{"vars":{"id": "127470:4976"}}

Silver Hallmark: अब चांदी पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य, 1 सितंबर से सरकार लागू करेगी नया नियम, जानें 

 

Silver Hallmark: चांदी के गहनों और वस्तुओं की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए अब हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रक्रिया 1 सितंबर 2025 से लागू की जाएगी। हालांकि, शुरुआत में यह नियम स्वैच्छिक होगा, यानी ग्राहक अपनी इच्छा के अनुसार हॉलमार्क वाली या बिना हॉलमार्क वाली चांदी खरीद सकते हैं। लेकिन भविष्य में इसे पूरी तरह अनिवार्य किए जाने की संभावना है।

आवश्यकता क्यों है?


1. शुद्धता की गारंटी: हॉलमार्किंग यह प्रमाणित करती है कि चांदी कितनी शुद्ध है, जिससे ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद प्राप्त होते हैं।
2. धोखाधड़ी पर लगाम: नकली या अशुद्ध चांदी की बिक्री को रोकने में यह प्रक्रिया मददगार होगी।
3. पारदर्शिता में सुधार: हॉलमार्किंग से चांदी की शुद्धता और उसकी कीमत के बीच संतुलन बना रहेगा, जिससे ग्राहक अपने पैसे का सही मूल्य पा सकेंगे।

चांदी के शुद्धता स्तर


भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चांदी के लिए छह अलग-अलग शुद्धता स्तर निर्धारित किए हैं। हर स्तर को एक कोड नंबर के रूप में दर्शाया जाता है:
800 नंबर: 80% चांदी और 20% अन्य धातुएं।
835 नंबर: 83.5% शुद्ध चांदी।
900 नंबर: 90% शुद्धता।
925 नंबर: 92.5% शुद्धता, जिसे *स्टर्लिंग सिल्वर* भी कहा जाता है।
970 नंबर: 97% शुद्ध चांदी।

990 नंबर: 99% शुद्धता, जिसे फाइन सिल्वर कहा जाता है।

ग्राहकों को लाभ


चांदी पर हॉलमार्किंग से ग्राहकों को यह पता चल पाएगा कि वे जो चांदी खरीद रहे हैं, वह कितनी शुद्ध है। यह प्रक्रिया गहनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने का काम करेगी। इसके अलावा, गहनों की खरीदारी अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद हो जाएगी।

क्या इससे चांदी महंगी होगी?


विशेषज्ञों का मानना है कि हॉलमार्किंग से चांदी की कीमतों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, हॉलमार्क वाली चांदी की मांग बढ़ सकती है, क्योंकि ग्राहक अब शुद्धता को लेकर अधिक जागरूक हो गए हैं।