{"vars":{"id": "127470:4976"}}

UAPA के तहत Pak में बैठे 23 'आतंकवादी' घोषित, इनमें 06 भारतीय शामिल, जानिए कौन आतंकी, क्या भारत विरोधी गतिविधि, अब क्या होगा

आतंकियों की लिस्ट में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित संगठनों के शीर्ष ऑपरेटर, लॉन्चिंग कमांडर, भर्तीकर्ता, हथियार आपूर्ति करने, घुसपैठ कराने वाले शामिल
 

RNE New Delhi.

आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति को और आक्रामक रूप देते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार को एक साथ 23 खूंखार आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आधिकारिक रूप से 'आतंकवादी' घोषित कर दिया। गृह मंत्रालय ने इसके लिए अलग-अलग गजट अधिसूचनाएं जारी करते हुए इन सभी के नाम UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल कर दिए। इनमें 17 पाकिस्तानी नागरिक और 6 भारतीय मूल के आतंकी हैं, जो वर्तमान में पाकिस्तान अथवा पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) से भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। 

ये आतंकी सूची में शामिल : 

जिन आतंकियों को आतंकवादी घोषित किया गया है उनमें मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ मुफ़्ती मसूद इलियास, मोहम्मद मुसद्दिक उर्फ डॉक्टर, मुफ़्ती मोहम्मद असगर खान उर्फ अबू साद, हाफिज़ अब्दुल शकूर उर्फ क़ारी ज़र्रार, अब्दुल्ला जेहादी उर्फ शाहनवाज़, फिरदौस अहमद भट, गुलाम फरीद उर्फ गुलशन कुमार, हारून राशिद गनई उर्फ शुनू, बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई, आबिद कय्यूम लोन, नज़ीर अहमद गुज्जर उर्फ मुनाज़िल, अब्दुल रऊफ (लश्कर-ए-तैयबा), हाफिज़ खालिद वलीद, मौलाना सैफुल्लाह खालिद और मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा समेत अन्य कई आतंकी शामिल हैं।

आतंकी घोषित करने से क्या होगा : 

यह कार्रवाई केवल नाम जोड़ने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण कानूनी और कूटनीतिक कदम मानी जा रही है। किसी व्यक्ति को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसके खिलाफ जांच एजेंसियों को व्यापक कानूनी अधिकार मिल जाते हैं, उसकी संपत्तियों पर कार्रवाई आसान होती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसके खिलाफ सहयोग जुटाने में भारत की स्थिति मजबूत होती है।

आतंकियों का पूरा नेटवर्क निशाने पर : 

गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल अधिकांश आतंकी जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा*जैसे प्रतिबंधित संगठनों के शीर्ष ऑपरेटर, लॉन्चिंग कमांडर, भर्तीकर्ता, हथियार आपूर्ति करने वाले और सीमा पार से आतंकवादी घुसपैठ कराने वाले हैं। कई आतंकियों की भूमिका ड्रोन के जरिए हथियार भेजने, सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं की भर्ती करने, आतंकियों को प्रशिक्षण देने, आतंकी फंडिंग जुटाने और जम्मू-कश्मीर में हमलों की साजिश रचने में बताई गई है। 

इन आतंकी घटनाओं से संबंध : 

गजट अधिसूचनाओं में कई आतंकियों का संबंध 2016 के नगरोटा सैन्य शिविर हमले, 2022 के सुनजवां सैन्य प्रतिष्ठान पर हमले और अन्य आतंकी घटनाओं से भी जोड़ा गया है। कुछ को आतंकियों का 'लॉन्चिंग कमांडर' बताया गया है, जो पाकिस्तान से घुसपैठ कराकर आतंकियों को भारत भेजने का काम करते रहे हैं। 

सोशल मीडिया और ड्रोन नेटवर्क भी रडार पर : 

इस सूची की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें ऐसे आतंकी भी शामिल हैं, जो पारंपरिक घुसपैठ के साथ-साथ ड्रोन के जरिए हथियार भेजने, एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भर्ती अभियान चलाने और साइबर नेटवर्क संचालित करने में सक्रिय बताए गए हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत अब केवल बंदूकधारी आतंकियों पर नहीं, बल्कि आतंकवाद के पूरे डिजिटल और लॉजिस्टिक इकोसिस्टम पर कार्रवाई कर रहा है। 

इनमें कई भारतीय मूल के आतंकी भी : 

सूची में शामिल छह भारतीय मूल के आतंकियों में कई जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं, जो वर्षों पहले पाकिस्तान चले गए और वहां से लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम कर रहे हैं। इनमें कुछ आतंकियों की जिम्मेदारी सीमा पार से हथियार पहुंचाने, फंडिंग जुटाने, आतंकी लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने और स्थानीय युवाओं को संगठन से जोड़ने की बताई गई है। 

गृह मंत्रालय का संदेश: हर आतंकी मॉड्यूल खत्म होगा : 

गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ज़ीरो टॉलरेंस टू टेररिज्म' नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। मंत्रालय ने कहा कि भारत और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा आतंकवाद के हर नेटवर्क और हर मॉड्यूल को समाप्त करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कानूनी सूची से आगे की रणनीति : 

राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण है।

* पहला, भारत ने उन ऑपरेटरों को कानूनी रूप से आतंकवादी घोषित किया है जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर आतंकवादी ढांचे का संचालन कर रहे थे।

* दूसरा, भविष्य में इन व्यक्तियों के खिलाफ संपत्ति जब्ती, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रत्यर्पण जैसे मामलों में भारत का कानूनी आधार और मजबूत होगा।

* तीसरा, यह पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश है कि सीमा पार बैठे संचालकों को भी भारत अब औपचारिक रूप से चिन्हित कर वैश्विक मंचों पर जवाबदेह बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।

कुल मिलाकर, यह कार्रवाई केवल 23 नामों को सूची में जोड़ने भर की नहीं है, बल्कि आतंकवाद के पूरे सीमा पार नेटवर्क भर्ती, प्रशिक्षण, हथियार आपूर्ति, फंडिंग और डिजिटल संचालन को कानूनी रूप से निशाने पर लेने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।