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भारतीय दर्शन पर डॉ. रीतेश व्यास को मिला आईसीपीआर का विशेष शोध प्रोजेक्ट

 

RNE Network.

भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने सिस्टर निवेदिता कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य शिक्षाविद व इतिहासविज्ञ डॉ रीतेश व्यास को जैन धर्म के तेरापंथ और अणुव्रत आंदोलन की भारतीय दर्शन में प्रासंगिकता विषय पर  रिसर्च प्रोजेक्ट स्वीकृत किया है। डॉ व्यास आगामी 2 वर्ष तक तेरापंथ और अणुव्रत का दार्शनिक पक्ष रखते हुए उसका वर्तमान संदर्भ में उपयोग और उसकी भूमिका पर शोध करेंगे।  

आप भारतीय दर्शन के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए उसकी विभिन्न शाखाओं से तेरापंथ का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। अणुव्रत की 75 वर्षों की यात्रा को भी रेखांकित करते हुए उसकी वर्तमान जीवन में भूमिका को उजागर करेंगे।  विदित रहे कि डॉ व्यास ने 2004 में पीएचडी का शोध कार्य जैन ग्रंथों में राजधर्म विषय को लेकर ही किया था। जिसे 2013 में प्राकृत भारती अकादमी,जयपुर ने प्रकाशित किया तथा 2016 में अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ मुंबई द्वारा श्रेष्ठ रचना का पुरस्कार भी मिला। डॉ व्यास आई सी एच आर के पोस्ट डॉक्टरल फैलो तथा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सीनियर फेलो रहे हैं। आपने शेखावाटी के भित्ति चित्रों, जल प्रबंधन, बीकानेर की हवेलियाों तथा भारतीय संग्रहालयों पर शोध कार्य किया है और इन विषयों पर आपकी किताबें भी प्रकाशित हो चुकी है। आपकी इस उपलब्धि पर शिक्षक साथियों ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।