बुलाकी शर्मा बोले-रेणुबाला की कहानियां प्रश्न छोड़ती है! बेचैन करती है!! यही सफलता है!!!
Rudra News Express Bikaner.
उपन्यासकार एवं कथाकार रेणु बाला चौहान के कहानी संग्रह ‘अपराजिता’ का विमोचन बीकानेर के महाराजा नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम में हुआ। वी.आर. फाउंडेशन की ओर से आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं स्तंभ लेखक बुलाकी शर्मा थे।
बुलाकी शर्मा ने बताई बारीकियां :
बुलाकी शर्मा ने कहा, रेणु बाला चौहान की कहानियों की विशेषता यह है कि वे पाठक के मन में आरंभ से अंत तक उत्सुकता बनाए रखती हैं। उनका कथा-कहन इतना प्रभावशाली और सम्मोहक है कि पाठक कहानी को पूरा पढ़े बिना नहीं रह सकता। कहानियां पढ़ने के बाद भी पाठक के मन में लंबे समय तक अनेक प्रश्न और बेचैनी बनी रहती है। यही किसी कहानी की सार्थकता और सफलता है।
जिन घटनाओं को हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं, लेखिका उनमें से संवेदना का सूत्र तलाशती हैं और आत्मकथात्मक शैली में उनका ऐसा कथा-विन्यास तैयार करती हैं कि पाठक का कथा-पात्रों के साथ गहरा तादात्म्य स्थापित हो जाता है।
गोविंद माथुर ये बोले :
कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर के वरिष्ठ साहित्यकार गोविन्द माथुर ने की। माथुर ने कहा, साहित्य निजी एवं सामाजिक संबंधों की उन अव्यक्त समस्याओं को स्वर देने का माध्यम है, जिन्हें सामान्यतः अनदेखा कर दिया जाता है। लेखिका का यह कहानी संग्रह इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है और साहित्य की इस कसौटी पर खरा उतरता है। डॉ. नमामी शंकर आचार्य ने पत्रवाचन करते हुए कहा कि लेखिका ने आत्मकथात्मक शैली में रची गई कहानियों के पात्रों का प्रभावशाली चरित्र-चित्रण किया है।
रेणु बाला ने सृजन के अनुभव बताए :
कथाकार रेणु बाला चौहान ने अपने उद्बोधन में कहानी संग्रह के लेखन के दौरान हुए अनुभवों और उनसे जुड़ी घटनाओं को साझा किया। उन्होंने कहानियों के मूल कथानक, विचारों और भावनात्मक पक्षों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि लिखने के दौरान उनके जीवन में कई ऐसी घटनाएं भी घटीं, जिनकी झलक पाठकों को इन कहानियों में देखने को मिलेगी। उनका मानना है कि इन कहानियों को पढ़ते हुए पाठकों को कहीं न कहीं अपने जीवन और अनुभवों की भी झलक महसूस होगी।
मेघना-जोशी की बात :
विशिष्ट अतिथि डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि इस कहानी संग्रह में लेखिका ने पात्रों का अत्यंत संवेदनशील चित्रण किया है। विशेष रूप से कुछ कहानियों में पात्रों के अंतर्द्वंद्व को जिस सुंदरता और गहराई से अभिव्यक्त किया गया है, वह प्रभावित करता है।
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने संग्रह की सभी कहानियों की सराहना करते हुए कहा कि महिला कहानीकार होने के बावजूद लेखिका ने पुरुष पात्रों के मनोभावों और संवेदनाओं को भी जिस सूक्ष्मता से अभिव्यक्त किया है, वह उल्लेखनीय है।
स्वागत-आभार, ये रहे मौजूद :
नदीम अहमद नदीम ने कहा कि ‘अपराजिता’ लेखिका की कल्पनाशक्ति, जीवनानुभवों और संवेदनशील दृष्टि का सुंदर संकलन है । अभिनंदन पत्र का वाचन युवा साहित्यकार अरमान नदीम ने किया। वी आर फाउंडेशन के अध्यक्ष विशाल सोलंकी ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी की और से तसनीम नदीम, इमरोज नदीम, विजय शर्मा, अनीसुद्दीन सिद्दीकी, राजेन्द्र सिंह देपावत, कमल चौहान, पुखराज तंवर, कन्हैया लाल कच्छावा, सीताराम कच्छावा, कमल रंगा, डॉ. अजय जोशी, राजाराम स्वर्णकार, प्रेम व्यास, डॉ. बिंदु भसीन, मुकेश व्यास, डॉ. संध्या सक्सेना, डॉ. अनु पंवार, श्यामा व्यास, मनोज पुरोहित, ज़किया सुल्ताना, सुमन गहलोत, डॉ. प्रीति मोहता, डॉ. पंकज दाधीच, अरुणा त्यागी आदि मौजूद रहे