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Dollar vs Rupee : डालर के मुकाबले भारतीय रुपये में भारी गिरावट, निचले स्तर पहुंचे भाव 

जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच रुपए में लगातार कमजोरी दिखी है। जनवरी 2026 में भी भारतीय ऋण और इक्विटी बाजारों से पूंजी निकासी जारी रही है।
 

डालर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार निचलते स्तर पर जा रहा है। रुपये पर डालर के मुकाबले लगातार दबाव बना हुआ है। इसके कारण रुपये में लगातार कमजोरी दिखाई दे रही है। भारतीय रुपया कारोबार में यूएस डॉलर के मुकाबले भारी दबाव में नजर आया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 69 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 91.74 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले मंगलवार को रुपया सात पैसे की गिरावट के साथ 90.97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। 

जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच रुपए में लगातार कमजोरी दिखी है। जनवरी 2026 में भी भारतीय ऋण और इक्विटी बाजारों से पूंजी निकासी जारी रही है। डॉलर इंडेक्स में नरमी के बावजूद रुपया मजबूत नहीं हो सका। डॉलर इंडेक्स किसी मुद्रा की ताकत को प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले मापता है। बाजार सहभागियों का कहना है कि आरबीआइ रुपए की गिरावट को नियंत्रित करना चाहता है, लेकिन इसकी दिशा पूरी तरह बदलना नहीं चाहता। केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अनावश्यक रूप से खर्च नहीं करना चाहता।

अमरीकी संपत्तियों से निकाल रहे पैसे 

वैश्विक निवेशक 'सेल अमरीकी' टेंड के तहत अमरीकी संपत्तियों से पैसा निकाल रहे हैं। इसकी वजह राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की वह धमकी है, जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय सहयोगी देशों पर व्यापक टैरिफ लगाने की बात कही। इससे 2026 की शुरुआत में अपेक्षाकृत शांत दिख रहे वैश्विक वित्तीय बाजारों में अचानक हलचल मच गई।

इसका असर काफी व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है। पिछले एक हफ्ते में अमरीकी शेयर बाजारों में तेज गिरावट आई और बाजार 2% लुढ़क गया। इससे अमरीकी ट्रेजरी बॉन्ड की कीमतें घटीं, जिससे उनकी यील्ड कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं डॉलर प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले कमजोर हो गया। दूसरी ओर, पारंपरिक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले विकल्पों जैसे सोना-चांदी, जापानी येन और स्विस फ्रैंक में तेजी आई।
 
यह संकेत है कि वैश्विक निवेशकों का जोखिम रुझान अब अमरीकी बाजारों से हटकर सुरक्षित ठिकानों की ओर बढ़ रहा है। इससे भारतीय बाजार पर भी व्यापक असर पड़ा है। एक तरफ जहां विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार एक महीने में ही 4.5% लुढ़क गया है, वहीं रुपए पर दवाब और बढ़ गया है।

डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को गिरकर अपने रेकॉर्ड निचले स्तर 91.74 पर बंद हुआ। ट्रंप के टैरिफ टेरर से सेफ हैवन एसेट्स की डिमांड बढ़ने से भारतीय बाजार से विदेशी बिकवाली और तेज होने की आशंका है। साथ ही रुपया पर दबाव और बढ़ सकता है।