डॉ रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान साहित्य अवदान के लिए मिला
मधु आचार्य ' आशावादी '
कवि, आलोचक, नाटककार, चिंतक डॉ नंदकिशोर आचार्य को वर्ष 2026 का डॉ रामविलास शर्मा आलोचना पुरस्कार अर्पित किया जाएगा। डॉ आचार्य के हिंदी साहित्य को विशिष्ट अवदान के लिए यह पुरस्कार निर्णायक समिति ने घोषित किया है। गत वर्ष यह पुरस्कार प्रख्यात रचनाकार आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी को मिला था।
सम्मान की प्रशस्ति में निर्णायक मंडल ने कहा है कि डॉ आचार्य ने अपने लेखन , चिंतन में भारतीय मनीषा और ज्ञान के विविध अनुशासनों की आवाजाही को आबाद रखते हुए हिंदी आलोचना को एक नई अर्थ मीमांसा के लिए प्रेरित किया है। उनकी इस मान्यता में बल है कि साहित्य की प्रक्रिया संस्कृति को किन्हीं शास्त्रीय अवधारणाओं की पुष्टि करने के लिए नहीं बल्कि मानव चित्त की संवेदनात्मकता को पुनर्नवा करने की ओर प्रवृत्ति होती है। इस पुरस्कार की निर्णायक समिति में नित्यानन्द तिवारी, अशोक वाजपेयी व हरीश त्रिवेदी थे।
डॉ नंदकिशोर आचार्य : एक दृष्टि
हिंदी साहित्य में डॉ नंदकिशोर आचार्य का नाम बहुत ही आदर के साथ लिया जाता है। वे अज्ञेय द्वारा संपादित चौथे सप्तक के कवि थे। उससे आचार्य को राष्ट्रीय पहचान मिली। बाद में उनके द्वारा लिखित ' अज्ञेय की काव्य तितीर्षा ' आलोचनात्मक कृति को पूरे देश में सम्मान मिला। यह पुस्तक आज भी देश के विश्वविद्यालयों में शोधार्थियों के मार्गदर्शन का काम करती है। देश मे डॉ आचार्य को एक प्रतिष्ठित आलोचक के रूप में पहचाना जाता है। उन पर अनेकों शोध देशभर में हुए है। एक कवि के रूप में डॉ नंदकिशोर आचार्य को विशेष ख्याति है। जीवन दर्शन, प्रकृति को केंद्र में रखकर उन्होंने अपनी काव्य साधना की है। प्रकृति के पांच तत्त्वों पर उनकी लाजवाब काव्य रचनाएं है। उनके काव्य पर अनेक आलोचनात्मक पुस्तकें भी लिखी गयी है।
उनके नाटक देहान्तर, जूते, गुलाम बादशाह, बापू के देश भर में मंचन वरिष्ठ नाट्य निर्देशकों ने किए है। उनका अपना नाटक का एक अलग मुहावरा है। हिंदी साहित्य का इतिहास डॉ आचार्य के उल्लेख के बिना अधूरा है। प्रखर साहित्यिक वक्ता के रूप में उनकी खास पहचान है। साहित्य, संस्कृति, भारतीय मीमांसा, भारतीय साहित्य परंपरा आदि विषयों पर उनके आलेख हर पाठक को कुछ नया सीखने का अवसर भी देते है। अपनी बेबाक राय के लिए वे पहचाने जाते है। डॉ आचार्य एक कुशल पत्रकार भी है। मरुदीप साप्ताहिक के जरिये उन्होंने देश को साहित्यिक पत्रकारिता की नई दिशा प्रदान की। एक नहीं बल्कि देश के हर प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार उनको अर्पित हुए है। हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर है बीकानेर के डॉ नंदकिशोर आचार्य।
बीकानेर में खुशी की लहर:
डॉ नंदकिशोर आचार्य को डॉ रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान 2026 अर्पित होने पर राजस्थान के साथ बीकानेर के साहित्यिक , सामाजिक जगत में खुशी की लहर छाई है।
साहित्यकार डॉ अर्जुन देव चारण, रामस्वरूप किसान, माधव हाड़ा, डॉ मंगत बादल, मधु आचार्य ' आशावादी ', ब्रजरतन जोशी, मालचंद तिवाड़ी, अनिरुद्ध उमट, बुलाकी शर्मा, कमल रंगा, नगेन्द्र किराड़ू, डॉ सत्यनारायण सोनी, कृष्ण आशु, संजय पुरोहित, अमित गोस्वामी, रवि शुक्ला, असित गोस्वामी, कासिम बीकानेरी, नवनीत पांडे, नदीम अहमद नदीम, जाकिर अदीब, बुनियाद जहीन, गजेसिंह राजपुरोहित, राजेन्द्र बारहठ, भंवर सिंह सामोर, गीता सामोर, शरद केवलिया, सीमा पारीक, नमामी शंकर आचार्य, गौरीशंकर प्रजापत, प्रशांत बिस्सा, पूनम चौधरी, जीनस कंवर, सुनीता बिश्नोलिया, डॉ मेघना शर्मा, सुचित्रा कश्यप, सुशील छंगाणी सहित अनेक साहित्यकारों व साहित्य अनुरागियों ने खुशी जाहिर की है।
सामाजिक क्षेत्र में प्रसन्नता:
सामाज के अलग अलग क्षेत्रों में सक्रिय लोगों ने भी डॉ नंदकिशोर आचार्य के इस सम्मान को बीकानेर, साहित्य जगत के लिए गौरव बताया है। विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक व संस्थापक सुशील ओझा, राजेश कुमार रंगा, विद्यासागर आचार्य, ब्रह्मदत्त आचार्य, सत्यप्रकाश आचार्य, महेंद्र आचार्य, पत्रकार धीरेंद्र आचार्य, पत्रकार अनुराग हर्ष, सुकान्त किराड़ू, आनंद व्यास, अनिल आचार्य, पूर्व निगम काउंसलर किशोर आचार्य, बिसनाराम सियाग, मदन मेघवाल, राहुल जदुसांगत, मनीष पुरोहित ' नटसा ', अभिषेक आचार्य, ज्योतिर्विद राजेन्द्र व्यास ' ममु महाराज ', ज्योतिषाचार्य हरिनारायण व्यास ' मन्नासा ' आदि ने खुशी जाहिर की है।
रंगकर्मी भी प्रसन्न:
रंगकर्मी प्रदीप भटनागर, जीतसिंह, कैलाश भारद्वाज, विनोद भटनागर, प्रदीप माथुर, विजय सिंह राठौड़, सुधेश व्यास, कमल अनुरागी, रमेश शर्मा, मंदाकिनी जोशी, नवल व्यास, दीपांकर, मंजू रांकावत आदि ने खुशी जाहिर की है।