QPR मॉडल और “आई सपोर्ट माय फ्रेंड मॉड्यूल के जरिए मानसिक संकट की पहचान और समय पर सहायता पर जोर
RNE Bikaner
बीकानेर, मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग, पीबीएम अस्पताल तथा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम इकाई, बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मानसिक स्वास्थ्य माह एवं विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के तीसरे दिन मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा तनाव प्रबंधन, आत्महत्या रोकथाम एवं नशा मुक्ति विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र कुमार तथा मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीगोपाल गोयल के संयुक्त परिचयात्मक संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विद्यार्थियों को मानसिक समस्याओं को लेकर झिझक या संकोच करने की बजाय जरूरत पड़ने पर समय रहते विशेषज्ञ सहायता लेनी चाहिए।
इस दौरान प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार एवं डॉ. श्रीगोपाल गोयल ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं स्टाफ को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं नशा मुक्ति के प्रति सजग रहने तथा समाज में इससे जुड़े सकारात्मक संदेशों का प्रसार करने की शपथ भी दिलाई।
इसके बाद प्रथम वर्ष के मेडिकल विद्यार्थियों के लिए परीक्षा तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। डॉ. अनामिका ने विद्यार्थियों को QPR यानी Question, Persuade, Refer मॉडल तथा “I Support My Friend” मॉड्यूल की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन लगातार बढ़ता तनाव मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। विद्यार्थियों को तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने, स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने, समय प्रबंधन करने और आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
डॉ. अनामिका ने विद्यार्थियों को अपने मित्रों एवं सहपाठियों में मानसिक परेशानी या आत्महत्या से जुड़े चेतावनी संकेतों को पहचानने, उनसे संवेदनशीलता के साथ संवाद करने तथा उन्हें समय पर विशेषज्ञ सहायता तक पहुंचाने के महत्व के बारे में भी बताया।
इसी क्रम में डॉ. महिपाल ने आत्महत्या रोकथाम एवं नशे के दुष्प्रभावों पर जागरूकता व्याख्यान दिया। उन्होंने आत्महत्या के संभावित जोखिम कारकों एवं चेतावनी संकेतों की जानकारी देते हुए कहा कि संकट की स्थिति में समय पर पहचान, संवाद और सहायता किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने विभिन्न नशीले पदार्थों से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक नुकसान के साथ-साथ नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए उपलब्ध उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं की जानकारी भी साझा की।
कार्यक्रम का उद्देश्य मेडिकल विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना, परीक्षा तनाव के स्वस्थ एवं प्रभावी प्रबंधन के तरीके सिखाना, आत्महत्या के चेतावनी संकेतों की समय रहते पहचान और रोकथाम के प्रति जागरूक करना तथा नशे से बचाव और उपचार के प्रति सही जानकारी उपलब्ध कराना रहा।
मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग की ओर से बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य माह एवं विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के आगामी दिनों में भी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, नशा मुक्ति, आत्महत्या रोकथाम एवं स्वास्थ्य संवर्धन से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस दौरान सामाजिक कार्यकर्त्ता विनोद पंचारिया, रविन्द्र भाटी का विशेष सहयोग रहा.