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Ujjain Shahi Masjid: मकसूद अहमद सहित अल्पसंख्यक नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया 

 

Rudra News Express Bikaner.

उज्जैन की ऐतिहासिक शाही मस्जिद के हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाए जाने के मामले में बीकानेर से भी विरोध दर्ज कराया गया है। पीसीसी सदस्य एवं पूर्व महापौर हाजी मकसूद अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन) को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में उज्जैन की शाही मस्जिद को करीब 600 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए इसके हिस्से को हटाने की कार्रवाई पर चिंता जताई गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई से लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

क्या है उज्जैन शाही मस्जिद का विवाद?

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की योजना है। इसी योजना की जद में शाही मस्जिद का एक हिस्सा भी आ रहा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2026 को दो याचिकाएं खारिज करते हुए मस्जिद के उस हिस्से को हटाने की कार्रवाई का रास्ता साफ किया था, जिसे नगर निगम 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाना चाहता है। याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद को वक्फ संपत्ति बताते हुए प्रार्थना कक्ष, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और सामने के मजार/ढांचे के हिस्से को हटाए जाने पर आपत्ति की थी। 

इसके बाद 28 सितंबर को कार्रवाई के दौरान विरोध और पथराव की घटनाएं सामने आईं तथा पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। 

राष्ट्रपति से क्या मांग?

बीकानेर से दिए गए ज्ञापन में राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करते हुए जनभावनाओं और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने का आग्रह किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि शाही मस्जिद ऐतिहासिक धरोहर है और मामले में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए।

ज्ञापन देने वालों में हाजी मकसूद अहमद, मो. सलीम भाटी, मासूक अहमद, दलीप सिंह तंवर और यूथ कांग्रेस महासचिव मो. शोएब शामिल रहे।