Rajasthan Highcourt का फैसला : बीकानेर-जैसलमेर-बाड़मेर के सीमा इलाके में अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ
Rudra News Express Jodhpur.
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 0 से 50 किलोमीटर क्षेत्र में कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्रों में सरकार की कार्रवाई में अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को जारी किए गए नोटिस केवल कारण बताओ नोटिस हैं, अंतिम बेदखली या ध्वस्तीकरण आदेश नहीं। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन कई मामलों में उन्होंने वैधानिक प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ऐसे में याचिकाएं विचारणीय नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता बंशीलाल भाटी ने सरकार का पक्ष रखते हुए दलील दी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया सूचनाओं और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में बीएसएफ के अधिकारी, संबंधित जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) की संयुक्त समिति बनाकर तथ्यों का परीक्षण और समन्वित कार्रवाई की जा सकती है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और विधिक प्रक्रिया दोनों का संतुलन बना रहे।
यह फैसला जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर सहित सीमावर्ती जिलों में धार्मिक स्थलों एवं अन्य निर्माणों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर एक साथ सुनाया गया, जिनमें सीमा क्षेत्र में जारी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। अदालत ने माना कि सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा संबंधी मामलों में सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है और ऐसे मामलों में उपलब्ध वैधानिक उपायों का पहले उपयोग किया जाना चाहिए।