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जैन धर्म के 12 व्रतों का पालन करें, श्रेष्ठ श्रावक-श्राविका बनें : आचार्य श्री रामलाल जी

 

RNE Bikaner

बीकानेर, अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्य श्री रामलाल जी म.सा. ने कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए जैन धर्म के निर्धारित 12 व्रतों का पालन कर व्यक्ति श्रेष्ठ श्रावक-श्राविका और धार्मिक इंसान बन सकता है। इसके लिए आरंभ और परिग्रह का त्याग करते हुए नैतिक, धार्मिक एवं सामाजिक दायित्वों के साथ देव, गुरु और धर्म के प्रति अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन जरूरी है।
छबीली घाटी स्थित सेवा सदन में पर्युषण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को प्रवचन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मन, वचन और काया से किसी भी जीव को जानबूझकर कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए। जीवन में सत्य का पालन करते हुए झूठ और धोखाधड़ी का त्याग करना चाहिए। बिना दी हुई अथवा बिना अनुमति की वस्तु ग्रहण नहीं करना, चोरी से बचना और विवाहित जीवन की मर्यादाओं का पालन करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि धन, संपत्ति, भूमि और अन्य भौतिक वस्तुओं के संग्रह की एक सीमा निर्धारित करनी चाहिए। भोगोपभोग परिमाण व्रत के माध्यम से खाने-पीने तथा पहनने-उपयोग करने वाली वस्तुओं की भी सीमा तय की जा सकती है। अनर्थदंड त्याग व्रत के तहत बिना प्रयोजन व्यर्थ की हिंसा अथवा पाप के कार्यों से बचना चाहिए।
आचार्य श्री ने सामायिक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रतिदिन कम से कम एक बार 48 मिनट तक समता भाव में लीन होकर सामायिक की साधना करनी चाहिए। पौषधोपवास व्रत के अंतर्गत अष्टमी, चतुर्दशी आदि पर्व तिथियों पर आरंभ-संभारंभ का त्याग कर पौषध, संयम और उपवास की साधना करनी चाहिए। अभक्ष्य वस्तुओं का त्याग करने तथा साधु-संतों, गुरुओं एवं जरूरतमंद अतिथियों को शुद्ध आहार, पानी और वस्त्रादि का दान देकर प्रतिलाभ करने का भी उन्होंने आह्वान किया।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में आत्मा और परमात्मा का चिंतन करते हुए आत्मकल्याण को लक्ष्य बनाना चाहिए। लक्ष्य के साथ की गई साधना ही सार्थक होती है। उन्होंने पानी के सदुपयोग का भी संदेश दिया।
106 श्रावकों ने कराया लोच
श्री साधुमार्गी सेवा समिति के मंत्री सुरेश बच्छावत एवं अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद ने बताया कि चारित्र आत्माओं की प्रेरणा से श्रावक-श्राविकाएं ‘पचखाण से निर्वाण’ अभियान के तहत नई उमंग और नए संकल्प के साथ सामूहिक नौ दिन सहित अनेक तपस्याएं कर रहे हैं। अनेक श्रावक-श्राविकाएं आजीवन शीलव्रत का नियम ले रहे हैं। ‘लोच में क्या सोच’ अभियान के तहत अब तक 106 श्रावकों ने अपने सिर के बालों का लोच करवाया है।
अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने साधुमार्गी जैन संघ की लोकप्रिय पुस्तक ‘जम्बू कुमार स्वामी’ के बारे में जानकारी दी। उपाध्याय राजेश मुनि ने अपने पुत्र-पुत्रियों को संयम साधना के लिए समर्पित करने वाले परिवारों से संवाद कर उन्हें आशीर्वाद दिया।
चातुर्मास समर्पण-26 के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि ‘पचखाण से निर्वाण’ के नियमों के साथ प्रतिदिन होने वाली प्रतियोगिताओं और दोपहर में आयोजित ‘एक कदम मोक्ष की ओर’ शिविर में श्रावक-श्राविकाएं सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
‘पर्युषण के रंग, ज्ञान-ध्यान के संग’ अभियान के तहत शुक्रवार को आयुष्य कर्म पर प्रतियोगिता हुई, जबकि शनिवार को प्रवचन के बाद 20 मिनट की गोत्र कर्म विषयक प्रतियोगिता आयोजित होगी।
प्रतियोगिताओं के परिणाम
8 से 10 सितम्बर तक हुई प्रतियोगिताओं में ज्ञानावरणीय एवं दर्शनावरणीय कर्म विषयक प्रतियोगिता में श्रीमती जया गोलछा, समता बांठिया एवं कोमल सुखलेचा प्रथम तथा भावना डागा एवं रंजू तातेड़ द्वितीय रहीं।
वेदनीय कर्म विषयक प्रतियोगिता में विमला सुराणा, भावना डागा एवं शशिकला सेठिया प्रथम तथा समता बांठिया एवं जयश्री लोढ़ा द्वितीय रहीं। मोहनीय कर्म विषयक प्रतियोगिता में अंकिता ललवाणी, वंदना बोथरा एवं समता बांठिया प्रथम तथा कोमल सुखलेचा एवं भावना डागा द्वितीय रहीं।