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चुनावी खुरचन : सीट एक, 15 दावेदार, वोटर चक्करघिन्नी, मतदाता को समझ ही नहीं आ रहा कि किसको चुनें, दलीय उम्मीदवार फंस गए निर्दलीयों के घेरे में, थिनर की याद दिलाने वाला वार्ड, वही उम्मीदवार

 

नगर निगम वार्ड पार्षद चुनाव में एक ही वार्ड ऐसा है जहां सवा दर्जन उम्मीदवार मैदान में है। अब सीट तो एक को मिलेगी, पर रेस 15 लोग लगा रहे हैं। मैदान छोटा पड़ रहा है मगर आड़े तिरछे होकर सभी धावक दौड़ रहे हैं ताकि किसी भी तरह हो, रेस जीत लें। पार्टी, जाति, धर्म, समाज, रिश्तेदारी, अपणायत, मित्रता आदि सब कुछ 15 धावक दाव पर लगा रहे हैं, वो भी पूरे दमखम से। पाटों पर इस बाधा दौड़ की सर्वाधिक चर्चा हो रही है। जितायेगा तो मतदाता, मगर पाटे अपना मतदान अभी से कर रहे हैं। आश्चर्य यह है कि रोज उनका मत बदल रहा है। पाटा है , उसका तो रोज का अपना सेंसेक्स होता है।

पाटेबाज

नगर निगम पार्षद के चुनाव में एक वार्ड में ज्यादातर कम ही उम्मीदवार रहते हैं। मगर इस बार एक वार्ड ऐसा भी है जहां एक सीट के लिए 15 उम्मीदवार कमर कसके मैदान में उतरे हुए हैं। इनमें से 13 उम्मीदवार निर्दलीय हैं। इतनी बड़ी संख्या में निर्दलीय होने से हर कोई असमंजस में है। सबसे बड़ी बात यह है कि वोटर भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि क्या फैसला करे। और तो और, शहर के पाटे भी इस वार्ड को लेकर जीत की भविष्यवाणी करने से बच रहे हैं। नहीं तो वे पाटे पर बैठे बैठे ही रिजल्ट निकाल देते हैं।

इस वार्ड को लेकर इस बार पाटे भी स्थिर भविष्यवाणी नहीं कर रहे हैं। आदत मुताबिक रोज भविष्यवाणी करते हैं और दूसरे दिन उसे बदल भी लेते हैं। उस वार्ड के मतदाताओं के साथ साथ पाटेबाज भी चक्करघिन्नी हो चुके हैं और कुछ समझ ही नहीं पा रहे हैं। मजे कि बात है कि पार्टियों के अधिकृत उम्मीदवार भी अमुझे हुए हैं, राय नहीं बना पा रहे हैं।

भाजपा व कांग्रेस के नेता और प्रत्याशी यह भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि किस निर्दलीय से नुकसान होगा और किससे फायदा, इस वजह से ही उनके कुछ भी समझ नहीं आ रहा। अंधाधुंध केवल प्रचार करके अपना एक एक वोट डलवाने का जतन कर रहे हैं। राजनीतिक पंडित भी इस वार्ड की चुनावी गणित समझ नहीं पा रहे। पाटों की रिपोर्ट भी इस वार्ड को लेकर स्थिर नहीं है।

पर, उम्मीदवारों की अधिक संख्या के कारण यह वार्ड पूरे शहर और पाटों की चर्चा के केंद्र में आया हुआ है। लोग मतदाताओं से जब उनका रुख पूछते हैं तो उनका एक ही जवाब रहता है कि अभी तो तय नहीं किया, बहुत से उम्मीदवारों के पक्ष में वोट करने का दबाव आ रहा है, अब ऐनवक्त पर क्या होता है, यह कैसे बताएं। इस वार्ड के परिणाम को जानने की उत्सुकता मतगणना के दिन तक रहेगी। पाटेबाज जरूर दावा कर रहे हैं कि मतदान के दिन पाटा रिजल्ट डिक्लेयर कर देगा।

थिनर की याद दिलाने वाला वार्ड

परकोटे के भीतर के शहर का एक वार्ड खूब चर्चा में रहा है। उस वार्ड की चर्चा अभी भी पाटों पर चल रही है। इस वार्ड के एक प्रत्याशी को लेकर चलते मतदान के समय खबर आई कि उसे जबरदस्ती थिनर पिला दिया गया। पाटे उस घटना को अभी तक नहीं भूले हैं। इस बार यह वार्ड है 61 नम्बर।

उस समय के थिनर वीर गिरिराज जोशी इस बार भी इस वार्ड से उस समय की तरह भाजपा के प्रत्याशी हैं। उस थिनर कांड के समय तो वे चुनाव जीत गए थे। इस बार क्या घटना होती है, परिणाम क्या रहता है, इस पर पाटों की पूरी नजर है।