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देश की सीमा के पार भी जिनकी है बड़ी पहचान, चिकित्सकीय ज्योतिष गणना के कारण बड़ा नाम है राजेन्द्र व्यास ' मम्मू महाराज ' का

 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.
 

( बीकानेर के ज्योतिष विज्ञान को पूरे देश में सम्मान दिया जाता है। इस बड़े शहर के ज्योतिष की बड़ी प्रोफ़ाइल है राजेन्द्र व्यास ' मम्मू महाराज ' की । इन्होंने न केवल पश्चिमी सीमा पर स्थित बीकानेर से चलकर पूरी दुनिया में डग भरे, अपितु इस शहर की थरपणा भी दुनिया मे की। यहां के ज्योतिषियों ने सीमाओं व वर्जनाओं को तोड़ा। बीकानेर व दुनिया के  मध्य पुल बनाया। इस कारण ही आज बीकानेर के ज्योतिष जगत को पूरे देश में पहचान मिली। आज जो बीकानेर के ज्योतिषी अपने को राष्ट्रीय फलक पर चर्चित पाते हैं, उसमें कई ज्योतिषियों की मेहनत लगी है। उन्होंने पसीने से बीकानेर के ज्योतिष विज्ञान के दरख़्त को सींचा है। अलग अलग क्षेत्र के  उन लोगों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए रुद्रा न्यूज एक्सप्रेस ( RNE) यह कॉलम आरम्भ किया है। इसकी पहली कड़ी में हम कवि, कथाकार, आलोचक, अनुवादक मालचंद जी तिवाड़ी के बारे में पाठकों को परिचित करा चुके हैं। आज ज्योतिर्विद राजेन्द्र व्यास ' मम्मू महाराज ' से आपको रु ब रु करा रहे हैं।  आप अपनी प्रतिक्रिया जरूर बताएं। -- संपादक )
 

देश ही नहीं अपितु पूरी दुनिया में काशी की तरह ही ज्योतिष के क्षेत्र में जिस शहर की पहचान है, वह है पश्चिमी सीमा पर स्थित शहर बीकानेर। आलीजा शहर बीकानेर में ज्ञान, विज्ञान व कला की त्रिवेणी बहती है। कण कण में यहां संस्कृति गूंजती है। इस वजह से ही इस शहर की पहचान छोटी काशी के रूप में भी है। धर्म की इस धरा पर साम्प्रदायिक सद्भाव की पवित्र गंगा बहती है। तभी तो 500 साल का सफर तय करने के बाद भी इस शहर ने कभी कर्फ्यू नहीं देखा। 

बीकानेर वो शहर है जहां ईद पर हिन्दू अपने मुस्लिम भाईयों का हर गली में स्वागत करते हैं और गले मिलते हैं। तो होली पर हर गली का मुस्लिम गुलाल उड़ाकर इस त्यौहार का हिस्सा बनता है। जब हिन्दू समाज की धर्म यात्रा निकलती है तो सड़कों के दोनों तरफ खड़े होकर मुस्लिम भाई उस पर फूलों की बारिश करते हैं। ठीक इसी तरह जब ताजिये बनते हैं तो हिन्दू अपने मुस्लिम भाईयों के पास जाकर बैठते हैं। दिवंगत प्रधानमंत्री वी पी सिंह जब बीकानेर यात्रा पर आए तो जाते समय ट्रेन के बाहर खड़े पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मैं देश में जहां भी जाऊंगा तो उनको कहूंगा , सद्भाव देखना है तो एक बार बीकानेर घूमकर आ जाओ। उनकी भगवान से प्रार्थना थी कि देश का हर शहर  बीकानेर हो जाये। 
 

दुनिया में बीकानेर की यह छवि ऐसे ही नहीं बनी। इस छवि को बनाने में यहां के साहित्यकारों, चित्रकारों, लोक गायकों, खिलाड़ियों के साथ साथ ज्योतिषियों का भी बड़ा योगदान है। उनके अथक प्रयासों से ही बीकानेर पूरी दुनिया में जाना पहचाना जाता है। 

