Bikaner : MGSU के नव-निर्मित भवनों में स्थापित किए गए महापुरुषों के चित्र एवं जीवनियां
RNE, BIKANER.
महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय परिसर में नव-निर्मित भवनों का नामकरण भारतीय ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के नाम पर किए जाने के क्रम में बुधवार को संबंधित भवनों में उनके चित्रों एवं जीवनियों की स्थापना का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के न्यासीगण एवं प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए महान संतों एवं ऋषियों के जीवन-दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन तथा समाज के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान अर्जन का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि-मुनियों एवं संतों के नाम पर भवनों का नामकरण तथा उनके जीवन-दर्शन को विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत करना विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक दृष्टि का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से इन महापुरुषों के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय परिसर में नव-निर्मित भवनों का लोकार्पण 7 जून 2026 को माननीय राज्यपाल, राजस्थान, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल तथा उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा द्वारा किया गया था। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म एवं ज्ञान परंपरा के महान विभूतियों के सम्मान में सेंट्रल फैसिलिटी फॉर रिसर्च का नाम आचार्य तुलसी भवन, एग्जामिनेशन सेंटर का नाम गुरु जम्भेश्वर भवन, सेंट्रल क्लासरूम (विज्ञान) का नाम मां करणी भवन, सेंट्रल क्लासरूम (कला) का नाम संत रामसुखदास भवन, एनआईईएलआईटी भवन का नाम संवित सदन, एकेडमिक-5 का नाम कपिल मुनि भवन, एकेडमिक-6 का नाम प्रचेता भवन तथा ध्वज वृत्त के समीप स्थित उद्यान का नाम अमृता देवी उद्यान रखा गया है।
कार्यक्रम के दौरान आचार्य तुलसी, मां करणी, कपिल मुनि, संत रामसुखदास जी महाराज तथा संत सोमगिरी जी महाराज के चित्रों एवं जीवन परिचय का अनावरण किया गया। विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इन महापुरुषों के आध्यात्मिक चिंतन, मानवीय मूल्यों तथा समाज सेवा के क्षेत्र में उनके अविस्मरणीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि इन महान विभूतियों का जीवन सत्य, सेवा, सदाचार, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रहित के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कपिल मुनि ट्रस्ट की ओर से श्री बनवारीलाल सेवग, श्री करणी माता मंदिर न्यास की ओर से श्री शंकरदान, आचार्य तुलसी के संबंध में श्री सुरपत बोथरा तथा संत रामसुखदास जी महाराज की ओर से श्री श्यामसुन्दर महाराज ने प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
अंत में कुलसचिव श्री यशपाल आहूजा ने सभी अतिथियों, विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से पधारे न्यासीगण तथा उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री यशपाल आहूजा, वित्त नियंत्रक श्री देवेन्द्र सिंह राठौड़, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. प्रभुदान चारण, सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संतोष कंवर शेखावत, मुख्य कुलानुशासक डॉ. गौतम मेघवंशी, कुलानुशासक डॉ. अभिषेक वशिष्ठ, श्री उमेश शर्मा, डॉ. लीला कौर, आचार्य अनिल कुमार छंगाणी, प्रो. राजाराम चोयल, डॉ. प्रगति सोबती, डॉ. फौजा सिंह, अमरेश कुमार सिंह तथा डॉ. मानकेशव सैनी सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।