जनरंजन : पंचायत राज चुनाव में कांग्रेस-भाजपा लगा रहीं एड़ी चोटी का जोर, पब्लिक परसेप्शन बनाने की कोशिश!
निकाय चुनाव में कांग्रेस पूरी ताकत इसलिए झोंक रही है, क्योंकि उसे पता है कि इसका असर पंचायत राज चुनाव पर पड़ेगा। पब्लिक परसेप्शन का वैसे भी राजनीति में होता है अपना खास महत्त्व। भाजपा का पूरा जोर निकाय चुनाव पर, क्योंकि पंचायत राज चुनावों से उसे उम्मीद कम है। निकाय चुनाव के लिए 14 सितम्बर तक का इंतजार है दोनों को।
मधु आचार्य 'आशावादी'
स्थानीय निकाय चुनाव राज्य सरकार के आधा कार्यकाल पूरा कर लेने के बाद हो रहे हैं, इस वजह से बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण है। राज्य की भाजपा सरकार ने इस बार स्थानीय निकाय व पंचायत राज विभाग के चुनाव अलग - अलग कराये हैं और वो भी माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद। सरकार एक साथ दो चुनाव करवाकर अपने को जनता के तराजू पर नहीं रखना चाहती।
क्योंकि दोनों चुनाव एक साथ हों तो यह सरकार के कामकाज का मूल्यांकन हो जाता है। विधानसभा चुनाव की तरह राज्य के सभी मतदाताओं की इसमें भागीदारी हो जाती। इस वजह से पहले निकाय चुनाव और बाद में पंचायत राज चुनाव हो रहे हैं। निकाय चुनाव शहरी क्षेत्र में होते हैं और वहां भाजपा की बेहतर स्थिति रहती है, इतनी सफलता भाजपा को पंचायत चुनाव में कभी नहीं मिलती।
निकाय चुनाव के बेहतर परिणाम यदि मिल जाये तो उसके परसेप्शन का असर पंचायत राज चुनाव पर भी पड़ता है। राजनीति में पब्लिक परसेप्शन का खास महत्त्व भी होता है। यह बात भाजपा और कांग्रेस, दोनों जानते हैं, इस कारण से निकाय चुनावों पर दोनों ने ज्यादा जोर लगाया है। दोनों ही इस चुनाव का फायदा पंचायत चुनाव में उठाना चाहते हैं। क्योंकि निकाय व पंचायत चुनाव एक तरह से अगले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल है। जनता की नजर में सरकार कैसी है, यह निर्धारण इन चुनावों के जरिये ही हो जायेगा।
कांग्रेस ने झोंकी है पूरी ताकत
कांग्रेस को पंचायत राज में तो बहुत अच्छे प्रदर्शन का पूरा भरोसा है, इस कारण निकाय चुनाव में उसने पूरी ताकत झोंकी है। जहां भी उसे सफलता की थोड़ी से उम्मीद है, वहां बोर्ड बनाने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारा है। बीकानेर भी इसका एक उदाहरण है। यहां आंकलन के अनुसार कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, इस कारण भाजपा से पहले उसने बाड़ाबंदी आरम्भ कर दी है।
राज्य की अनेक जगहों पर कांग्रेस ने इसी तरह उम्मीद के सहारे बाड़ेबंदी की रणनीति को अपनाया है। जिस तरह से निकाय व पंचायत चुनाव राज्य विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल है, उसी तरह निकाय चुनाव पंचायत राज चुनाव का सेमीफाइनल है। राजनीति में परसेप्शन का ही तो बड़ा महत्त्व रहता है।
भाजपा भी है पूरी तरह सतर्क
निकाय चुनाव को लेकर भाजपा भी पूरी तरह से सतर्क है। उसके सतर्क होने का प्रमाण यह है कि प्रदेश में पहली बार निकाय चुनाव में भी मुख्यमंत्री ने अपने को दाव पर लगाया है। सीएम ने निकाय चुनाव के लिए अनेक जगहों पर रोड शो किये हैं। ऐसा राज्य की राजनीति में पहली बार हुआ है।
इसके अलावा हर जिले में भाजपा ने स्थानीय निकाय में बोर्ड बनाने के लिए राज्य के मंत्रियो, केंद्रीय नेताओं व संगठन के दिल्ली व जयपुर के पदाधिकारियों को मैदान में उतारा है। भाजपा का अब तक का इतिहास रहा है कि वह निकाय चुनाव में पंचायत राज चुनावों से बेहतर प्रदर्शन करती है।