापौर चुनाव का अंतिम परिणाम 21 सितंबर के मतदान से ही तय होगा।