बीकानेर : लेखक विजय कुमार शर्मा की नाट्य कृति का हुआ भव्य आगाज़
Jan 11, 2026, 18:56 IST
RNE NETWORK.
सांस्कृतिक नगरी कहे जाने वाले बीकानेर के लिए रविवार का दिन बीकानेर के साहित्य और रंगमंच के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर दर्ज हो गया, जब महाराजा नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम में वरिष्ठ लेखक, रंगकर्मी एवं शिक्षाविद विजय कुमार शर्मा की नाटक पुस्तक ‘अम्मा और अन्य नाटक’ का भव्य, गरिमामयी लोकार्पण सम्पन्न हुआ। यह आयोजन सोशल प्रोग्रेसिव सोसायटी, बीकानेर तथा गूंज कला एवं संस्कृति संस्थान, बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें शहर के साहित्यिक, सांस्कृतिक और रंगमंच से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
यह समारोह केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं था, बल्कि बीकानेर में रंगमंच और साहित्य के आपसी संवाद का उत्सव बन गया। उल्लेखनीय है कि यह बीकानेर का पहला ऐसा आयोजन था, जिसमें किसी नाटक-पुस्तक को केंद्र में रखकर पूर्णतः स्वतंत्र और विशिष्ट लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सोशल प्रोग्रेसिव सोसायटी के अध्यक्ष नदीम अहमद नदीम कने अतिथियों का स्वागत करते और संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोशल प्रोग्रेसिव सोसायटी का लक्ष्य साहित्य और समाज के बीच एक जीवंत सेतु बनाना है। लेखक विजय कुमार शर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विजय शर्मा की भाषा में सहजता है, उनकी अभिव्यक्ति में सच्चाई है और उनके लेखन में समाज की धड़कन। वे केवल नाटककार नहीं, बल्कि कविता और नज़्म में भी उतने ही सक्षम हैं। वे एक जन्मजात लेखक हैं, जो अपने साथियों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं।
वरिष्ठ लेखक नवल व्यास द्वारा लिखित लेखक-परिचय को युवा रंगकर्मी एवं उद्घोषक रोहित शर्मा ने प्रभावी शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने भरतपुर की एक रंगमंच कार्यशाला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब ‘आंगनबाड़ी’ जैसे विषय पर नाटक लिखने को कहा गया, तब विजय शर्मा ने मात्र दस मिनट में एक संपूर्ण, सशक्त और मंचनीय नाटक तैयार कर दिया।
मंच पर उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश भारद्वाज, मधु आचार्य ‘आशावादी’, विजय कुमार शर्मा, नदीम अहमद नदीम, डॉ. राज भारती शर्मा तथा भारती शर्मा द्वारा पुस्तक ‘अम्मा और अन्य नाटक’ का विधिवत लोकार्पण किया गया। वरिष्ठ रंगकर्मी एवं समीक्षक दयानंद शर्मा ने पुस्तक पर आधारित विस्तृत समीक्षात्मक पत्र का वाचन करते हुए कहा कि इस नाट्य-संग्रह में शामिल पाँच नाटक ‘अम्मा’, ‘जमीन पाँच के नीचे’, ‘सहारा’, ‘रंग’ और ‘आख़िरी लॉटरी’ केवल कथाएँ नहीं हैं, बल्कि हमारे समय, समाज और मनुष्य की गहरी पड़ताल हैं। इन नाटकों में सामाजिक विसंगतियों, पारिवारिक तनावों, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक द्वंद्वों का ऐसा संयोजन है जो पाठक और दर्शक दोनों को भीतर तक प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि विजय शर्मा के नाटक भारतीय रंगमंच परंपरा से जुड़े रहते हुए भी समकालीन यथार्थ की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।
वरिष्ठ रंगकर्मी प्रदीप भटनागर ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विजय शर्मा की यह नाट्य कृति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें शामिल नाटक आम आदमी के जीवन से जुड़े हुए हैं और उनकी भाषा तथा संप्रेषण शैली सरल, सहज और प्रभावशाली है।
