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आचार्यों को समर्पित रही राष्ट्रीय कवि चौपाल की 579वीं श्रृंखला, 'गुरु थे हिन्द की चादर' का लोकार्पण

आचार्यों ही मृत्योः 2 .. में संत विद्वानों का समागम - सम्मान 

गुरु..! पेड सर्वेंट से क्यों हो गये..? 

सृजन की सार्थकता पुरस्कार-सम्मान में नहीं, आपकी रचना बच्चों के गुनगुनाने से है..

राष्ट्र प्रेम और प्रकृति को एक धागे में पिरोती है "गुरु थे हिन्द की चादर"  पुस्तिका 

प्रकृति के खुले वातावरण में ईश्वरीय प्रेरणा लेखन को तकाजा करती है,


जहां चिंतन-मन्थन परक बहु विधाएं भरी रचित रचनाएं लोकार्पित होती है, राष्ट्रीय कवि चौपाल की सार्थकता है 

 

RNE Bikaner.

राष्ट्रीय कवि चौपाल 579 वीं श्रंखला आचार्यों ही मृत्योः 2 ..को समर्पित रही...  कार्यक्रम की अध्यक्षता सरदार अली परिहार मुख्य अतिथि में डॉ धर्म को चंद जैन डॉ नन्द किशोर सोनी, विशिष्ट अतिथि में डॉ शिवराज भारतीय, मोनिका गौड़, भगवती पारीक 'मनु' आदि मंच सुशोभित हूए,  रामेश्वर साधक ने कार्यक्रम में मंचासीन संत गुरु विद्वतजन को नमन करते हुए कहा आचार्यो ही मृत्यो: अर्थात  आचार्य ही नव जीवन है,  जन्मदाता संसार दिखातें हैं, जबकि आभार आचार्य - ऋषि गुरूवर हमें आत्म बोध कराते हुए प्रभो सान्निध्य से जीवोंन्मुक्त करते हैं। 

कार्यक्रम शुभारम्भ में मंचासीन संत विद्वतजनों द्वारा राष्ट्रीय कवि चौपाल में "गुरु थे देश की चादर" पुस्तक का  लोकार्पण किया गया तत्पश्चात....   स्वामी संवित् विमर्शानन्दगिरि महाराज, डॉ धर्म चंद जैन, डॉ नन्द किशोर सोनी, डॉ शिवराज भारतीय, का शाल श्रीफल रत्न जड़ित मोतीयन माला से माल्यार्पण कर स्वागत सम्मान किया गया

आचार्यो ही मृत्यो: संदर्भ स्वामी संवित् विमर्शानन्दगिरि महाराज ने विषयांतर्गत प्रवचन कहा सनातन में पहला गुरु, देव, शिक्षक, कौन है? क्या मंथन किया है? गुरु क्या केवल आंखों से, मन अन्तर्मन से देखा जा सकता है ? गुरु पेड सर्वेंट से क्यों हो गये ? यदि उपरोक्त दोष मन में, चित्त में, स्वप्न में में भी दोष है तो गुरु साहित्यकार संत सभी के सभी दोषी हैं!! गुरु वही सही है जो सेवा के रूप में स्वयं में जगत देखता है, जगत में स्वयं को देखता है वही सच्चा शिक्षक गुरु संत है
 

मुख्य अतिथि डॉ धर्म चंद जैन ने शिवराज भारतीय को बधाई देते हुए प्रकृति के खुले वातावरण खुले मन वाली अन्तर्मन को संजोने वाली ईश्वरीय प्रेरणा लेखन को तकाजा करती है, मुख्य अतिथि डॉ नन्द किशोर सोनी ने कहा लेखन करना सहज नहीं बाल लेखन तो विलक्षण कृति के पुरुषार्थ है और यहां कवि साहित्यकार जो चिंतन, मनन, बहु विधाएं लिए रचित रचनाएं लोकार्पित होती है वे राष्ट्रीय चिंतन मंथन परक होती है जो राष्ट्रीय कवि चौपाल नाम सार्थक करता है 
 

लोकार्पित गुरु थे हिंद की चादर कृति प्रति, त्रिभाषी कवयित्री, गीत - ग़ज़ल कार, मोनिका गौड ने इस पुस्तक लोकरंजक भाषा में मातृभूमि के सच्चे सपूतों का स्मरण करवाती है, उनके बलिदान व कार्यो को बालको के साथ साथ आम पाठक को भी रुचिकर लगेगी, कुंडलियां छंद का सांगोपांग निर्वहन करते हुए रुचिकर विषयो पर बोधगम्य भाषा में लिखी हुई पुस्तक है ..    

डॉ मूलचंद बोहरा ने लोकार्पित कृति संदर्भ बताया कि भारतीय जी.. छंद के सिद्धहस्त कवि हैं,यह कृति बाल मन, राष्ट्र मन और सांस्कृतिक मन की त्रिवेणी है जो बच्चों को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव को सहज भाव से अवगत करवाती है। वरीष्ठ साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि शिवराज भारतीय बालमन के सच्चे चितेरे रचनाकार हैं। इनकी कविताओं में बचपन की सहजता, कल्पनाशीलता और निष्कपट भावनाएँ सजीव रूप में हैं.. बचपन साक्षात मुस्कुराता, खिलखिलाता हुआ दिखाई देता है। यह बाल साहित्य मनोरंजन के साथ-साथ संस्कार, संवेदना और जीवन-मूल्यों का भी सहज संचार करता है...कवयित्री भगवती पारीक 'मनु' (श्रीडूंगरगढ़) ने अपने उद्बोधन में गुरु की महिमा के साथ लोकार्पित पुस्तक के विषय में कहा कि शिवराज भारतीय की बाल साहित्य की पुस्तक "गुरु थे हिन्द की चादर" सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों, प्रकृति और राष्ट्र प्रेम को एक धागे में पिरोने का काम करती है। जो हर पीढ़ी के लिए संस्कारों की माला के रूप में सुशोभित होगी।
 

