LPG Supply Bikaner : ये तस्वीर बीकानेर जिले की है, गैस के लिए बुजुर्ग भी लगे हैं कतार में!
श्रीराम रामावत
RNE Nal-Bikaner.
शहर से सटते गांव में गैस की सप्लाई देने वाली गाड़ी पहुंची। सूचना पहले ही आ गई थी। ऐसे में गांव के मुख्य चौराहे पर भारी संख्या में लोग अपने-अपने खाली सिलेंडर लेकर जमा थे। गाड़ी आते ही फरमान हुआ, लाइन में लगे। सबने सिलेंडर लाइन में लगाए। खुद उसके साथ सटकर खड़े हो गए। यहां कतार में खड़े लोगों मंे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे।
अब कहा गया, सब अपनी डायरी लाओ। जो नहीं लाए थे वे भागकर घर गये। किसी की डायरी चूहों ने कुतर दी क्योंकि सालों से काम नहीं पड़ा था। किसी की डायरी खेत की ढाणी मंे पड़ी है। कोई मिन्नत कर रहा था, अभी तो सिलेंडर दे दो। जवाब मिला, सरकार ने नियम बनाया है। हम कुछ नहीं कर सकते। इस बीच लोगों से कहा गया, जिस फोन नंबर पर कनेक्शन है उस पर ओटीपी आएगा। ओटीपी और डायरी बताने पर ही सिलेंडर मिलेगा। कई लोगों के चेहरों पर मायूसी छा गई।
देखते ही देखते बुकिंग डायरी एकत्रित की गई। जिन लोगों की डायरी, ओटीपी सभी मिल गए उन्हें सिलेंडर डिलीवरी वाली लाइन में रखा गया। बाकी लोग मायूस देखते रहे लेकिन गये नहीं। इस उम्मीद में कि शायद सिलेंडर मिल जाएं।
यह दृश्य है बीकानेर शहर से सटते नाल गांव का। यहां आमतौर पर सिलेंडर की डिलीवरी गाड़ी आने पर ही होती है। सामान्यतया यह गाड़ी अलग-अलग मोहल्लों मंे जाकर लोगों के घर तक डिलीवरी देती है लेकिन अब एलपीजी संकट के कारण एक ही मुख्य चौराहे पर आकर खड़ी हो गई। दूर-दूर से लोग खाली सिलेंडर लेकर पहुंचे। जिनकी फार्मेलिटी पूरी हो गई उन्हें सिलेंडर मिला।
दरअसल यह महज एक गांव का हाल नहीं वरन लगभग सभी ग्रामीण इलाकों में सिलेंडर के लिए कुछ इसी तरह लाइन लग रही है। बीकानेर शहर में भी गैस बुकिंग एजेंसियों पर लोगों की कतार है। हालांकि गैस का बड़ा संकट होने की स्थिति नहीं कही जा सकती लेकिन फिलहाल सिलेंडर हासिल करने पहले जैसा आसान नहीं रह गया है। यहां कतार में लगे लोग कह रहे हैं, किसी जमाने में केरोसीन के लिए लाइन लगती थी। अब फिर वैसी ही लाइन गैस के लिए लगने लगी है।
दूसरी ओर कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन कर रही है। हाल ही गोगागेट सर्किल पर मनोज चौधरी, सुमित कोचर, अब्दुल रहमान लोदरा, सुमित बिस्सा आदि शामिल रहे। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार गैस की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। लोग परेशान हो रहे हैं। इस कमी को झूठे दावों से छिपाया जा रहा है।