बीकानेर ने बड़े बड़े ज्योतिषी देश को दिए हैं। जिन्होंने ज्योतिष के नाम पर होने वाले पाखण्ड को एक तरफ जहां दूर कर लोगों को ठगे जाने से बचाया, वहीं ज्योतिष के वैज्ञानिक पक्ष से परिचित करा इसके प्रति लोगों में स्नेह के पवित्र बीज बोये। ज्योतिष के प्रति श्रद्धा का भाव जगाया। इस कड़ी में जिन ज्योतिषाचार्य का बड़ा नाम है, उनमें से ही एक है राजेन्द्र व्यास ' मम्मू महाराज '।
 

यह नाम बीकानेर में ज्योतिष का प्रयाय माना जाता है। बीकानेर हो या जयपुर, दिल्ली हो या कोलकाता, मुम्बई हो या चेन्नई, असम हो या उड़ीसा, कहीं भी मम्मू महाराज का नाम ले लो, उनका परिचित निकल आयेगा। उनसे ज्योतिषीय सहयोग लिया हुआ मिल जाएगा। ज्योतिष का जिक्र होते ही लोग बीकानेर का नाम लेते हैं और बीकानेर के साथ ही सहज में जुबान पर मम्मू महाराज का नाम स्वतः आ जाता है।

अलमस्त व फकीराना अंदाज है खास:

सामान्य वेशभूषा और विनोद का स्वभाव, यही वजह है कि छोटे से छोटा व बड़े से बड़ा आदमी भी मम्मू महाराज के पास आसानी से आकर अपनी बात रख देता है। वे चाहे घर के कमरे में बैठे हों या चौक के पाटे पर। अम्बा आश्रम में बैठे हों या किसी विवाह के आयोजन में। परेशान व दुखी आदमी उनके पास हाथ जोड़कर आता है तो वे भी उसका दर्द पूछने और उसको उपचार बताने में जरा सा भी परहेज नहीं करते।

 

अम्बा आश्रम में अपने 4 - 5 भाईयों व मित्रों के साथ मस्ती के मूड में बैठे थे। हंसी मजाक की बाते चल रही थी। अचानक एक व्यक्ति ने प्रवेश किया। सर्वथा अपरिचित। वहां बैठा कोई भी व्यक्ति उसे पहचानता नहीं था। न उस व्यक्ति को पहले वहां कभी देखा गया था। वो हाथ जोड़कर बोला ---

- मम्मू महाराज से मिलना है ?
-- उनको जानते हो क्या ?
-- नहीं। कभी मिला नहीं।
-- फिर उनके पास कैसे आये हो।
-- उनका नाम सुना हुआ है। पूछते पूछते यहां तक पहुंचा हूं।
-- कोई खास काम ?
-- हां, उनसे कुछ पूछना था। ज्योतिषीय सलाह लेनी थी।
-- अच्छा। तो बताओ।
-- आप ही हो। मुझे पता नहीं था।
इतना कहकर वो रोते हुए उनको चरण स्पर्श करने लगा। उन्होंने उसके कंधे पर हाथ रखा और दिलासा दी।
-- रोओ मत। अपनी बात बताओ।

 

उसके बाद उस आदमी ने बताया कि उसका लड़का गम्भीर रूप से बीमार है और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। मम्मू महाराज ने तुरंत प्रश्न कुंडली बनाई और उस व्यक्ति को कुछ छोटे छोटे उपचार बताये। आश्वश्त किया कि परसों से बच्चे की तबीयत में सुधार शुरू हो जायेगा। 10 दिन बाद वो व्यक्ति उसी जगह अपने बेटे को लेकर आया और मम्मू महाराज के चरण छुए। एकदम फक्कड़ स्टाइल में मम्मू महाराज इस तरह कई दुखी लोगों को राहत दिलाने का काम हर रोज करते हैं। किसी से कुछ भी प्राप्ति की अपेक्षा के बिना, ऐसे ज्योतिषी बीकानेर में ही सम्भव है। जिनके लिए ज्योतिष अर्थोपार्जन का साधन नहीं अपितु लोगों को राहत देने का विज्ञान है।

मेडिकल साइंस व ज्योतिष का गहन अध्ययन:

