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आसानियों के चौक मंदिर में प्रवचन, जाप और विशेष अंगी, शनिवार से होगा कल्पसूत्र का वाचन-विवेचन

 

Rudra News Express Bikaner.

श्री पार्श्वचन्द्र सूरि गच्छ जैन संघ के पर्युषण पर्व के तहत शुक्रवार को आसानियों के चौक स्थित भगवान महावीर स्वामी मंदिर में विशेष अंगी, स्तुति-वंदना और नवकार महामंत्र का जाप हुआ। वयोवृद्ध साध्वी श्री सुव्रताश्रीजी ने अष्टानिका प्रवचन दिए। शनिवार से कल्पसूत्र का वाचन-विवेचन शुरू होगा।
श्री पार्श्वचन्द्र सूरि गच्छ जैन संघ के अध्यक्ष रवीन्द्र रामपुरिया एवं मंत्री प्रताप रामपुरिया ने बताया कि मंदिर में भगवान महावीर स्वामी, आदिनाथ, पार्श्वनाथ, शंखेश्वर भगवान, शांतिनाथ दादा तथा गुरुदेव पार्श्वचंद्र सूरीश्वरजी आदि प्रतिमाओं पर विशेष अंगी रचना की जा रही है। राहुल राखेचा, कुलदीप सुराणा, रूपेश रामपुरिया एवं विभोर रामपुरिया सहित अनेक युवक-युवतियां और बालक-बालिकाएं श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसमें भाग ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शनिवार से साध्वी श्री सुव्रताश्रीजी कल्पसूत्र का वाचन एवं विवेचन करेंगी। इस दौरान भगवान महावीर स्वामी की माता त्रिशला को स्वप्न में दिखाई दिए 14 शुभ स्वप्नों का प्रदर्शन किया जाएगा। भगवान महावीर स्वामी के जन्म प्रसंग पर पालने में झुलाने का आयोजन भी होगा।
पालने का लाभ मूलचंद-नवरतन बांठिया परिवार ने लिया है। कल्पसूत्र को रामपुरिया उपासरे से बड़े उपासरे तक गाजे-बाजे के साथ लाने का लाभ जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र महिला मंडल ने लिया। वहीं चैत्य परिपाटी का लाभ प्रकाशचंद, राजेश एवं मनीष राखेचा परिवार ने लिया। संघ की ओर से सभी लाभार्थी परिवारों की अनुमोदना की गई।
मंदिर में शनिवार रात साढ़े आठ बजे प्रभु भक्ति का आयोजन होगा। पर्युषण पर्व के दौरान अक्षय निधि, समोसरण और मोक्ष तप सहित अनेक तपस्याएं भी चल रही हैं।
कल्पसूत्र जैन धर्म का महत्वपूर्ण पवित्र ग्रंथ : साध्वी सुव्रता श्री
जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ की वयोवृद्ध साध्वी पदम प्रभा के सानिध्य में शुक्रवार को रामपुरिया उपासरे में साध्वी श्री सुव्रताश्रीजी ने कल्पसूत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कल्पसूत्र जैन धर्म का महत्वपूर्ण और पवित्र ग्रंथ है। इसमें तीर्थंकरों के जीवन-चरित्र के साथ जैन साधु-साध्वियों के आहार-विहार एवं आचार संबंधी विषयों का वर्णन मिलता है।
उन्होंने बताया कि कल्पसूत्र की रचना आचार्य भद्रबाहु ने भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण के लगभग डेढ़ शताब्दी बाद की थी। मूल रूप से यह प्राकृत भाषा में लिखा गया और बाद में इसका हिंदी सहित कई भाषाओं में अनुवाद हुआ।
बीकानेर के नाहटा चौक स्थित अभय जैन ग्रंथालय एवं सार्दुल प्राच्य प्रतिष्ठान में कल्पसूत्र की अनेक प्राचीन हस्तलिखित प्रतियां उपलब्ध हैं।
कल्पसूत्र में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ), 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ, 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ और 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जीवन-चरित्र एवं आदर्शों का वर्णन है। इसमें जैन आचार्यों एवं गुरुओं की वंशावली, चातुर्मास और मुनियों के आवश्यक आचार नियमों का भी उल्लेख मिलता है।
साध्वी श्री ने बताया कि जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक परंपरा के खरतरगच्छ, तपागच्छ और पार्श्वचन्द्र गच्छ आदि में पर्युषण पर्व के दौरान श्रावक-श्राविकाएं विशेष रूप से कल्पसूत्र का श्रवण करते हैं तथा साधु-साध्वियां इसका वाचन-विवेचन करते हैं। कल्पसूत्र का एक दिन प्राकृत भाषा में तथा अन्य दिनों में हिन्दी में वाचन-विवेचन किया जाता है।