साध्वी त्रिशलाकुमारी ने कहा—बाहर की दुनिया से हटकर आत्मा के पास रहना ही महापर्व का संदेश
Rudra News Express Bikaner.
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत महावीर चौक, चौरड़िया चौक से नोखा रोड तक भाई-बहनों के सामूहिक मंगलाचरण से हुई। मंगलाचरण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
इस अवसर पर साध्वी रश्मिप्रभा जी ने ‘खाद्य संयम दिवस’ पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने आहार में संयम और आध्यात्मिक साधना के महत्व को समझाया। वहीं, तेरापंथ के चतुर्थ आचार्य श्रीमद् जयाचार्य की ‘पवित्र साधना’ विषय पर भी ओजस्वी वक्तव्य दिया गया।
विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी ने पर्युषण महापर्व की महत्ता बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पर्वों और त्योहारों की संस्कृति है। प्रत्येक धर्म में अपने पर्वों का विशेष महत्व है, लेकिन जैन धर्म में पर्युषण केवल पर्व नहीं, बल्कि महापर्व है।
उन्होंने कहा कि महर्षि गौतम ने पर्वों में पर्युषण की विशेष महिमा बताई है। महापर्व का संदेश है कि व्यक्ति कुछ समय के लिए बाहरी दुनिया से हटकर अपनी आत्मा के पास रहे, इन्द्रियों को अंतर्मुखी बनाए और अतीत की भूलों का सिंहावलोकन करते हुए शुभ संकल्पों से भविष्य को संवारे।
साध्वी श्री ने कहा, “चक्रवर्ती की खेती सुबह बोई जाती है और शाम को फसल तैयार हो जाती है। हमें इन आठ दिनों में आध्यात्मिकता की फसल उगानी है और चेतना के धरातल को बिल्कुल समतल बनाना है।”
कार्यक्रम का प्रारंभ साध्वी सम्यक्त्वयशा जी के उपदेश से हुआ। भाद्रव कृष्णा द्वादशी के अवसर पर साध्वी कल्पयशा जी ने तेरापंथ के चतुर्थ आचार्य श्रीमद् जयाचार्य के जीवन एवं साधना पर सारगर्भित वक्तव्य दिया।
पर्युषण महापर्व को तप, जप, ज्ञान, ध्यान और स्वाध्याय की साधना का उत्तम अवसर बताते हुए तेरापंथ भवन में 24 घंटे के नमस्कार महामंत्र के अखंड जप का आयोजन भी किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन साध्वी कल्पयशा जी ने किया।