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Asaram Bapu Rape Case : आसाराम को आखिरी सांस तक जेल में रहना होगा, उम्रकैद की सजा बरकरार

 

Ahmedabad में इलाज करवा रहे आसाराम को तुरंत सरेंडर के आदेश

RNE JODHPUR.
नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में सजायाफ्ता आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जोधपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई “आखिरी सांस तक आजीवन कारावास” की सजा को बरकरार रखते हुए आसाराम की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने उन्हें तुरंत प्रभाव से सरेंडर करने के आदेश भी दिए हैं।

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही था और उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हालांकि कोर्ट ने गैंगरेप के आरोप को स्वीकार नहीं किया, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) के तहत दोष सिद्ध माना और विशेष पॉक्सो कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को यथावत रखा।
वहीं मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद्र को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। दोनों को ट्रायल कोर्ट ने 20-20 साल की सजा सुनाई थी।
 

 

पैरोल पर बाहर चल रहा था आसाराम

आसाराम फिलहाल इलाज के लिए पैरोल पर जेल से बाहर था और अहमदाबाद में उपचार करवा रहा था। हाईकोर्ट ने अब उसे तत्काल सरेंडर करने का निर्देश दिया है। पीड़ित पक्ष के वकील पी.सी. सोलंकी ने बताया कि अदालत ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों में पीड़िता का बयान महत्वपूर्ण और पर्याप्त साक्ष्य माना जा सकता है। अभियोजन पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि मामले में साक्ष्य प्रभावित करने और गवाहों को डराने की कोशिशें हुई थीं।

2013 का चर्चित मामला
यह मामला अगस्त 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का आरोप आसाराम पर लगा था। लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक चली, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। बुधवार को अदालत ने अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए सजा को बरकरार रखा।