Bikaner: प्रोफेसर डॉ. अमीनुद्दीन काजी का लंबी बीमारी के बाद निधन, जनाज़ा सुपुर्दे-ख़ाक
Updated: May 23, 2026, 17:46 IST
RNE Bikaner.
इतिहास विषय के प्रख्यात विद्वान, शिक्षाविद् और सादगीपूर्ण जीवन के प्रतीक प्रोफेसर डॉ. अमीनुद्दीन काजी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। शनिवार को उनका जनाज़ा बड़े क़ब्रिस्तान में सुपुर्दे-ख़ाक किया गया। अंतिम यात्रा में सभी धर्मों और समाजों के हजारों लोग, शिक्षक, शिक्षाविद् और गणमान्य नागरिक नम आंखों से शामिल हुए।
डॉ. काजी के जनाज़े को उनके पुत्र इफ्तेखारुद्दीन काजी, इम्तियाजुद्दीन काजी तथा पौत्र डॉ. अखियार काजी और अजीम काजी ने कंधा दिया। जनाज़े में उमड़ी भीड़ ने इस बात का एहसास कराया कि डॉ. काजी केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि पीढ़ियों के प्रेरणास्रोत थे।
पूर्व महापौर हाजी मक़सूद अहमद ने खिराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि डॉ. अमीनुद्दीन काजी ने इतिहास को केवल पढ़ाया नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने का कार्य किया। उन्होंने तीन पीढ़ियों तक विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा देकर शिक्षा को सेवा का स्वरूप दिया। सैकड़ों शोधार्थियों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन कर वे शिक्षा जगत में मिसाल बन गए।
उन्होंने कहा कि डॉ. काजी का व्यक्तित्व “सादा जीवन, उच्च विचार” की जीवंत मिसाल था। उन्होंने कर्म को ही पूजा मानकर जीवनभर ज्ञान का दीप जलाए रखा। उनकी विनम्रता, अनुशासन और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेंगे।
डॉ. काजी के निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने उनके पुत्र से फोन पर बात कर गहरा शोक व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने कहा कि समाज ने केवल एक इतिहासकार ही नहीं, बल्कि एक तपस्वी शिक्षक और सच्चा साधक खो दिया है।
पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में उनकी सेवाओं को सदैव याद रखा जाएगा। वहीं गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि “ज्ञान बांटना ही उनका उद्देश्य था।” शिक्षाविद् डॉ. बिठल बिस्सा और डॉ. बृजरतन जोशी ने कहा कि बीकानेर ने एक प्रख्यात शिक्षाविद् खो दिया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता नंदकिशोर सोलंकी, गुलाम मुस्तफा बाबू भाई, साजिद सुलेमानी और डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान सहित अनेक गणमान्य लोग जनाज़े में शामिल हुए और गहरा दुःख व्यक्त किया।
डॉ. अमीनुद्दीन काजी की कुल की फ़ातिहा रविवार सुबह 8:30 बजे जामा मस्जिद, मोहल्ला व्यापारीयान में रखी गई है।