डॉ. शिवराज भारतीय ने अपनी साहित्य कृति 'गुरु थे हिन्द की चादर' अपने गुरुजन साहित्यकार हनुमान दीक्षित,डॉ. देव कोठारी एवं शिक्षा गुरू सोहनवीरसिंह आर्य को समर्पित करते हुए कहा कि जीवन विकास में गुरुजन की महत्ती भूमिका रही है इन गुरुजनों की प्रेरणा नहीं होती तो शिवराज भारतीय कुछ और ही होता ।सृजन की सार्थकता पुरस्कार या सम्मान मिलने से नहीं बच्चों के गुनगुनाने से है..  जब मैं बच्चों को मेरे लिखे हिन्दी व राजस्थानी के गीत उत्साह से पढ़ते - गुनगुनाते सुनता हूं ,तो लगता है कि मेरा लिखना सार्थक हुआ। बाल साहित्य का सृजन बालकों के मनोरंजन के साथ-साथ उनमें जीवन मूल्यों के विकास एवं सामाजिक करण हेतु भी आवश्यक है। इस पुस्तक में ' गुरु तेग बहादुर जी, गुरु गोविंद सिंहजी, शहीद ऊधम सिंह, बाल वीरों व बच्चों की रूचि के 40 बाल कुंडलिया संकलित हैं।
        

 

डॉ कृष्ण लाल विश्नोई : मात पिता और गुरु हैं,तीनों तीर्थ धाम। मुक्ति के आधार हैं,प्यारा गुरु का नाम,.. प्रमोद कुमार शर्मा  : कोई नूर है भीतर, कोहेनूर है भीतर, रहता साथ ही में बहुत दूर है भीतर। कोई तो समझे बात,मेरे हुजूर है भीतर.. दिल हूम हूम करे कोई जरूर है भीतर
बमचकरी : टाबर केये में कोनी, घर आली सुणे  कोनी, बहन भाई बोले कोनी बाकी सब ठीक है

 

कैलाश टाक : शोर है,शोर है, शोर है, चोर कहता है कि चोर है। तरकस में है तीर उसके निशाना तुम्हारी ओर है 
कासिम बीकानेरी : ता'लीम के ज़ेवर से बच्चों को सजाना है। इंसान हमें अच्छा, बच्चों को बनाना है
रामेश्वर साधक : शरीर-शरीरी कीर्ति कीर्तिमान में न सजे, अविधा.. अकर्मण्यता में पुर्वज देव न लजे, सक्रिय कर्म रहस्य समझ.. आज मैं फिर जिन्दा हो गया,.. शिव दाधीच बीकानेरी : गीत में जब प्रीत लिखोगे तो करुणा वन्दन हो जायेगा। लिख दोगे तब गीत वतन पे तो, वीरों का वन्दन अभिनंदन हो जायेगा।।  

विशाल भारद्वाज : अज्ञान का तिमिर न छूटा भ्रम की गहरी छाया में। गुरु चरणों  में मिला उजाला,नश्वर सी  इस काया में॥ माजिद ख़ान गौरी : मेरी ज़मीं मेरा आसमां है बेटियां,मेरे घर की इज्जत शान है बेटियां,, कृष्णा वर्मा : गुरु पूर्णिमा पर्व आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मनाया जाता, महर्षि वेदव्यास को भी इस दिन याद किया जाता..

राजकुमार ग्रोवर  : रोते हुओं को हंसादे जो,सोते हुओं को जगादे जो। कवि उसको ही कहते हैं,पत्थर दिल पिघला दे जो...  सलीम भाटी : राम जी री चिड़िया रामजी रा  खेत जीमो मारी चिड़िया भर भर पेट,..राजू लखोटिया  :  मेरे नैना सावन भादो भादो फिर भी मेरा मन प्यासा,..  पवन चड्ढ़ा  :  वतन पर जो फिदा होगा अमर वो वो नौजवां होगा,.. राधा किशन सोनी सज्जन रे झूठ मत बोलो बोलो खुदा के पास जाना है 

मनमोहन कपूर, ओम प्रकाश भाटी, ने गुरु समर्पित रचनाओं प्रस्तुतियां दी..  आज़ के कार्यक्रम में 25 महानुभाव द्वारा बोद्धिक - काव्य प्रस्तुतियां दी गई आज़ के कार्यक्रम में डॉ अखिलानंद पाठक, मौहम्मद शकील गौरी, शिव प्रकाश शर्मा, रेखा पारीक, प्रज्ञा पारीक, सिराजुद्दीन भुट्टा, एडवोकेट मेहराजुद्दीन भुट्टा, घनश्याम सौलंकी छोटू खां भवानी सिंह शिवबाड़ी साकिर पत्रकार, राजेश चौधरी, नत्थू खां, कौशल्या देवी, धर्मेंद्र राठोड़ धन्नजय, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले शायराने अंदाज में प्रमोद शर्मा ने किया धन्यवाद आभार नमामी शंकर आचार्य ने किया