Rajasthan Education : REEWA ने DPC की सुस्त रफ्तार पर उठाए सवाल, जोशी ने सीएम को लिखी चिट्ठी
Rudra News Express Bikaner.
राजस्थान के शिक्षा विभाग में विभागीय पदोन्नति डीपीसी) लंबित रहने से जहां कर्मचारियों-शिक्षकों में असंतोष पनपा है वहीं इसका असर कामकाज पर भी पड़ रहा है। शिक्षकों-कर्मचारियों से जुड़े संगठन राजस्थान एजुकेशन एम्प्लॉयी वेलफेयर एसोसिएशन (REEWA) ने शिक्षा विभाग के विभिन्न संवर्गों की डीपीसी जल्द पूरी करवाने की मांग की है। इसके साथ ही DPC के लिए विडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) को मीटिंग की तरह ही मान्यता देने का मुद्दा भी उठाया है।
जोशी की सीएम को चिट्ठी :
REEWA के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप जोशी ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा), निदेशक प्रारंभिक शिक्षा एवं निदेशक माध्यमिक शिक्षा को पत्र लिखा है। जोशी का कहना है, निर्धारित समयसीमा और शासन के निर्देशों के बावजूद कई संवर्गों में पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और विभागीय कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
विसंगतियां : 31 मई की समयसीमा के बाद भी डीपीसी लंबित
संगठन की ओर से भेजे ज्ञापन पत्र में कार्मिक विभाग के 26 अगस्त 2023 के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि विभागीय पदोन्नति समिति की कार्यवाही 31 मई तक पूरी की जानी चाहिए। समयसीमा निर्धारित होने के बावजूद शिक्षा विभाग के विभिन्न संवर्गों में वर्ष 2026-27 की डीपीसी लंबित चल रही है। संगठन ने मांग की है कि पदोन्नति की प्रक्रिया तत्काल पूरी कर चयन तिथि से कर्मचारियों को आर्थिक लाभ दिया जाए।
ज्ञापन में गया है कि डीपीसी बैठकों के आयोजन के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को मान्यता दी गई है। इसी अनुरूप मीटिंग हो। इस व्यवस्था से अधिकारियों और समिति सदस्यों की भौतिक उपस्थिति की अनिवार्यता कम होगी तथा पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकेगी।
इन पदों का मुद्दा उठाया :
REEWA ने विभिन्न शैक्षिक और मंत्रालयिक संवर्गों की लंबित डीपीसी का मुद्दा उठाया है। शैक्षिक संवर्ग में अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक और जिला शिक्षा अधिकारी स्तर के पदों की डीपीसी लंबित है। मंत्रालयिक संवर्ग में संस्थापन अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पदों की वर्ष 2026-27 की पदोन्नति प्रक्रिया भी लंबित बताई गई है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि रिक्त पदों और लंबित पदोन्नतियों के कारण विभागीय कार्ययोजनाएं प्रभावित होती हैं। अन्य कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ता है, जिसका असर शैक्षिक गुणवत्ता और विद्यालयों के संचालन पर पड़ता है।