महबूब अली प्रखर पत्रकार, संवेदनशील राजनेता और यारों के यार थे
मनोहर चावला
RNE Special.
आज २३ फरवरी को पूर्व मन्त्री महबूब अली की पुण्य तिथि थी बहुत याद आए। बीकानेर एक्सप्रेस में उन्होंने खूब लिखा। लेखनी के वे धनी थे। सादगी की मिसाल थे सरकारी गाड़ी होते हुए भी साइकल पर चलते थे। साईकलवाले मन्त्री के नाम से विख्यात महबूब अली को हमारा शत शत नमन।
सादगी और ईमानदारी की मिसाल महबूब अली जी से मेरी अच्छी खासी दोस्ती थी। मेरी पीआरओ सेवाओ के दौरान उन्होंने मेरे अख़बार बीकानेर एक्सप्रेस को संभाला। एक बार उनके लिखे एक समाचार से तत्कालीन मंत्री ललित किशोर चतुर्वेदी काफ़ी नाराज़ हुए और उन्होंने पत्र की प्रतियाँ विधान सभा में बँटवाई और अध्यक्ष को बताया कि आपके मंत्री सरकार के खिलाप विशेषकर मेरे खिलाप ऐसा लिख रहे है लेकिन कुछ सबूत न होने की वजह से मसला आगे नहीं बढ़ सका। उनसे जुड़ी एक और घटना याद आती है। जब वो मंत्री नहीं रहे तब भी हमेशा की तरह विश्व ज्योति के बाहर किराडू जी पान वाले की दुकान के आगे वे महफ़िल जमा कर बैठते और मैं भी उनमे एक होता था उस समय मोहम्मद उस्मान आरिफ़ यूपी के गवर्नर हुआ करते थे वे कार से वहाँ से अपने निवास चुनगरो के चोक जाया करते थे। वे मुझे अक्सर महबूब अली के साथ वहाँ देख लेते थे। एक दिन उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया और कहा कि तुम सरकारी नौकर हो तुम्हें फ़िरक्कापरस्त लोगो से दूर रहना चाहिए। उनका इशारा महबूब अली की और था। मैंने कहा उनसे मेरे आज से नहीं सालो से संबंध है। खैर निडर होकर मैंने अपनी दोस्ती निभाई। और वो भी अंत तक अपने स्तंभ— कचहरी परिसर से— बराबर लिखते रहे। वे जब तक ज़िंदा रहे बीकानेर एक्सप्रेस में बराबर लिखते रहे। मरते वक्त उनके बैंक खाते में मात्र २३५ रु. थे। शायद ही आज के जमाने में ऐसा कोई मंत्री मिले। वे अपने बंगले से सचिवालय पैदल जाया करते थे एक दिन उनकी चपल टूट गई और वे उसे ठीक कराने मोची के पास रुके। मोची ने उनसे कहा, साहब मैंने आपको अखबारों में देखा है आप तो मंत्री है मैं आपसे पैसे कैसे लूंगा। महबूब जी ने ५ रू . बड़ी मुश्किल से उसे दिए। उनकी ख़ासियत थी कि वो चलते चलते सड़क पर रुक जाते थे और चपल से पैरों को निकालकर ज़मीन को नाखून से कुरेदते और महसूस करते कि मैं सड़क पर तो हूँ न। एडवोकेट रामकृष्णदास गुप्ता उनके ख़ास मित्रो में थे। अश्वथ होते हुए आज भी उन्होंने भी उन्हें यादकर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि दी है।
( यह आलेख वरिष्ठ पत्रकार व बीकानेर एक्सप्रेस के संपादक मनोहर चावला का है। उन्होंने वाट्सएप पर मित्रों को भेजा। चावला जी भाई साहब का अनमोल आलेख हम रुद्रा न्यूज एक्सप्रेस के पाठकों तक पहुंचा रहे है। चावला जी महबूब अली जी के अभिन्न मित्र थे। आभार चावला जी-- संपादक )