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PBM दवाई चोरी घोटाला : बीकानेर में कैंसर रोगियों के लिये जारी महंगी सरकारी दवाइयाँ दिल्ली में पकड़ी गई, मुंबई तक हो रही सप्लाई! 

एक वायल की कीमत एक लाख से ज्यादा, दिल्ली पुलिस ने चार आरोपियों को पकड़ा; बीकानेर सप्लाई के Bavencio इंजेक्शन मिलने से RMSCL और पीबीएम में हड़कंप

 

Rudra News Express New Delhi-Bikaner-Jaipur. 
  
कैंसर के गंभीर मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए राजस्थान सरकार की ओर से बीकानेर के आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट को भेजी जाने वाली महंगी जीवनरक्षक दवाओं का कथित ब्लैक मार्केट कनेक्शन सामने आया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने एक अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 22 महंगे कैंसर इंजेक्शन बरामद किए हैं। इनमें Bavencio 200 mg/10 ml (Avelumab) का वायल भी शामिल है, जिसकी सप्लाई सरकारी उपयोग के लिए बीकानेर भेजे गए बैच से जुड़ी बताई गई है।

पुलिस कार्रवाई के दौरान चार आरोपियों की गिरफ्तारी और करीब 27.19 लाख रुपए नकद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। बरामद कैंसर दवाओं में Darzalex, Imfinzi, Erbitux, Bavencio, Adcetris और Keytruda जैसे महंगे इंजेक्शन शामिल हैं। इनकी कीमत लाखों रुपए तक बताई जा रही है।

बीकानेर भेजे गए बैच का इंजेक्शन दिल्ली में मिला : 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जांच के दौरान बरामद Bavencio इंजेक्शन का बैच नंबर AU052510 और निर्माण तिथि 02/2025 बताई गई है। इसकी एक्सपायरी जनवरी 2028 है। दवा निर्माता कंपनी से सत्यापन में यह सामने आने की बात कही गई है कि यह बैच Rajasthan Medical Services Corporation Limited (RMSCL) के जरिए बीकानेर में सरकारी सप्लाई के लिए भेजा गया था।

यही तथ्य इस पूरे मामले को बीकानेर से जोड़ता है। अब बड़ा सवाल यह है कि सरकारी अस्पताल के मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए भेजा गया इंजेक्शन आखिर अस्पताल की सप्लाई चेन से निकलकर दिल्ली के कथित दवा सिंडिकेट तक कैसे पहुंचा?

सरकारी मार्किंग मिटाकर बेचने की कोशिश : 

पुलिस के अनुसार, बरामद दवाओं पर सरकारी सप्लाई से संबंधित लेबल और मार्किंग को मिटाने की कोशिश की गई थी। फार्मा कंपनियों की ओर से भी इन दवाओं के सरकारी अस्पतालों के लिए भेजे जाने की पुष्टि किए जाने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि सरकारी दवाओं को रिकॉर्ड में मरीजों के नाम पर जारी दिखाकर वास्तविक स्टॉक को बाहर निकाला गया हो सकता है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

RMSCL से दिल्ली पुलिस ने मांगा पूरा रिकॉर्ड : 

जानकारी के मुताबिक बीकानेर सहित राजस्थान कनेक्शन सामने आने के बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच ने RMSCL के प्रबंध निदेशक पुखराज सैन को नोटिस भेजकर संबंधित दस्तावेज और सप्लाई रिकॉर्ड मांगे हैं। पुलिस यह जानना चाहती है कि संबंधित बैच बीकानेर के किस संस्थान को भेजा गया, उसे किस अधिकारी या कर्मचारी ने रिसीव किया और उसके बाद स्टॉक का इस्तेमाल अथवा वितरण किस प्रकार हुआ।

पुलिस ने यह भी पूछा है कि संबंधित इंजेक्शन किन मरीजों को लगाए गए। इसके लिए मरीजों के नाम, मोबाइल नंबर तथा UHID/IPD/OPD संबंधी रिकॉर्ड मांगे गए हैं।

पांच सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस : 

1. स्टॉक किसे जारी किया गया? संबंधित इंजेक्शन किन मरीजों के नाम पर जारी हुए और क्या वास्तव में उन्हें लगाए गए?

2. बीकानेर में किस अस्पताल को भेजे गए? RMSCL से संबंधित बैच किस मेडिकल कॉलेज या अस्पताल को भेजा गया और उसे किसने रिसीव किया?

3. स्टॉक गायब तो नहीं हुआ? क्या अस्पताल अथवा वेयरहाउस से दवा के चोरी होने, गायब होने या गलत तरीके से इस्तेमाल की कोई शिकायत दर्ज हुई?

4. जिम्मेदार कौन है? क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आई? क्या विभागीय जांच या एफआईआर हुई?

5. रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में कितना अंतर है? पुलिस अब सप्लाई, स्टॉक रजिस्टर, मरीजों को जारी दवा और वास्तविक इस्तेमाल का मिलान कर सकती है।

राजस्थान से दिल्ली और मुंबई तक नेटवर्क : 

पुलिस की कार्रवाई में सामने आए तथ्यों के अनुसार, कथित दवा सिंडिकेट का नेटवर्क राजस्थान से दिल्ली और मुंबई के वाशी तक फैला हुआ था। आरोपियों की पहचान अभिषेक वैश्य, शुभम चौधरी, सूरज चौधरी और शांतनु कर्ण समेत अन्य के रूप में बताई गई है। उनकी निशानदेही पर आगे भी छापेमारी किए जाने की जानकारी है।

अब बीकानेर में जांच की सबसे बड़ी कड़ी : 

दिल्ली में सरकारी सप्लाई वाला Bavencio मिलने के बाद अब जांच की सबसे अहम कड़ी बीकानेर की सप्लाई चेन बन गई है। यदि यह साबित होता है कि सरकारी स्टॉक अस्पताल या वेयरहाउस से ही डायवर्ट हुआ था, तो यह केवल दवा की कालाबाजारी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी चिकित्सा व्यवस्था और जरूरतमंद कैंसर मरीजों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बन जाएगा।