HIV Treatment : एचआईवी वायरस के रेप्लिकेशन को रोकने वाले कम्पाउंड खोजे, नई दवा की उम्मीद जगी
पंजाब यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने एचआईवी वायरस के इलाज की दिशा में एक अहम सफलता हासिल की है
पंजाब यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने एचआईवी वायरस के इलाज की दिशा में एक अहम सफलता हासिल की है। रिसर्च टीम ने कंप्यूटर आधारित तकनीकों के जरिए ऐसे नए कंपाउंड्स खोजे हैं, जो शरीर में वायरस की कॉपी बनने की प्रक्रिया को रोक सकते हैं।
यह रिसर्च साबित करती है कि कंप्यूटर आधारित 'बर्चुअल स्क्रीनिंग' से भविष्य में न सिर्फ एचआईवी, बल्कि आरएनए आधारित अन्य बीमारियों के लिए भी प्रभावी दवाएं खोजी जा सकती हैं। फिलहाल इन कम्पाउंड्स की आगे लैब और क्लिनिकल टेस्टिंग की जाएगी।
वायरस के खास हिस्से को बनाया निशाना
वैज्ञानिकों ने वायरस के एक खास हिस्से 'एचआईवी-1 टीएआर आरएनए' को निशाना बनाया। यह हिस्सा शरीर में वायरस के रेप्लिकेशन यानि संख्या बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है।
साइंटिस्ट्स ने कंप्यूटर बेस्ड टेक्नीक्स का इस्तेमाल किया। इसके तहत एनामाइन लाइब्रेरी के बड़े केमिकल डेटाबेस से लाखों कंपाउंड्स की वर्चुअल स्क्रीनिंग की गई। 500 नैनोसेकेंड तक चले सिमुलेशन में जांचा गया कि चुने गए कम्पाउंड वायरस संरचना में क्या बदलाव लाते हैं।
भविष्य में एचआईवी की नई दवा का आधार
रिसर्च में ऐसे 'लेजेंड्स' मिले जो वायरस की सामान्य कार्यप्रणाली को बाधित कर सकते हैं। इससे वायरस की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होने के संकेत मिले। ये कम्पाउंड्स भविष्य में एचआईवी की नई दवाएं बनाने में आधार का काम करेंगे।
आंकड़ों की नज़र में एचआईवी दुनिया 4.08 करोड़ लोग प्रभावित
करीब 13 लाख नए मामले आए। 2010 के मुकाबले संक्रमण में 40% की कमी। भारत में 26 लाख लोग प्रभावित, लेकिन एड्स से होने वाली मौतों में 81.4% की गिरावट। चिंता का विषयः महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में सबसे ज्यादा मामले। पंजाब, असम, त्रिपुरा में नए संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं।