Budget 2026-27 : Bikaner से Congress नेता कल्ला, सुशीला, बिशनाराम, यशपाल का तीखा हमला
RNE Bikaner.
केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर कांग्रेस नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह बजट आम जनता, किसान, युवा, मध्यम वर्ग और गरीबों की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता, बल्कि बड़े उद्योगपतियों, कॉर्पोरेट घरानों और वीवीआईपी वर्ग के हितों को प्राथमिकता देने वाला बजट है।
नोखा विधायक सुशीला रामेश्वर डूडी ने कहा कि यह बजट आम जनता से पूरी तरह कट हुआ है। न तो महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं और न ही मध्यम वर्ग व गरीबों को कोई राहत दी गई है। किसानों की आय दोगुनी करने का वादा एक बार फिर भाषणों तक सीमित रह गया। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में अपर्याप्त आवंटन सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रियों के वेतन, राजकीय अतिथियों और विशेष वर्गों पर 1102 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि आम नागरिक की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया।
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पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला ने बजट को किसान, गरीब, दलित और बेरोजगार विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि मनरेगा में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्यों पर डालना “काम के अधिकार” को कमजोर करेगा। विदेशी निवेशकों को 2047 तक कर छूट देना और देशी निवेशकों की उपेक्षा करना भेदभावपूर्ण नीति है। कैंसर जैसी घातक बीमारी की दवाओं के लिए 2000 करोड़ का प्रावधान ऊंट के मुंह में जीरे समान है। साथ ही नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त बजट का अभाव गंभीर चिंता का विषय है।
पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी ने केंद्रीय बजट 2026 को राजस्थान के साथ सौतेला व्यवहार बताया। उन्होंने कहा कि बजट में न तो ईआरसीपी को राष्ट्रीय दर्जा मिला और न ही राज्य के लिए कोई नई बड़ी परियोजना घोषित की गई। यह बजट किसान, गरीब, मजदूर, महिला और बेरोजगार विरोधी है। मनरेगा पर राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालकर काम के अधिकार को कमजोर किया गया है। कुल मिलाकर यह बजट आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता।
देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने कहा कि यह बजट निराशा और अधूरी अपेक्षाओं का दस्तावेज है। किसानों की आय, पूंजीगत खर्च, शिक्षा-स्वास्थ्य और रोजगार—हर मोर्चे पर बजट कमजोर साबित हुआ है।
पूर्व शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल गहलोत ने बजट को किसान, युवा, मजदूर और मध्यम वर्ग के लिए निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि न MSP की गारंटी दी गई, न महंगाई पर कोई राहत, और न ही रोजगार के लिए कोई ठोस रोडमैप। टैक्स स्लैब में बदलाव न होना मध्यम वर्ग के साथ अन्याय है।
पूर्व महापौर व पीसीसी सदस्य हाजी मक़सूद अहमद ने बजट को दिशाहीन बताते हुए कहा कि यह भारतीय मुद्रा की वैल्यू घटाने वाला और केवल “विकसित भारत” के सपने दिखाने वाला बजट है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के लिए उर्वरकों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और राजस्थान के साथ सौतेला व्यवहार किया गया।
कांग्रेस नेता नितिन वत्सस ने कहा कि इस बजट से आमजन की आशाएं धराशायी हो गई हैं। टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल पर राहत नहीं और व्यावसायिक गैस के दाम बढ़ाना आने वाले समय में घरेलू गैस महंगी होने का संकेत है, जिसका सीधा असर महिलाओं पर पड़ेगा।
NSUI जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण गोदारा ने बजट को छात्र और युवा विरोधी करार देते हुए कहा कि इसमें न रोजगार की बात है और न ही युवाओं से जुड़ी ठोस योजनाएं। यह सरकार के युवाओं के प्रति असंवेदनशील रवैये को उजागर करता है।