{"vars":{"id": "127470:4976"}}

रंगा बोले, टैगोर ने भी बाल साहित्य का सृजन मातृभाषा में किया, ' मातृभाषा एवं बाल साहित्य ' विषयक संगोष्ठी हुई

 

RNE Network.

प्रज्ञालय संस्थान ने महान रचनाकार रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में ' मातृभाषा एवं बाल साहित्य ' विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया।
 

विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि बाल साहित्य सृजन करना अपने आप में एक चुनोती है, यदि बाल साहित्य बालक की मातृभाषा में हो तो उससे साहित्य की सार्थकता अधिक हो जाती है। टैगोर ने भी समृद्ध बाल साहित्य का सृजन अपनी मातृभाषा में किया था। कमल रंगा ने उनकी रचनाओं काबुलीवाला, बादल और लहरें, छोटा बड़ा आदमी आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि ये रचनाएं अनुदित होकर पूरे भारत में पढ़ी गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद राजेश रंगा ने कहा कि बाल साहित्य पढ़ने की आदत कम होना चिंताजनक है। करुणा क्लब के हरिनारायण आचार्य ने कहा कि बालकों को बाल साहित्य मातृभाषा में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। गोष्ठी में हेमलता व्यास, नवनीत व्यास, कन्हैयालाल पंवार,राहुल सहित कई लोगों ने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन आशीष रंगा ने किया और भवानी सिंह राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया।