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Farmer Loan : भारत के इस राज्य के किसान सबसे ज्यादा कर्जवान, पंजाब तीसरे व हरियाणा का चौथा नंबर 

महंगी मशीनरी और बढ़ता खर्च किसानों को कर्ज में धकेल रहा

 

खेती लगातार किसानों के लिए घाटे का सौदा बन रही है। इसके कारण प्रत्येक किसान लाखों रुपये के कर्ज के नीचे दबा हुआ है। देश में सबसे ज्यादा कर्जवान किसान आंध्र प्रदेश के है। जबकि दूसरे नंबर केरल राज्य के किसानों पर कर्ज है। कर्ज के मामले में तीसरे व चौथे नंबर पर पंजाब व हरियाणा के किसानों का आता है।

जहां पर पंजाब के प्रत्येक किसान पर 2,03,249 रुपये का कर्ज है। जबकि हरियाणा के किसानों की बात की जाए तो प्रत्येक किसान पर 1,82,922 रुपये का कर्ज है। ऐसे में किसानों को जीवन बसर करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।  किसानों पर बढ़ते कर्ज की तस्वीर लोकसभा में सामने आए ताजा सरकारी आंकड़ों ने साफ कर दी है। किसानों के कर्ज लेने के मामले में पंजाब देश में तीसरे स्थान पर है। यहां प्रति किसान परिवार औसतन 2,03,249 का कर्ज है। यह रकम राष्ट्रीय औसत 74,121 से लगभग तीन गुना अधिक है। यह खुलासा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट दौरान हुआ है।

आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) से करवाए गए किसान परिवार स्थिति आकलन सर्वेक्षण 2019 पर आधारित हैं। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, देश के 28 राज्यों में किसानों पर औसत बकाया ऋण में भारी अंतर है। कुछ राज्यों में किसान अपेक्षाकृत कम कर्ज में हैं, तो कई कृषि प्रधान राज्यों में कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं।

आंध्र पहले और हरियाणा चौथे नंबर पर

आंध्र प्रदेश  2,45,554
केरल  2,42,482
पंजाब 2,03,249
हरियाणा 1,82,922
तेलंगाना 1,52,113
कर्नाटक 1,26,240
राजस्थान 1,13,865
तमिलनाडु 1,06,553
हिमाचल प्रदेश 85,825
महाराष्ट्र 82,085
(राशि रुपए में)

महंगी मशीनरी और बढ़ता खर्च किसानों को कर्ज में धकेल रहा

पंजाब में किसानों पर बढ़ते कर्ज के पीछे कई गंभीर और संरचनात्मक कारण हैं। खेती खर्च बढ़ रहा है, आमदन कम हो रही है। आधुनिक और उच्च क्षमता वाली मशीनरी, बड़े ट्रैक्टर और प्लांटेशन उपकरण खरीदने के लिए किसानों को ऋण लेना पड़ता है। सोशल कंजप्शन भी बढ़ रही है। बच्चों की महंगी शिक्षा, परिवार का महंगा इलाज और घरेलू फंक्शन भी किसान को कर्ज में धकेल रहे हैं। खेती में सरकार का पब्लिक निवेश कम हो रहा है। किसान को हर छोटी बढ़ी समस्या पर कर्ज लेना पड़ता है। लगभग 35-40% किसान गैर-बैंकिंग स्रोतों, जैसे साहूकारों और बिचौलियों से उधार लेने को मजबूर हैं। इन पर ब्याज दरें बहुत अधिक होती हैं। वहीं, पंजाब में खेती अब उच्च लागत वाला मॉडल बन चुकी है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और बिजली की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि फसलों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ते। धान-गेहूं की सीमित फसल प्रणाली, फसल विविधीकरण की धीमी गति और तेजी से गिरता भूजल स्तर भी कर्ज का बड़ा कारण हैं।