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पूर्व मंत्री के भतीजे से भाजपा प्रदेश प्रवक्ता तक पार्षद बनने की दौड़, महावीर का टिकट कटना बड़ा धमाका 

मेयर चेहरों की भी भरमार; कांग्रेस में भी कई दमदार दावेदार
 

 

Rudra News Express | Bikaner

 

निकाय चुनाव में नामांकन के आखिरी दिन से पहले की रात बीकानेर की राजनीति में उम्मीद, डर, इंतजार, आक्रोश और उत्साह—हर भाव एक साथ दिखाई दिया। करीब 300 टिकट दावेदारों और उनके हजारों समर्थकों के लिए यह रात सिर्फ टिकट का इंतजार नहीं थी, बल्कि राजनीतिक भविष्य के फैसले की रात थी।

 

किसी को उम्मीद थी कि पार्टी का टिकट उसके नाम होगा, किसी को डर था कि आखिरी वक्त पर नाम कट सकता है। कोई इस बात से नाराज था कि वर्षों तक पार्टी के लिए काम करने के बावजूद टिकट किसी दूसरे को मिल रहा है। इसी ऊहापोह के बीच आधी रात तक राजनीतिक कार्यालयों और नेताओं के घरों के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ और विरोध के स्वर सुनाई देते रहे।

 

भाजपा शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ के घर के बाहर कार्यकर्ताओं ने टिकट वितरण को लेकर नारेबाजी की तो कांग्रेस में भी विरोध के स्वर सामने आए। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल गहलोत को कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। कांग्रेस शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल पर भी कार्यकर्ताओं ने भाजपा से मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप लगाए।

पूरी रात चली इस राजनीतिक हलचल के बाद सुबह तक भले ही पार्टी सिंबल औपचारिक रूप से हाथ में नहीं आए, लेकिन जिन उम्मीदवारों के टिकट तय थे, उन्हें फोन पर सूचना दे दी गई। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में नामांकन के लिए समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। एक तरफ टिकट मिलने की खुशी में जयकारे लगे तो दूसरी तरफ टिकट से वंचित दावेदारों में से कई बागी बनकर निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी के साथ पहुंच गए। इन सबके बीच सबसे बड़ा घटनाक्रम रहा महावीर रांका को पहले टिकट फाइनल होना। उनका नामांकन दाखिल करना और नामांकन के बाद टिकट काटकर विशाल गोलछा को मिल जाना। 

पूर्व मंत्री के भतीजे से प्रदेश प्रवक्ता तक मैदान में

इस चुनाव में कई ऐसे चेहरे भी पार्षद बनने की दौड़ में हैं, जिनकी पहचान सिर्फ वार्ड की राजनीति तक सीमित नहीं है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व महापौर सुशीला कंवर, पूर्व महापौर एवं पूर्व यूआईटी चेयरमैन मकसूद अहमद और भाजपा नेता अशोक बबरवाल, दीपक पारीक, भगवानसिंह मेड़तिया जैसे नाम इस बार पार्षद के चुनाव मैदान में दिखाई दे रहे हैं। मेयर पद की राजनीति से जुड़े कई चेहरे भी वार्ड चुनाव में उतरने से मुकाबले को और दिलचस्प बना रहे हैं।

साढू मैदान में

वार्ड 73 से कांग्रेस ने पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला को प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने नामांकन दाखिल किया।

इसी चुनाव में रिश्तों का एक दिलचस्प संयोग भी देखने को मिला। वार्ड 2 से अनिल कल्ला के साढ़ू संजय आचार्य को भी कांग्रेस ने टिकट दिया है। यानी बीकानेर के नगर निगम चुनाव में इस बार दो साढ़ू अलग-अलग वार्डों से कांग्रेस के उम्मीदवार बनकर मैदान में हैं।

वार्ड 18 में अंतिम समय पर मकसूद अहमद

वार्ड 18 से पूर्व महापौर और पूर्व यूआईटी चेयरमैन मकसूद अहमद ने अंतिम समय में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच मकसूद अहमद का मैदान में उतरना इस वार्ड के मुकाबले को खास बना रहा है।

परमानन्द या "परमानेंट" पार्षद

बीकानेर के वार्ड की राजनीति में एक ऐसा चेहरा भी है जिसे स्थानीय लोग मजाकिया अंदाज में 'परमानेंट पार्षद' कहते हैं। पुरानी गिन्नाणी क्षेत्र से कांग्रेस के दावेदार परमानंद सांखला का दावा है कि अब तक जब-जब इस क्षेत्र में चुनाव हुए, वे और उनके परिवार के सदस्य ही जीतते रहे हैं। एक बार वार्ड आरक्षित होने पर उनके परिवार की महिला चुनाव जीती। यही वजह है कि स्थानीय राजनीति में परमानंद को 'परमानेंट पार्षद' कहा जाने लगा है।

कलेक्ट्रेट में पांच जगह नामांकन

बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए नामांकन की प्रक्रिया कलेक्ट्रेट परिसर में पांच स्थानों पर की जा रही है। इनमें अतिरिक्त जिला कलेक्टर (शहर) कार्यालय, बीकानेर विकास प्राधिकरण का नया कार्यालय, बीकानेर विकास प्राधिकरण का पुराना कार्यालय, तहसीलदार कार्यालय और सहायक कलेक्टर कार्यालय शामिल हैं। नामांकन कक्ष में प्रत्याशी के साथ प्रस्तावक और दो अन्य समर्थकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है। भारी भीड़ की आशंका को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस और आरएसी के जवान तैनात किए गए हैं।