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Silver Rates Increased : चांदी के रेट ने बनाया नया रिकार्ड, तीन लाख से पार पहुंचे भाव 

जहां पर चांदी की कीमत तीन लाख पार करते हुए तीन लाख 4 हजार 200 रुपये का हाई बना दिया
 

चांदी के रेट लगातार नया रिकार्ड बनाते जा रहे है। चांदी की बढ़ती डिमांड  का असर उनकी कीमतों पर दिखाई दे रहा है। सोमवार को चांदी के भाव में रिकार्ड तेजी देखकर एक ही दिन में 15 हजार रुपये से ज्यादा की तेजी दिखाई दी। जहां पर चांदी के रेट ने नया रिकार्ड बनाते हुए तीन लाख के पार कर लिया। शुक्रवार को चांदी के रेट 2 लाख 87 हजार रुपये थे, लेकिन सोमवार को एमसीएक्स मार्केट खुलते ही चांदी ने रेट में नया रिकार्ड बना दिया।

जहां पर चांदी की कीमत तीन लाख पार करते हुए तीन लाख 4 हजार 200 रुपये का हाई बना दिया। ऐसे में चांदी के रेटों में लगभग साढ़े 15 हजार रुपये की तेजी देखने को मिली। पिछले एक माह में चांदी के रेट एक लाख रुपये बढ़ चुके है। एक माह पहले चांदी के रेट दो लाख के आसपास थे, लेकिन सोमवार यानी 19 जनवरी को तीन लाख को पार कर दिया। MCX पर 15 दिसंबर 2025 के आसपास चांदी पहली बार 2 लाख रुपए पर पहुंची थी।

ऐसे में चांदी के रेट तीन लाख होने में एक माह का समय लगा है। वहीं इसे 1 से 2 लाख तक पहुंचने में 9 महीने, जबकि 50 हजार से 1 लाख तक पहुंचने में 14 साल लगे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2026 में चांदी के रेट चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम देखा जा सकता है। ऐसे में चांदी के रेट गरीब आदमी से बाहर होते जा रहे है। इसके कारण शादी समारोह में चांदी के जेवरात की जगह पर अब दूसरे विकल्प की तलाश होने लगी है, लेकिन जेवरात में डिमांड कम होने के बावजूद चांदी के रेट नया उछाल बना रहे है। 

इस कारण से बढ़ रहे चांदी के रेट 

चांदी के रेट के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिमांड के चलते हो रहे है, क्योंकि चांदी की सप्लाई कम है और डिमांड लगातार बढ़ रही है। हालांकि अनुमान लगाया जाता है कि चांदी का प्रयोग केवल जेवरात में होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। चांदी का प्रयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और 5G टेक्नोलॉजी में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। पूरी दुनिया में 'ग्रीन एनर्जी' पर फोकस बढ़ने से इसकी खपत रिकॉर्ड स्तर पर है।

चांदी की  सप्लाई में कमी

चांदी की डिमांड जिस तेजी से बढ़ रही है, उस मुकाबले खदानों से इसका उत्पादन नहीं बढ़ पा रहा है। कुछ देशों में पर्यावरण नियम से प्लान्ड माइनिंग कम हो गई है। इसके अलावा लगभग 70% चांदी, कॉपर और जिंक जैसी दूसरी धातुओं की खुदाई के दौरान बाय प्रोडक्ट के रूप में निकलती है। जब तक तांबे की खुदाई नहीं बढ़ती, चांदी की सप्लाई नहीं बढ़ सकती। इस डिमांड और सप्लाई के भारी अंतर के कारण चांदी की कमी बनी हुई है।