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बीकानेर में प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के सवाल पर उखड़े मंत्री गजेंद्रसिंह, बोले- क्या नाचती हुई हॉस्पिटल आई थी?

 
प्राचार्य डॉक्टर सुरेन्द्र वर्मा भी उखड़ गए, बोले- मैं रहूं या ना रहूं...
RNE Bikaner.
पीबीएम अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी फेल होने के मामले पर गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का एक बयान नया विवाद खड़ा कर गया। पत्रकारों के सवालों से घिरे मंत्री ने कहा, "वे पैदल चलकर नाचती हुई आई थीं या बीमार होकर आई थीं?" इस टिप्पणी पर प्रेस वार्ता में मौजूद पत्रकारों ने आपत्ति जताई और माहौल गर्मा गया।
सवालों से घिरे मंत्री ने प्रिंसिपल को आगे किया
पत्रकारों ने मंत्री से पूछा कि जिन महिलाओं की डिलीवरी हुई, उनमें कई की हालत दो से चार घंटे के भीतर बिगड़ गई और लगभग सभी में समान लक्षण सामने आए। ऐसे में सरकार इस मामले को किस नजरिए से देख रही है?
इस पर मंत्री खींवसर ने कहा कि अधिकांश महिलाएं पहले से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं और उनकी स्थिति अस्पताल आने से पहले ही ठीक नहीं थी। जवाब देते हुए उन्होंने एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा को संबोधित करते हुए कहा, "बताइए, कैसी हालत में आई थीं... पैदल चलकर नाचती हुई आई थीं या बीमार होकर आई थीं?"
सवालों की बौछार के बीच प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा भी हुए तल्ख
पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के मामले पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केवल चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ही नहीं, बल्कि सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा भी पत्रकारों के तीखे सवालों के बीच तैश में नजर आए।
जब पत्रकारों ने लगातार एक जैसे लक्षण, डिलीवरी के कुछ घंटों बाद तबीयत बिगड़ने और संभावित चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर सवाल उठाए, तो डॉ. वर्मा ने कड़े लहजे में कहा, "मैं रहूं या नहीं रहूं, लेकिन जो सच्चाई है वह कहूंगा। आपको मेरी बात सुननी पड़ेगी।"
इसके बाद उन्होंने मामले के चिकित्सकीय पहलुओं को विस्तार से समझाने की कोशिश की। डॉ. वर्मा ने कहा कि किडनी फेल होने या किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने के कई चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं और किसी एक कारण को जांच पूरी होने से पहले जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि गंभीर संक्रमण (सेप्सिस), अत्यधिक रक्तस्राव, लो ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी की कमी (डी-हाइड्रेशन), पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं, गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं तथा कुछ अन्य चिकित्सकीय स्थितियां भी किडनी प्रभावित होने का कारण बन सकती हैं।
दवाओं की कमी पर सवाल टाला
प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल में पिछले कई महीनों से आवश्यक दवाओं और चिकित्सा सामग्री की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन, गॉज और बच्चों के लिए उपयोग होने वाले कैनूला की उपलब्धता पर भी सवाल पूछे गए।
मंत्री ने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि खरीद प्रक्रिया चल रही है और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। हाजीलांकि आठ महीने से दवा खरीद नहीं होने के आरोपों पर उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।