कोडमदेसर सरोवर संरक्षण के लिए उमड़े श्रद्धालु, भैरव भक्तों ने संभाली विरासत बचाने की जिम्मेदारी
RNE Bikaner.
बीकानेर की आस्था, श्रद्धा और विश्वास के सबसे बड़े केंद्र श्री कोडमदेसर भैरवनाथ मंदिर में इन दिनों केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि जनसेवा और पर्यावरण संरक्षण का भी अनूठा अभियान चल रहा है। सदियों से शहर के रक्षक देवता के रूप में पूजे जाने वाले बाबा भैरवनाथ के पावन धाम पर स्थित ऐतिहासिक सरोवर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए शुरू किया गया जनसहयोग अभियान अब एक जनआंदोलन का स्वरूप लेता जा रहा है।
कम्युनिटी वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में चल रहे इस अभियान में श्रद्धालु स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान और आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। संस्था के संरक्षक राजकुमार किराडू के नेतृत्व में मंदिर परिसर और सरोवर क्षेत्र के संरक्षण कार्यों को लगातार गति दी जा रही है।
सरोवर बचाने का संकल्प :
अभियान के तहत ऐतिहासिक सरोवर की सफाई, गाद और मिट्टी निकालने, क्षतिग्रस्त दीवारों के पुनर्निर्माण तथा परिसर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही भीषण गर्मी को देखते हुए पशु-पक्षियों के लिए नियमित पेयजल व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। सोसायटी का मानना है कि यह सरोवर केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि कोडमदेसर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्रद्धालुओं से किया सहयोग का आह्वान :
सोसायटी के अध्यक्ष कन्हैयालाल भाटी ने बताया कि रविवार, 31 मई को मंदिर परिसर में विशेष जनसहयोग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और भैरव भक्तों को अभियान की जानकारी दी गई तथा अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार योगदान देने का आग्रह किया गया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के बिना ऐसे बड़े संरक्षण कार्य संभव नहीं हैं और यह अभियान समाज की सामूहिक शक्ति का उदाहरण बनता जा रहा है।
भैरव भक्तों ने निभाई सक्रिय भूमिका :
अभियान में दीपक सोलंकी, भाया महाराज, भगवान गहलोत, रामेश्वर गहलोत, मूलचंद गहलोत, अंशुल गहलोत, मुरली पंवार, मनोज सेवग, भीमराज सेवग, रोहन मोदी, जयप्रकाश पारीक, विकास रंगा, अभिमन्यु स्वामी, शुभम छंगाणी, शुभम सुथार, राधे छंगाणी, नवल पारीक, देवरतन जोशी और किशन किराडू सहित अनेक श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।