चम्पालाल गहलोत को “श्रीमती कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान" मालचंद बोले, गहलोत स्थापत्य ही नहीं, संवेदना शिल्पी भी
Rudra News Express Bikaner.
स्थापत्य कला, वास्तु कला एवं धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापत्य कला विशेषज्ञ चम्पालाल गहलोत को “श्रीमती कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया। प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट की ओर से लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में आयोजित समारोह में अतिथियों ने गहलोत को माला, साफा, उपरणा, श्रीफल, शॉल एवं अभिनंदन-पत्र अर्पित कर सम्मानित किया।
समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, आलोचक एवं चिंतक मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि साहित्य और स्थापत्य कला दोनों समाज की धरोहर हैं। चम्पालाल गहलोत ने ईंट-पत्थरों से केवल भवन नहीं बनाए, बल्कि बीकानेर की स्थापत्य कला में नवाचार के जरिए नया अध्याय जोड़ा है। उन्होंने कहा कि गहलोत केवल स्थापत्य कला विशेषज्ञ नहीं, बल्कि संवेदना शिल्पी हैं।
तिवाड़ी ने कहा कि गहलोत ने बीकानेर की स्थापत्य परंपरा के प्रमुख लाल पत्थर की नक्काशी, झरोखों की लय और जालियों की छाया जैसी विशेषताओं को आधुनिक भवनों में पुनर्जीवित किया है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि सृजन सिर्फ लिखने में ही नहीं, बल्कि गढ़ने में भी होता है। चम्पालाल गहलोत ने स्थापत्य कला को व्यवसाय नहीं, साधना माना है। जब कला सेवा बन जाती है, तभी वह सृजन सेवा कहलाती है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सृजन और सेवा के साथ बीकानेर की स्थापत्य चेतना का भी सम्मान है।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. नरसिंह बिनानी ने कहा कि स्थापत्य कला को बचाए रखना आज चुनौती है। गहलोत ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए स्थापत्य की आत्मा को बचाए रखा और नई पीढ़ी को भी इस कला से प्रशिक्षित किया। स्वागताध्यक्ष वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने चम्पालाल गहलोत का परिचय देते हुए स्थापत्य, वास्तु एवं धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में उनकी दशकों की साधना को रेखांकित किया।
सम्मान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए चम्पालाल गहलोत ने कहा कि यह सम्मान उनके व्यक्तिगत योगदान से अधिक बीकानेर की समृद्ध स्थापत्य कला परंपरा का सम्मान है। समारोह में राजेश रंगा, अशोक शर्मा, किशन देराश्री, अरुण जे. व्यास, भवानी सिंह राठौड़, पुनीत कुमार रंगा, नवनीत व्यास, गिरिराज पारीक, कासिम बीकानेरी, आशीष रंगा, कन्हैयालाल, तोलाराम सारण, रामेश्वर सुथार, धन्नाराम, जुल्फीकार, श्याम चूरा, मोहित पुरोहित सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कवि गिरिराज पारीक ने किया तथा आभार शिक्षाविद् भवानी सिंह राठौड़ ने व्यक्त किया।