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मदन मोहन संगीतालय का खास आयोजन :  अष्टछाप कवियों के पदों से सजेगी शाम, मंगला दर्शन से पौढ़ने तक के पद गाएंगे हवेली संगीत के विद्यार्थी

 

 

Rudra News Express Bikaner. 

बीकानेर में पहली बार हवेली संगीत का अनूठा मंचीय कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। मदन मोहन संगीतालय की ओर से 5 सितंबर को आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में अष्टछाप कवियों के पदों का गायन किया जाएगा। कार्यक्रम में पिछले तीन वर्षों से हवेली संगीत का प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थी मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे।

शास्त्रीय संगीतज्ञ पंडित नारायण दास रंगा ने बताया कि मदन मोहन संगीतालय की ओर से पिछले तीन वर्षों से मूंधड़ा बगेची में केवल हवेली संगीत सिखाने के उद्देश्य से नियमित कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। शहर के बच्चे प्रतिदिन इन कक्षाओं में पहुंचकर इस पारंपरिक संगीत शैली का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

इन अष्टछाप कवियों के पदों का होगा गायन : 

कार्यक्रम के लिए विद्यार्थियों को अष्टछाप कवियों के पद तैयार करवाए गए हैं। इनमें सूरदास, परमानंददास, गोविन्द प्रभु, चतुर्भुजदास, छीतस्वामी, कुंभनदास, रसिक प्रभु और नारायण स्वामी की रचनाएं शामिल हैं।

पंडित नारायण दास रंगा ने बताया कि इन पदों के माध्यम से पुष्टिमार्गीय परंपरा में ठाकुरजी की सेवा से जुड़े विभिन्न अवसरों का संगीतात्मक स्वरूप प्रस्तुत किया जाएगा। इनमें मंगला दर्शन से लेकर रात्रि में ठाकुरजी के पौढ़ने तक के कीर्तन-पद शामिल हैं।

मंदिरों से निकलकर पहली बार मंच पर : 

हवेली संगीत की अपनी विशिष्ट परंपरा रही है। आदिकाल से पुष्टिमार्गीय हवेली संगीत का गायन मुख्य रूप से वैष्णव मंदिरों में ठाकुरजी के विभिन्न दर्शनों और सेवा के अवसरों पर किया जाता रहा है।

बीकानेर में पहली बार इस परंपरा को मंदिरों की सीमाओं से बाहर मंचीय प्रस्तुति के रूप में आम श्रोताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि इससे नई पीढ़ी को हवेली संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने और इसे संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

तीन साल पूरे होने पर वार्षिकोत्सव : 

रंगा बताते हैं कि मदन मोहन संगीतालय के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इस कार्यक्रम को वार्षिकोत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है। संगीतालय में राजस्थानी लोकगीत, गीत, गजल, भजन और शास्त्रीय संगीत की विभिन्न शैलियों के बजाय विशेष रूप से हवेली संगीत के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

बीकानेर में संगीत की विभिन्न विधाओं के प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग संस्थाएं और गुरु परंपराएं सक्रिय हैं। शास्त्रीय संगीत में ख्याल गायन, ठुमरी, कजरी, टप्पा और तराना जैसी शैलियों के साथ लोक संगीत की भी समृद्ध परंपरा है। ऐसे में हवेली संगीत के लिए अलग से नियमित प्रशिक्षण व्यवस्था और अब उसका मंचीय आयोजन शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों में एक नया अध्याय जोड़ रहा है।

परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल : 

मदन मोहन संगीतालय का यह आयोजन केवल वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि पुष्टिमार्गीय हवेली संगीत की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। तीन वर्षों से प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थी जब पहली बार मंच पर अष्टछाप कवियों के पदों का गायन करेंगे, तो बीकानेर के संगीतप्रेमियों को इस विशिष्ट गायन परंपरा का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।