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जनरंजन : भाटिया के सामने क्रॉस वोटिंग का मुद्दा गर्माया, मदन गोपाल के वीडियो से फिर बहस शुरू!

 

नगर निगम में महापौर व उप महापौर के चुनाव में दोनों तरफ से जमकर क्रॉस वोटिंग हुई। हर बार की तरह इस बार क्रॉस वोटिंग की बात कामकाज शुरू होने के बाद भी शांत नहीं हुई है। भाजपा व कांग्रेस में अंदरखाने उबाल आया हुआ है। दोनों दलों के आहत हुए नेता इस मुद्दे को लेकर जयपुर ही नहीं दिल्ली तक पहुंच गए हैं। क्रॉस वोट का राजनीतिक अपराध करने वालों पर आहत लोग एक्शन कराने को लेकर कटिबद्ध है।

मधु आचार्य ' आशावादी '

नगर निगम के 80 वार्डों पर इस बार चुनाव हुआ। चुनाव परिणाम में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला, उसने 42 सीटें जीती, वहीं भाजपा की झोली में इस बार 27 सीटें ही आ पाई। 1 सीट हनुमान बैनीवाल की आरएलपी ने जीती। 10 निर्दलीय भी चुनाव जीते। हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस का मेयर बिना परेशानी के बनना था, क्योंकि उसके पास स्पष्ट बहुमत था। वहीं भाजपा के पास केवल 27 सीटें थी तो उनका तो मेयर पद के लिए कोई दावा ही नहीं बनता था। भले ही आरएलपी व सभी निर्दलीय भाजपा के पास चले जाते, फिर भी वो मेयर का चुनाव नहीं जीत सकती थी।


इस हालत में जब भाजपा के वार्ड 13 के पार्षद व पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह शेखावत ने चुनाव लड़ने की चुनोती स्वीकारने की बात पार्टी के सामने रखी तो, पार्टी ने उसे गम्भीरता से लेते हुए अनुमति दी। पार्टी ने उनको मेयर का टिकट थमा दिया। उसके साथ ही बाड़ाबंदी शुरू हो गयी। जाहिर है, भाजपा क्रॉस वोट के जरिये ही चुनाव जीत सकती थी। जिसको लेकर उम्मीदवार शेखावत आश्वस्त थे। दूसरी तरफ भाजपा के उम्मीदवार उतारने के साथ ही कांग्रेस भी सतर्क हो गई, उसे भी अंदाजा था कि कहीं न कहीं क्रॉस वोटिंग का खेल होगा। उसने भी बाड़ेबंदी कर ली।
इन राजनीतिक स्थितियों से यह बात तो आरम्भ से ही स्पष्ट हो गयी कि मेयर का चुनाव किसी के लिए भी जीतना आसान नहीं, खासकर कांग्रेस के लिए भी नहीं, भले ही उसके पास बहुमत था। बात साफ हो गयी कि दोनों ही दलों को चुनाव जीतने के लिए क्रॉस वोटिंग की बड़ी जरूरत पड़ेगी। अगर राजनीतिक चतुरता की बात की जाए तो दोनों दलों के नेतृत्त्व को उस समय ही क्रॉस वोटिंग को लेकर सचेत हो जाना चाहिए था। यदि उस समय दोनों दलों का नेतृत्त्व सचेत हो जाता तो क्रॉस वोटिंग की इतनी बड़ी फजीहत सार्वजनिक रूप से नहीं होती और पार्टियों की जनता में किरकिरी नहीं होती। न दोनों दलों के भीतर आपस में बड़े स्तर का मनमुटाव होता। मगर, यह चूक तो पार्टियों के नेतृत्त्व से हो गयी।
क्रॉस वोटिंग का खेल व्यापक पैमाने पर हुआ और बाजी कांग्रेस ने मार ली। क्रॉस वोटिंग के बावजूद कांग्रेस क्रॉस वोटिंग से ही जीत गई, यह राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मत है। राज्य के 10 नगर निगमों में से कांग्रेस केवल बीकानेर का निगम जीत सकी, इस कारण भाजपा में अभी तक क्रॉस वोटिंग का मुद्दा जीवित है। उसी को लेकर खींचतान जारी है।

उप महापौर चुनाव में कांग्रेस की किरकिरी

महापौर का चुनाव तो कांग्रेस जीत गई, मगर बहुमत होने और क्रॉस वोटिंग से बहुमत जुटाने के बाद भी कांग्रेस यह चुनाव हार गई। इस कारण कांग्रेस में भी क्रॉस वोटिंग का मुद्दा गर्माया हुआ है। उप महापौर के चुनाव में कांग्रेस की नसीम बानो को 38 व भाजपा के पंकज गहलोत को 40 वोट मिले। 2 वोट खारिज हो गए और कांग्रेस हार गई।


कांग्रेस को मेयर में 50 वोट मिले वो डिप्टी मेयर में घटकर 38 हो गए, यह बिना क्रॉस वोटिंग के सम्भव ही नहीं। वहीं भाजपा को डिप्टी मेयर में 40 वोट मिले और मेयर में केवल 30, जाहिर है यह भी क्रॉस वोटिंग का ही खेल है। कांग्रेस उम्मीदवार मुस्लिम महिला थी, इस कारण अब यह वर्ग नाराज है। शिकायत जयपुर व दिल्ली तक की गई है। कांग्रेस के भीतर का यह बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष के वीडियो से नई बहस

कल शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल ने उप महापौर चुनाव में हुई हार पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने दुखी स्वर में कांग्रेस वोटिंग पर चिंता जताई है और इसे एक गंभीर मसला कहा है। मेघवाल ने कहा है कि इस चुनाव में जिन कांग्रेसजनों ने क्रॉस वोटिंग की है या कराई है, उनके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए। यह बहुत गलत हुआ है। उन्होंने बताया है कि इस प्रकरण की पूरी रिपोर्ट पीसीसी को व गठित जांच कमेटी को दे दी गयी है।


कांग्रेस भी मुस्लिम समुदाय के विरोध को देखते हुए गम्भीर है और उसने जांच कमेटी को पूरी जांच के आदेश दिए हैं। वरिष्ठ नेता सी पी जोशी की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनी है और उसने काम भी शुरू कर दिया है।



भाजपा प्रदेश प्रभारी भाटिया के दौरे से मसला गर्म हुआ

कल भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया बीकानेर के दौरे पर थे। इस मसले पर उन्होंने भी नेताओं से बात की है। वे मेयर में प्रत्याशी रहे सुरेंद्र शेखावत के निवास पर गए। शेखावत ने उनको क्रॉस वोटिंग की पूरी रिपोर्ट दी है। इससे पहले शेखावत प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, चुनाव प्रभारी, राजस्थान के संगठन महामंत्री व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष को भी क्रॉस वोटिंग की रिपोर्ट सौंप चुके हैं। शेखावत ने सार्वजनिक रूप से क्रॉस वोटिंग करने वालों के पीछे की सिंडीकेट का जिक्र किया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल भी क्रॉस वोटिंग से खासे नाराज है और संदेह वाले नेताओं से रुष्ट भी है।

मसला थमता नहीं दिखता

कांग्रेस व भाजपा के भीतर क्रॉस वोटिंग का यह मसला अभी थमता नहीं दिख रहा। एक्शन के लिए दोनों ही तरफ के आहत लोग कटिबद्ध है। अब बात निकली है तो दूर तलक तो जायेगी।