पुस्तक के रचयिता विजय कुमार शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि उनके नाटकों की जड़ें नुक्कड़ रंगमंच में हैं। उन्होंने इस्मत चुगताई को उद्धृत करते हुए कहा कि दुनिया में लोग नहीं, कहानियाँ रहती हैं। उन्होंने कहा कि उनके नाटक उन्हीं कहानियों का रूप हैं, जो उन्होंने गलियों, सड़कों और समाज के बीच महसूस की हैं। उन्होंने विशेष रूप से नदीम अहमद नदीम का आभार व्यक्त किया, जिनकी प्रेरणा से यह नाट्य-संग्रह पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित हो सका।
अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ रंगकर्मी,पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि यह बीकानेर का पहला ऐसा आयोजन है जो पूरी तरह नाटक-पुस्तक को समर्पित रहा। उन्होंने भरतमुनि के नाट्यशास्त्र का उल्लेख करते हुए कहा कि जो काम देवता नहीं कर सकते, वह कलाकार कर सकते हैं। मधु आचार्य आशावादी ने सभी नाटकों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए समकालीन समय की उल्लेखनीय कृति बताते हुए विजय शर्मा की वैचारिक प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते की ।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन रंगकर्मी रोहित बोड़ा ने किया जिन्हें मंच द्वारा सम्मानित किया गया ।
इस ऐतिहासिक अवसर पर बीकानेर के साहित्य, रंगमंच और संस्कृति से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिनमें पुलकित शर्मा,योगेंद्र कुमार पुरोहित, अनूप सिंह, भरत सिंह, रामसहाय हर्ष, नदीम अहमद नदीम, रोहित बोडा, उदय व्यास, संगीता शर्मा, सोमेश शर्मा, जीत सिंह, इमरोज़ नदीम, अरमान नदीम, नूरुल हसन मदनी , डॉ. संजय सिंह सेंगर, राजेंद्र सक्सेना, कैलाश भारद्वाज, हेमंत भारद्वाज, महेश उपाध्याय, मोहम्मद इशाक गौरी, ओम प्रकाश सुथार, अहमद हारून कादरी, तरुण कुमार गौड़, संजय श्रीमाली, यशपाल शर्मा, आराधना शर्मा, गंगा विशन बिश्नोई, जगदीश चंद्र भार्गव, इसरार हसन कादरी, उमाशंकर स्वामी, वीनू शर्मा, कांता शर्मा, डॉ. राज भारती शर्मा, भारती शर्मा, सुनील कुमार जोशी, बुनियाद हुसैन ज़हीन, दिनेश उपाध्याय, नवनीत वर्मा, हुकुमचंद सेन, मोहनलाल डूडी, अजय जोशी, अजय सहगल, सुमित शर्मा, रोहित शर्मा, पंडित उत्तम कुमार शर्मा, आत्माराम भाटी, मनीष कुमार गहलोत, मनीष कुमार शर्मा, योगेश हर्ष, प्रमोद कुमार शर्मा, सुधा शर्मा, डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान, बुलाकी भोजक, नारायण आसरे, नवाब अली, असलम बेग, कुलभूषण शर्मा, जगदीश भार्गव, अल्लाह दीन निर्बाण, कमल रंगा, शकूर बीकाणवी, मोनिका गौड़, दीनदयाल जनागल, अमीन अली, सुरेश हिंदुस्तानी, हाजी रफीक अहमद, बलराज सिंह यादव, राजेंद्र जोशी, जाकिर अदीब, सुनील जोशी, गिरीश पुरोहित, मूलचंद सांखला, मनीष जोशी, विपिन पुरोहित, लोकेश दत्ता आचार्य, मुरली मनोहर, नारायण जोशी, ठाकुरदास, हिमांशु शर्मा आदि शामिल थे।
कार्यक्रम का समापन रामसहाय हर्ष द्वारा प्रस्तुत औपचारिक आभार ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सोशल प्रोग्रेसिव सोसायटी और गूंज कला एवं संस्कृति संस्थान की ओर से मंचासीन अतिथियों, लेखक, वक्ताओं, कलाकारों, दर्शकों तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि ऐसे आयोजन ही बीकानेर की साहित्यिक और रंगमंचीय परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में पर्दे के पीछे कार्य करने वाले सभी सहयोगियों और आयोजक टीम का विशेष धन्यवाद भी दिया। यह आयोजन बीकानेर की रंगमंचीय और साहित्यिक परंपरा को एक नई दिशा देने वाला सिद्ध हुआ।