kanha Tigre Reserve : कान्हा में एक माह में 8 बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र-राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट, अगली सुनवाई 9 जुलाई को
RNE Jabalpur.
मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर आठ बाघों की मौत के मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की युगलपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार से बाघों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक और बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि बाघों में संक्रमण के संभावित स्रोत माने जा रहे आवारा और घरेलू कुत्तों को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि ऐसे पशुओं को क्वारंटीन करने और संक्रमण की रोकथाम के लिए क्या कार्रवाई की गई है।
अदालत ने जताई गंभीर चिंता :
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि बाघ देश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। एक महीने में आठ बाघों की मौत को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता और इसके कारणों की गहन जांच आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता या निर्धारित मानकों के पालन में कमी पाई जाती है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा :
- बाघों में संक्रमण रोकने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?
- वन्यजीवों की चिकित्सकीय निगरानी किस स्तर पर की जा रही है?
- संभावित संक्रमित पशुओं की पहचान और परीक्षण की क्या व्यवस्था है?
- रिजर्व क्षेत्र में जैव-सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) को मजबूत करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं?
- आवारा एवं घरेलू कुत्तों की निगरानी और क्वारंटीन को लेकर क्या कार्रवाई हुई है?
9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई :
मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है। तब तक केंद्र और राज्य सरकार को अदालत के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस रणनीति बनाई जा रही है।
गौरतलब है कि कान्हा टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी पहचान है। ऐसे में कम समय में लगातार बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब यह मामला केवल वन विभाग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बाघ संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की व्यापक नीति से भी जुड़ गया है।