अधिकतर हमने देखा होगा कि लोग शादी, नोकरी, पैसे, सुख आदि के बारे में जानने के लिए ज्योतिषी के पास जाते हैं और ज्योतिषी भी इनके बारे में ही अपना प्रिडिक्शन देते हैं। मगर मम्मू महाराज अलहदा ज्योतिष भी करते हैं। सम्भवतः वो अकेले ऐसे बीकानेर के ज्योतिषी है जो मेडिसन से जुड़ी बीमारियों व ज्योतिषीय विज्ञान के समन्वय को जानते हैं। जिस पर उन्होंने विशेष अध्ययन किया है। इतना गहन अध्ययन कि इस विषय पर यदि वे पुस्तक लिखें तो दुनिया की वह ज्योतिष विज्ञान की पहली नई, अनूठी व अनमोल पुस्तक होगी।

 

इस विशेष ज्योतिषीय शोध के कारण ही उनके व्यक्तित्त्व से देश ही नहीं  विदेश में रहने वाले लोग भी प्रभावित है। अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर आदि देशों से लोग फोन करके इनसे ऑपरेशन की तारीख व समय लेते हैं। रोग की स्थिति के बारे में जानते हैं। उसके ज्योतिषीय उपचार के बारे में पूछ के उसका अनुसरण करते हैं। मेडिकल साइंस व ज्योतिष विज्ञान के समन्वय की उनकी गणना ने ही उनको देश की सीमाओं के बाहर तक पहचान दिलाई है। उनकी ख्याति है और वे लोगों को अपने इस विषय के शोध से लाभ भी देते हैं। देश में तो सम्भवतः रोज इस विषय से जुड़े 4 से 5 लोग निश्चित ही उनसे परामर्श लेते हैं।

बॉलीवुड में भी ख्याति है इनकी:

बीकानेर में जब गायक मोहम्मद अजीज आये तो संगीत से गहरा लगाव रखने वाले मम्मू महाराज भी उनको सुनने गए। बाद में जब होटल के कमरे में बैठे थे तो उन्होंने बहुत ही अहंकार के भाव से कहा कि मैं ज्योतिष को नहीं मानता। मम्मू महाराज ने उनकी बात का बुरा नहीं माना। बहुत विनम्र भाव से प्रश्न लग्न बनाया और कहा कि आपके जीवन की एक निजी बात बताऊं तो आप मान जाएंगे कि ज्योतिष भी एक विज्ञान है। उन्होंने उसी अहंकार भाव से कहा कि बताओ, आप मेरे बारे में कुछ जानते नहीं और हम पहली बार मिल रहे हैं। मम्मू महाराज ने बताया कि आप जिंदगी के कठिन पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक दौर से गुजर रहे हैं। फिर उनकी पुत्री को लेकर कुछ बताया। वो सब सुनते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए और उनके पांव पकड़ लिए। फिर उन्होंने 50 घर व परिवार से जुड़ी बातें बताई। वो विस्मित होकर सुनते रहे। फिर तो अपने जीवन की अंतिम सांस तक मम्मू महाराज के मुरीद रहे और उनको याद करते रहे।

 

दूसरा किस्सा बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता मनोज वाजपेयी का है। वे बीकानेर आये तो बाइक पर बैठकर मम्मू महाराज से मिलने भट्टडों के चौक आये। पाटे पर बैठकर अपने कैरियर के बारे में पूछा। पाटे पर बीकानेर भुजिया आदि खाये। उनके प्रिडिक्शन से अभिभूत थे। उस समय वे स्ट्रगल के दौर में थे। मम्मू महाराज ने सफलता के मंत्र दिए और तारीखें बताई। बाद में वे सब सही साबित हुई तब उन्होंने मम्मू महाराज को मुंबई बुलाया। अपने घर पर उनका आदर सत्कार किया। कुछ समय पहले उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बीकानेर व उनका जिक्र किया। तब पूरा बॉलीवुड अचंभित था। अनेक कलाकारों ने उनसे संपर्क साधा और अपने बारे में ज्योतिष के जरिये जीवन की जानकारियां व मार्गदर्शन लिया। बॉलीवुड में सबसे चर्चित ज्योतिषी आज वे है और बीकानेर को याद करते हैं।

जिंदा रखे है गुरु - शिष्य परंपरा:

