भीषण गर्मी में भी आस्था का ज्वार : बीकानेर में सजी नृसिंहदेव की जीवंत लीला
तपती सड़कों पर दौड़ता हिरण्यकश्यप, खंभ फाड़ प्रकट हुए नृसिंह भगवान — घर-घर पूजा, मंदिरों में पंचामृत अभिषेक
Apr 30, 2026, 19:38 IST
RNE, BIKANER .
आसमान से बरसती आग, गर्म हवाओं के थपेड़े और 40 डिग्री के पार तापमान… लेकिन आस्था के आगे मौसम भी फीका पड़ गया। नृसिंह जयंती पर बीकानेर आज पूरी तरह भक्ति में डूबा नजर आया। एक ओर मंदिरों में भगवान नृसिंहदेव का पंचामृत से अभिषेक हो रहा है, वहीं दूसरी ओर तपती सड़कों पर हिरण्यकश्यप और नृसिंह भगवान की रोमांचक लीला हजारों लोगों को आकर्षित कर रही है।
सुबह से ही शहर के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भगवान का अभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। घर-घर में भी नृसिंह जयंती के अवसर पर खास पूजा, व्रत और भजन-कीर्तन का दौर जारी है।
दोपहर ढलते ही लखोटिया चौक, डागा-बिस्सा चौक, लालानी चौक, नथूसर गेट, गोगा गेट और दुजारी गली सहित कई स्थानों पर मेलों की रौनक बढ़ने लगी। इसी बीच शुरू हुई नृसिंह लीला ने माहौल को रोमांच से भर दिया।
“हिरणा रे किसना गोविंदा पैलाद भजे...” के गगनभेदी उद्घोष के साथ काले लबादे में लिपटा हिरण्यकश्यप हाथ में हंटर लिए तपती सड़क पर दौड़ता नजर आया। उसके पीछे सैकड़ों लोग भक्ति और उत्साह में लीन होकर भागते रहे। हिरण्यकश्यप अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए आतुर दिखा, लेकिन जैसे ही चरम दृश्य आया — खंभ फाड़कर भगवान नृसिंह प्रकट हुए।
भीड़ की सांसें थम गईं जब नृसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप को लपक कर अपनी जांघों पर रखा और उसका वध कर दिया। यह दृश्य इतना जीवंत और प्रभावशाली था कि हर कोई भक्ति और रोमांच से भर उठा।
भीषण गर्मी के बावजूद हजारों की संख्या में लोग इस लीला को देखने उमड़े। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस परंपरा का हिस्सा बनता नजर आया।
बीकानेर की यह अनूठी नृसिंह लीला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि शहर की समृद्ध लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की भी सजीव झलक पेश करती है—जहां आस्था, उत्साह और परंपरा एक साथ जीवंत हो उठते हैं।