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"सृजन सौरम.." : ‘‘सुमंगली माधवी’’, ‘‘सदियों का सूरज’’ ‘‘भूत’’ के अंशों को दयानंद शर्मा,प्रमोद शर्मा, कासिम बीकानेरी ने पढ़ा

 

Rudra News Express Bikaner. 

 

"अमर शहीद सागरमल गोपा" फेम कवि-नाटककार लक्ष्मीनारायण रंगा की जयंती पर चल रहे दो दिवसीय आयोजन ‘‘सृजन सौरम - हमारे बाऊजी’’ के दूसरे दिन बीकानेर में रंगा के तीन नाटकों के प्रमुख और मार्मिक अंशों का वचे प्रख्यात साहित्यकारों-रंगकर्मियों ने किया। इस अनूठे आयोजन में 

रंगा की तीन कृतियों ‘‘सुमंगली माधवी’’, ‘‘सदियों का सूरज’’ एवं ‘‘भूत’’ के चुनिंदा एवं मार्मिक अंशों का वाचन हुआ। रंगकर्मी दयानंद शर्मा, साहित्यकार प्रमोद शर्मा एवं क़ासिम बीकानेरी ने इस अंदाज में वाचन किया कि श्रोताओं के जेहन में पात्रों के चरित्र मंचित होते लगे।

 

आलोचना से नहीं डरे रंगा : उमाकांत 

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार-आलोचक डॉ. उमाकांत गुप्त ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा को समझना, बीकानेर के सांस्कृतिक इतिहास को समझना है। ‘‘सुमंगली माधवी’’ की नायिका आज भी हमें पूछती है कि शुभ क्या है? ‘‘भूत’’ का भूत सिस्टम में घूम रहा है। रंगा ने रंगमंच को ड्राइंग रूम से निकालकर चैराहे पर खड़ा किया। वे आलोचना से नहीं डरते थे, बल्कि आलोचना को रचना का खाद बनाते थे। समारोह संयोजक साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि बाऊजी का रंगमंच मनोरंजन नहीं, जन-जागरण था। उनके नाटक आज भी प्रासंगिक है। यह अंश-वाचन नई पीढ़ी को उनसे जोड़ने का सार्थक प्रयास है।

तीन भाषा तीन रंग : मदन जैरी ने हिन्दी कविता पाठ किया!

नाटकों के अंश वचन के बाद हुई ‘‘तीन भाषा - तीन रंग’’ काव्य संध्या में राजस्थानी, हिंदी और उर्दू के कवि-शायरों ने प्रस्तुतियां दी। वली गौरी, सागर सिद्दकी, मोहम्मद मोईनुद्दीन मुईन, ने अपनी ताजा गजलों के शेर पेश किये। तो राजस्थानी की मठोठ के साथ कमल रंगा, डाॅ. गौरीशंकर प्रजापत, इन्द्रा व्यास, विप्लव व्यास, ने रचनाओं की प्रस्तुति दी। प्रमोद शर्मा, आनंद मस्ताना, कैलाश टाक, शिवप्रकाश शर्मा, डाॅ. नृसिंह बिन्नानी, गिरिराज पारीक, मदन जैरी, अशोक सैन ने हिन्दी कविताओं का वाचन किया। 

ये रहे मौजूद : 

शिक्षाविद् राजेश रंगा ने समारोह की जरूरत बताई। रंगकर्मी तरूण गौड़, जीत ंिसंह, संगीता शर्मा, संतोष गौड़, साहित्यकार बुलाकी शर्मा, एड. इसरार हसन कादरी, गोपाल व्यास ‘‘कुंठित’’ पुनीत कुमार रंगा, शिव दाधीच, हरिनारायण आचार्य, भवानी सिंह, प्रेम नारायण व्यास, अरूण जे. व्यास, राहुल आचार्य, तोलाराम सारण, हरिकिशन व्यास, चम्पालाल गहलोत, आनंद छंगाणी, अख्तर अली, घनश्याम ओझा, किशन देराश्री, अशोक शर्मा, कन्हैया लाल पंवार आदि मौजूद रहे। संचालन गिरिराज पारीक ने किया। आभार डाॅ. फारूक चैहान ने ज्ञापित किया।