भारतीय ज्ञान परंपरा में ' गुरु - शिष्य ' की पद्धति का हमेशा से वास रहा है। जबसे यह परंपरा कमजोर हुई शिक्षा का ढांचा ही बिगड़ गया। विद्यार्थी राह भटक गया और उसकी दिशा भी गलत हो गई। मगर मम्मू महाराज आज भी इस परंपरा को जिंदा रखे हुए है। उन्होंने ज्योतिष विज्ञान अपने गुरु आचार्य राज से लिया। सदा वे उनके चरणों मे रहे। कभी भी पास नहीं बैठे। इसका उदाहरण यह है कि उनका उनके साथ सीधे कोई फ़ोटो नहीं है। उनके चरणों में बैठे हुए का ही फोटो है। वे ब्रह्मलीन हो गए मगर आज भी हर गुरु पूर्णिमा के दिन वे अपने गुरु आचार्य राज की पूजा करते हैं और अनुष्ठान करते हैं।

 

पंडित जितेंद्र आचार्य

इस परंपरा को मम्मू महाराज ने भी आगे बढ़ाया। अपने पास आने वाले हर शिष्य को अपनी तरफ से ज्योतिष विज्ञान सिखाया। ये शिष्य पर निर्भर रहा कि उसने कितना ज्ञान उनसे अर्जित किया। उनके एक शिष्य पंडित जितेंद्र आचार्य आज भी उनके पद चिन्हों पर चल रहे हैं और उनकी इस क्षेत्र में गहरी पैठ है। वे भी अपने गुरु के चरणों मे ही बैठते हैं। कोलकाता में पंडित जितेंद्र ने कर्म शुरू किया और आज उनका पूरे देश में नाम है। पंडित जितेंद्र उन गिने चुने ज्योतिषियों में से एक है जो हर साल पंचांग निकालते हैं। अपने पूरे ज्ञान का श्रेय वे गुरु मम्मू महाराज को देते हैं। सही अर्थों में अपने गुरु की तरह वे भी ' गुरु - शिष्य ' परम्परा का निर्वहन कर रहे हैं। गुरु मम्मू महाराज भी अपने इस शिष्य पर गर्व करते हैं।

साबित किया है कि यह विज्ञान है:

मम्मू महाराज जब भी ज्योतिष की बात चलती है तब स्पष्ट कहते हैं कि यह एक विज्ञान है। ग्रहों की गति की गणना से फलादेश निकलते हैं। ये ज्योतिष डराने की विद्या नहीं अपितु राहत देने की बड़ी गणित है। इस कारण ही इसे विज्ञान माना जाता है। वे एक शब्द में ज्योतिष की परिभाषा करते हुए इसे ' इंडिकेटिव साइंस ' कहते हैं। आम आदमी को सप्रमाण यह बात समझाते है।

बहुत अपेक्षा है इस ज्योतिषी से:

देश भर के वे लोग जो मम्मू महाराज से ज्योतिषीय सलाह व परामर्श लेकर अपने जीवन में तरक्की कर चुके हैं। राहत पा चुके हैं। इस जमात की संख्या हजारों में है। देश के बड़े 50 से अधिक राजनेता, बॉलीवुड स्टार, 70 से अधिक आईएएस, कई दर्जन उद्योगपति, साहित्यकार, पत्रकार आदि उनके इस ज्ञान से लाभान्वित है और अब भी हो रहे हैं। इन सबकी अपेक्षा है कि मम्मू महाराज के पास इस विज्ञान के कई नए फार्मूले है। मेडिसन के क्षेत्र में बड़ा काम है। घर - परिवार के सुख व समृद्धि के मंत्र है। ये सब लोग चाहते हैं कि इन सभी अलग अलग विषयों पर वे पुस्तकें लिखें ताकि यह ज्ञान आने वाली पीढी के काम आये। ज्योतिष के नाम पर लोग ठगे नहीं जा सकें। हर कोई उनसे पुस्तकों की अपेक्षा रखता है। 

 

मम्मू महाराज के शिष्य पंडित जितेंद्र आचार्य कहते हैं कि गुरुजी को यह ज्ञान कलमबद्ध करना चाहिए। दुनिया भर के लोगों को इससे लाभ होगा। 
( रुद्रा न्यूज एक्सप्रेस RNE की इस पहल पर आप अपनी प्रतिक्रिया 96729 94671 पर जरूर दें। स्वागत रहेगा - संपादक )