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PBM में प्रसूता शारदा की मौत : मोर्चरी के आगे धरने पर परिजन कांग्रेस नेता, वार्ता विफल, शव उठाने से इनकार, प्राचार्य से गहमागहमी

 

 

RNE Bikaner

 

बीकानेर केपीबीएम अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में एक और दुखद मोड़ आ गया है। इलाज के दौरान दूसरी प्रसूता शारदा की मौत के बाद परिजनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा। शारदा का शव मोर्चरी में रखवाकर परिजन और कांग्रेस नेता धरने पर बैठ गए तथा अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। 

 

इस संबंध में संभागीय आयुक्त के साथ लंबी वार्ता हुई। वार्ता में देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल, विधायक सुशीला डूडी, पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, लक्ष्मण कड़वासरा, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष भंवर कूकना, एनएसयूआई जिला अध्यक्ष श्रीकृष्ण गोदारा, कांग्रेस प्रभारी शिमला नायक,राजेंद्र मूंड सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, जिला कलेक्टर निशांत जैन, एडीएम उम्मेद सिंह रतनू ने धरनारत परिजनों और नेताओं से वार्ता की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। वार्ता विफल रहने के बाद धरना जारी रहा।

 

शारदा के पिता हीरालाल ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी डिलीवरी के समय पूरी तरह स्वस्थ थी, लेकिन अस्पताल की लापरवाही के कारण उसकी जान चली गई। उन्होंने दोषी चिकित्सकों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

मोर्चरी के बाहर धरना, शव उठाने से इनकार

शारदा की मौत के बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। धरने में शामिल लोगों ने दोषियों पर कार्रवाई, परिवार के एक सदस्य को संविदा नौकरी और उचित आर्थिक मुआवजा देने की मांग रखी। मांगें पूरी नहीं होने तक शव नहीं उठाने की चेतावनी दी गई।

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य पहुंचे, बढ़ा तनाव

धरने के दौरान सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा भी मोर्चरी पहुंचे और कांग्रेस नेताओं से बातचीत की। इस दौरान कांग्रेस नेता आनंद जोशी, बंशीलाल आचार्य, मुकेश आचार्य सहित अन्य नेताओं और प्रशासनिक पक्ष के बीच तीखी बहस और गहमागहमी हुई। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

गौरतलब है कि हाल ही में पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ गई थी। इनमें से कई महिलाओं की किडनी प्रभावित होने के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था। पहले एक प्रसूता की मौत हुई थी और अब शारदा के निधन के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

दूसरी प्रसूता की मौत के बाद पीबीएम अस्पताल के खिलाफ जनाक्रोश लगातार बढ़ रहा है और मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।