Bikaner : पर्युषण महापर्व पर श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में अनूठी भक्ति संध्या, रोज पहुंच रहे 600-700 श्रावक-श्राविकाएं
Rudra News Exress Bikaner.
शाम के 8 बजते ही भीनासर का माहौल बदल जाता है। मंदिर परिसर में भजनों की स्वर लहरियां गूंजने लगती हैं और देखते ही देखते सैकड़ों श्रद्धालु प्रभु भक्ति की भावधारा में डूब जाते हैं। कोई भजनों के साथ झूमता नजर आता है तो कोई आंखें बंद कर भगवान पार्श्वनाथ की आराधना में लीन हो जाता है। यह नजारा इन दिनों भीनासर के श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में देखने को मिल रहा है।
पर्युषण महापर्व के अवसर पर कोचर मंदिरात एवं पंचायती ट्रस्ट के तत्वावधान में यहां भक्ति संध्या का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन लगातार दस वर्षों से हो रहा है। इस बार 8 सितंबर से शुरू हुई भक्ति संध्या 14 सितंबर तक प्रतिदिन रात 8 से 10 बजे तक चलेगी।
8 बजते ही उमड़ने लगते हैं श्रद्धालु :
आयोजन समिति से जुड़े अशोक कोचर और गौरव दफ्तरी के अनुसार भक्ति संध्या में गंगाशहर, भीनासर, बीकानेर सहित आसपास के गांवों और कॉलोनियों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पहुंच रहे हैं। रोजाना करीब 600 से 700 श्रद्धालु यहां प्रभु भक्ति में शामिल हो रहे हैं। प्रतिक्रमण के बाद विशेष रूप से बड़ी संख्या में महिलाएं भी भीनासर दरबार पहुंच रही हैं। कुछ ही देर में मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर जाता है और भक्ति गीतों के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
पुराने-नए भजनों से बन रहा भक्तिमय माहौल :
सुरेंद्र कोचर भुट्टा और पारस कोचर प्रेम पुगलिया ने बताया कि वरिष्ठ गायक कलाकार विनोद सेठिया और सुनील पारख (आनंद) के साथ युवा गायक अरिहंत नाहटा और रौनक कीचड़ भक्ति प्रस्तुतियां दे रहे हैं। गायकों की प्रस्तुतियों में पुराने और नए जैन भजनों का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है कि श्रद्धालु देर तक भक्ति में रम जाते हैं। मंदिर परिसर में भजनों की गूंज और श्रद्धालुओं की सहभागिता इस आयोजन को खास बना रही है।
करीब 1000 वर्ष पुरानी प्रतिमा आस्था का बड़ा केंद्र :
आयोजक राहुल दफ्तरी और मोहित कोचर के अनुसार रियासतकालीन भीनासर मंदिर के प्रति जैन समाज में विशेष आस्था है। मंदिर में भगवान श्री पार्श्वनाथ की लगभग 1000 वर्ष प्राचीन प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि प्रतिमा गुजरात से यहां लाकर स्थापित की गई थी। मंदिर में अधिष्ठायक देव श्री मणिभद्र वीर भी विराजमान हैं। श्रद्धालुओं में उनके प्रति भी गहरी आस्था है।
खास बात—एक साथ आते हैं अलग-अलग जैन संप्रदाय :
इस भक्ति आयोजन की सबसे खास बात इसकी व्यापक सहभागिता है। आयोजकों के अनुसार तेरापंथ, स्थानकवासी, मंदिरमार्गी सहित जैन समाज के विभिन्न संप्रदायों के श्रावक-श्राविकाएं एक साथ यहां पहुंचकर प्रभु भक्ति में शामिल होते हैं। महिला श्राविकाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। मंजू देवी दफ्तरी, मधु देवी कोचर, साधना दफ्तरी, पूजा कोचर, दिव्या कोचर, दीपा, संगीता, सारिका कोचर, पूजा सेठिया, इंद्रा सेठिया, समता, संगीता और सुंदर देवी सेठिया सहित सैकड़ों महिलाएं प्रतिक्रमण के बाद मंदिर पहुंचकर भक्ति में शामिल हो रही हैं।
पर्युषण महापर्व के दौरान भीनासर का यह मंदिर हर रात दो घंटे के लिए भक्ति के रंग में रंग रहा है। रात 8 बजे से शुरू होने वाली भक्ति संध्या 14 सितंबर तक जारी रहेगी। आयोजकों के अनुसार आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।