प्रितपाल कौर को सृजन साहित्य सम्मान से नवाजा
RNE Bikaner
श्रीगंगानगर। वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार प्रितपाल कौर ने कहा है कि विज्ञान आदमी के दिमाग को मांजता है और साहित्य उसकी संवेदनाओं को, उसके मन को मांजता है।
वे रविवार शाम को सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम ‘लेखक से मिलिए’ की 146वीं कड़ी में तपोवन हथाई सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में बतौर लेखक संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि वे विज्ञान की विद्यार्थी रही हैं और साहित्य से उनका लगाव आरंभ से ही रहा है। बावजूद इसके कि उनके परिवार में शब्द की आराधना को गुण नहीं, अवगुण माना जाता था। इसीलिए जब पहली कहानी लिखी और उसे छपने के लिए भेजा तो रोज डाकिए का इसलिए इंतजार करती थी कि स्वीकृति-अस्वीकृति जो भी आए, वह किसी और के हाथ न लग जाए।
प्रितपाल कौर ने अपने बहुचर्चित उपन्यास ‘साल चौरासी’ का एक अंश भी पढ़कर सुनाया। यह उपन्यास इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों को केंद्र में रखकर लिखा गया है और बेहद मार्मिक है। इसके बाद प्रितपाल कौर ने अपनी कुछ कविताएं भी सुनाईं। कार्यक्रम में डॉ. दीपिका मोंगा एवं अन्य ने उनसे कुछ सवाल पूछे, इनका उन्होंने बहुत सहजता से जवाब दिया था। इस मौके पर प्रितपाल कौर को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सृजन साहित्य सम्मान अर्पित किया गया। उन्हें शॉल ओढ़ाकर, सम्मान प्रतीक तथा साहित्य भेंट करके सम्मानित किया गया।
विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी सूरतगढ़ के कार्यक्रम अधिकारी नवीन सिसोदिया ने दंगों की चर्चा करते हुए कहा कि ये नहीं होने चाहिएं। परंतु दुर्भाग्य है कि दंगों के बाद अब तो लोग सरेआम यह बताते हैं कि हमने इतने मारे थे। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी भी तरह की हो गलत ही होती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार राजेश चढा ने प्रितपाल के अंग्रेजी उपन्यास ‘हाफ मून’ और कहानी ‘पगडंडी’ की विवेचना की और कहा कि ये रचनाएं वर्षों बाद भी उन्हें याद हैं तो इसकी वजह यह है कि वे प्रभावी और दिल को छूने वाली रचनाएं थीं।
इससे पहले, सृजन के सचिव कृष्णकुमार आशु ने प्रितपाल कौर का परिचय दिया। आभार अध्यक्ष डॉ. अरुण शहैरिया ‘ताइर’ ने जताया। संचालन कार्यक्रम संयोजक डॉ. संदेश त्यागी ने किया।
इस मौके पर चंद्रभानु त्यागी, कृष्ण वृहस्पति, सुषमा गुप्ता, मधुर ओझा, बिहारीलाल शास्त्री, कुलविंद्रसिंह, रमेश कुक्कड़, सतीश शर्मा, बनवारीलाल शर्मा, डॉ. ओपी वैश, सुरेशकुमार कनवाड़िया, सुरेंद्रकुमार शर्मा, बनवारीलाल वर्मा, शमिन्द्रकौर, ममता आहुजा, मीनाक्षी आहुजा, रवि सरावगी, राकेश कालड़ा, आनंद मायासुत, ललित चराया, दीपक गडई, आशाराम भार्गव, सुरेंद्र सुंदरम्, सुरेंद्र कुमार, अरुण उर्मेश, मोहन दादरवाल, राकेश मितवा, ममता पुरी, गुलशन मेधानी, हरविंद्रसिंह, एसके शर्मा, रामरत्न गुप्ता, नमिता अग्रवाल एवं निर्मला शहैरिया सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी मौजूद थे।