Fake Cancer Drug : बेंगलुरु में नकली कैंसर दवा रैकेट का खुलासा, राजस्थान के वीरेश जैन गिरफ्तार; क्या बीकानेर केस से जुड़ते हैं तार?
90 से ज्यादा अस्पताल-क्लीनिकों तक संदिग्ध दवाओं की सप्लाई की जांच, करीब 50% छूट पर बिक्री का आरोप; दूसरी ओर दिल्ली में मिला था बीकानेर के लिए भेजी सरकारी सप्लाई का Avelumab
Rudra News Express National Desk Bengluru.
कैंसर और गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली संदिग्ध दवाओं की सप्लाई के मामले में बेंगलुरु पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की जांच ने बड़ा रूप ले लिया है। जांचकर्ताओं के अनुसार संदिग्ध नकली या री-पैकेज्ड दवाओं की सप्लाई बेंगलुरु के 90 से अधिक अस्पतालों और क्लीनिकों तक हुई हो सकती है। मामले में मिनर्वा सर्कल स्थित Krupa Healthcare के संचालक वीरेश कुमार जैन को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें रिपोर्टों में राजस्थान मूल का बताया गया है।
यूं सामने आया मामला :
जांच की शुरुआत 18 अगस्त को बेंगलुरु के बिदादी और डोड्डेरी इलाके में एक फार्महाउस पर हुई कार्रवाई से जुड़ी है। अधिकारियों ने वहां करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की संदिग्ध दवाएं, फर्जी बिल, पैकेजिंग सामग्री और इंजेक्शन भरने से जुड़े उपकरण बरामद किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद जांच का दायरा कई राज्यों तक बढ़ा।
पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि संदिग्ध दवाएं किन स्रोतों से आईं और किन चिकित्सा प्रतिष्ठानों तक पहुंचीं। जांचकर्ताओं को आशंका है कि कम कीमत की या एक्सपायर्ड दवाओं को दोबारा पैक कर नए लेबल के साथ बाजार में उतारा गया हो सकता है। कुछ दवाओं को करीब 50 प्रतिशत तक की छूट पर सप्लाई किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
कौन है वीरेश जैन, वहां तक कैसे पहुंची जांच?
मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस मिनर्वा सर्कल स्थित Krupa Healthcare तक पहुंची। बताया जाता है कि इसे राजस्थान का वीरेश जैन चलाता है। अधिकारियों को संदेह है कि परिसर का इस्तेमाल संदिग्ध दवाओं के भंडारण और वितरण के लिए किया जाता था। पुलिस खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं ने प्रशांत नाम के एक व्यक्ति से भी वीरेश जैन के कथित संबंध की बात कही है। प्रशांत को मामले का प्रमुख संदिग्ध बताया गया है और उसकी तलाश की जा रही है। बेंगलुरु पुलिस का कहना है कि नेटवर्क की वास्तविक सीमा अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
बीकानेर से भी जुड़ा है ऐसा ही मामला :
बेंगलुरु की जांच के बीच राजस्थान से जुड़ा एक अलग कैंसर दवा मामला भी महत्वपूर्ण हो जाता है। 19 अगस्त को दिल्ली क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने एक कथित दवा सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कैंसर और इम्यूनोथेरेपी की 22 महंगी दवाएं बरामद की थीं। इनमें चार Bavencio यानी Avelumab वायल का बैच नंबर AU052510 था। जांच में इस बैच का संबंध राजस्थान की सरकारी दवा सप्लाई से सामने आया।
रिकॉर्ड के अनुसार इसी बैच की दवा राजस्थान के कई सरकारी अस्पतालों को भेजी गई थी और इसमें बीकानेर का आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर ट्रीटमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट भी शामिल था। दिल्ली में इसी बैच से जुड़े वायल मिलने के बाद राजस्थान में यह जांच शुरू हुई कि सरकारी सप्लाई की दवा दिल्ली के कथित अवैध बाजार तक कैसे पहुंची।
Avelumab की जांच में सामने आया गंभीर सवाल :
मामले में निर्माता कंपनी की प्रयोगशाला जांच का भी जिक्र सामने आया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 24 अगस्त की Merck रिपोर्ट में दो संदिग्ध Avelumab सैंपलों को counterfeit बताया गया और स्टेरिलिटी जांच में बैक्टीरिया पाए जाने की बात कही गई। इससे बीकानेर मामले में जांच का दायरा केवल सरकारी सप्लाई से दवा के बाहर निकलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया कि बरामद वायल के साथ बाद में कोई छेड़छाड़ हुई थी या नहीं।
क्या बेंगलुरु और बीकानेर के मामले जुड़े हैं?
दोनों मामलों में महंगी कैंसर और जीवनरक्षक दवाएं जांच के केंद्र में हैं। दोनों में अंतरराज्यीय सप्लाई की पड़ताल हो रही है। दोनों मामलों में दवाओं की प्रामाणिकता और सप्लाई चेन पर सवाल हैं। और दोनों मामलों में राजस्थान की कड़ी सामने आती है। इन समानताओं के बावजूद अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे कहा जा सके कि बेंगलुरु का Krupa Healthcare नेटवर्क और दिल्ली में मिले बीकानेर से जुड़े Avelumab वायल एक ही रैकेट का हिस्सा हैं।
महज वीरेश जैन का राजस्थान मूल का होना ही दोनों मामलों को जोड़ने वाला प्रमाण नहीं है।अब जांच की असली कड़ी बैच नंबर, सप्लायर, डिस्ट्रीब्यूटर, परिवहन रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और आरोपियों के मोबाइल व डिजिटल संपर्कों से सामने आ सकती है। फिलहाल तस्वीर यह है कि बेंगलुरु में संदिग्ध नकली दवा नेटवर्क की जांच चल रही है और दूसरी ओर दिल्ली में बरामद कैंसर दवा का एक बैच राजस्थान की सरकारी सप्लाई से जुड़ा मिला है। दोनों मामलों के बीच संभावित संबंध एक महत्वपूर्ण जांच का सवाल है।