Bikaner Pocso Court Order : 04 साल की मासूम से अश्लील हरकत करने वाले को 05 साल की सजा
बीकानेर के बीछवाल इलाके का मामला।
आरोपी राजेन्द्र उर्फ राजू (49) को 4 वर्षीय बालिका से अश्लील हरकत और लैंगिक उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया।
आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 में 5 वर्ष का कठोर कारावास और आईपीसी धारा 354 में 3 वर्ष का कठोर कारावास सुनाया गया।
कुल 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जो पीड़िता को दिलाए जाने का आदेश।
न्यायालय ने पीड़िता को अतिरिक्त प्रतिकर (मुआवजा) देने की भी अनुशंसा की।
RNE Bikaner.
बीकानेर की विशेष पॉक्सो अदालत ने 4 वर्षीय बालिका के साथ अश्लील हरकत करने के मामले में आरोपी राजेन्द्र उर्फ राजू को दोषी करार देते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास और 80 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय (पॉक्सो) संख्या-2 की पीठासीन अधिकारी डॉ. मनीषा चौधरी ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया।
क्या था मामला?
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार 8 अप्रैल 2023 को बीछवाल थाना क्षेत्र में रहने वाली एक 4 वर्षीय बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। आरोप है कि पड़ोस में किराये पर रहने वाला राजेन्द्र उर्फ राजू (49) उसे अपने कमरे में ले गया और उसके साथ अश्लील हरकतें कीं। बच्ची की मां ने आरोपी को मौके पर देख लिया, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने बीछवाल थाने में मामला दर्ज कर जांच के बाद न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया।
10 गवाह, मामूली विरोधाभास, अदालत की सख्त टिप्पणी :
विशिष्ट लोक अभियोजक एडवोकेट शिवचंद भोजक के मुताबिक सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके माता-पिता, चिकित्सकीय और अन्य साक्ष्यों सहित कुल 10 गवाह पेश किए। अदालत ने माना कि पीड़िता और उसके परिजनों के बयान विश्वसनीय हैं तथा अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा। न्यायालय ने यह भी कहा कि गवाहों के बयानों में जो मामूली विरोधाभास हैं, वे मामले की मूल सच्चाई को प्रभावित नहीं करते।
निर्णय में अदालत ने कहा कि बालिकाओं और महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराध केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे समाज के खिलाफ अपराध हैं। ऐसे मामलों में नरमी बरतना उचित नहीं है और समाज में इस प्रकार के अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए कठोर दंड आवश्यक है।
यह मिली सजा : एससी-एसटी एक्ट के आरोप से बरी :
न्यायालय ने आरोपी राजेन्द्र उर्फ राजू को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास और 30 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई। इसके साथ ही पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माना से दंडित किया है। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस प्रकार आरोपी को प्रभावी रूप से 5 वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ेगा। अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 354 और पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 में दोषी माना, जबकि एससी-एसटी एक्ट से जुड़े आरोपों में दोषसिद्धि नहीं की गई।
किसने-किस पक्ष की पैरवी की :
अभियोजन पक्ष (राज्य सरकार) की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक शिवचंद भोजक ने पैरवी की। अभियुक्त राजेन्द्र उर्फ राजू की ओर से धिवक्ता मनोज सुरालिया, अधिवक्ता वर्षा गहलोत ने पैरवी की। दोनों ने लीगल एड डिफेंस काउंसिल के माध्यम से आरोपी का पक्ष रखा। विशिष्ट लोक अभियोजक एडवोकेट शिवचंद भोजक ने बताया कि प्रतिकर के रूप में एक लाख रुपए दिलवाए, इसमें 80 प्रतिशत राशि एफडी के रूप में है।