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Suman Kalyanpur : "आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे.." की अमर आवाज ने 89 वर्ष की उम्र में ली अंतिम विदाई

 
PM मोदी, महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस, शरद पवार सहित कइयों ने दी श्रद्धांजलि
RNE Mumbai
भारतीय फिल्म संगीत जगत को एक और बड़ा झटका लगा है। अपनी मधुर, कोमल और भावपूर्ण आवाज से लाखों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार को मुंबई स्थित उनके आवास पर 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ हिंदी और मराठी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर का एक और चमकता सितारा हमेशा के लिए अस्त हो गया।
सुमन कल्याणपुर ने छह दशक से अधिक लंबे अपने संगीत सफर में हिंदी, मराठी सहित कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मिठास, शास्त्रीय आधार और भावनात्मक अभिव्यक्ति रही, जिसने उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सुमन कल्याणपुर की मधुर आवाज और भावपूर्ण गायन ने भारतीय सांस्कृतिक जगत को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि उनके गीतों ने संगीत प्रेमियों और भारतीय सिनेमा के प्रशंसकों के बीच एक विशेष स्थान बनाया है। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और वरिष्ठ नेता शरद पवार सहित अनेक राजनीतिक और सांस्कृतिक हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शरद पवार ने कहा कि सुमन कल्याणपुर के निधन के साथ भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है।
ढाका से मुंबई तक का सफर
28 जनवरी 1937 को तत्कालीन पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के ढाका में जन्मी सुमन का मूल नाम सुमन हेम्मडी था। उनके पिता शंकर राव हेम्मडी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में वरिष्ठ अधिकारी थे। 1943 में परिवार मुंबई आ गया, जहां सुमन ने अपनी शिक्षा पूरी की और संगीत की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की। साल 1958 में उन्होंने व्यवसायी रामानंद कल्याणपुर से विवाह किया, जिसके बाद वे सुमन हेम्मडी से सुमन कल्याणपुर बन गईं। 
संगीत के साथ-साथ उनकी रुचि चित्रकला में भी थी और उन्होंने प्रतिष्ठित सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में प्रवेश भी लिया था। लेकिन संगीत के प्रति बढ़ते लगाव ने उन्हें गायन की दुनिया में स्थापित कर दिया। उन्होंने पंडित केशवराव भोले, उस्ताद अब्दुल रहमान खान और गुरु नवरंग जैसे गुरुओं से शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
1954 में शुरू हुआ फिल्मी सफर : 
सुमन कल्याणपुर का फिल्मी सफर मराठी फिल्म ‘शुक्राची चांदनी’ और हिंदी फिल्म ‘मंगू’ (1954) से शुरू हुआ। शुरुआती वर्षों में उन्होंने कई संगीतकारों के साथ काम किया और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना ली। उनकी आवाज की तुलना अक्सर स्वर कोकिला लता मंगेशकर से की जाती थी। दोनों की आवाज में इतनी समानता थी कि कई बार श्रोता भ्रमित हो जाते थे। हालांकि, सुमन ने अपनी विशिष्ट शैली और भावपूर्ण प्रस्तुति के दम पर खुद को अलग स्थापित किया।
मोहम्मद रफी के साथ बनाए अमर गीत : 
सुमन कल्याणपुर और मोहम्मद रफी की जोड़ी हिंदी फिल्म संगीत की सबसे लोकप्रिय जोड़ियों में गिनी जाती है। दोनों ने 140 से अधिक युगल गीत गाए, जिनमें कई आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं।उनके चर्चित गीतों में " * आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे.. * ना-ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे.. * मेरा प्यार भी तू है.. * ना तुम हमें जानो.. * शराबी-शराबी ये सावन का मौसम.. * बहना ने भाई की कलाई में.." जैसे सदाबहार गीत शामिल हैं।
कई भाषाओं की लोकप्रिय आवाज : 
सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली, भोजपुरी, राजस्थानी, पंजाबी, असमिया, ओड़िया, कन्नड़ और मैथिली सहित अनेक भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए। बताया जाता है कि उन्होंने हिंदी में ही 850 से अधिक गीत गाए, जबकि कुल मिलाकर उनके गीतों की संख्या हजारों में है। मराठी संगीत जगत में भी उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके भावगीत, अभंग और भक्तिगीत आज भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हैं।
एक युग का अंत...
लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, मुकेश, किशोर कुमार, आशा भोसले और मन्ना डे के दौर की प्रमुख गायिकाओं में शामिल सुमन कल्याणपुर ने भारतीय संगीत को अनगिनत अमर गीत दिए। उनकी आवाज में एक ऐसी मिठास थी जो पीढ़ियों को जोड़ती रही। उनके निधन से भारतीय फिल्म संगीत जगत ने एक ऐसी स्वर-साधिका को खो दिया है, जिसकी आवाज आने वाले दशकों तक श्रोताओं के दिलों में गूंजती रहेगी। उनकी गायकी, उनके गीत और उनकी विरासत भारतीय संगीत इतिहास का अमूल्य अध्याय बने रहेंगे।