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Success Story : हरियाणा के इस गांव के व्यक्ति ने खड़ी कर दी 1056 करोड़ वैल्यू की कंपनी, 4 में से 3 प्लांट गांवों में लगे

हिसार शहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित गांव लाडवा के बाहर खेतों के बीच लो स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर का प्लांट है
 

हिसार शहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित गांव लाडवा के बाहर खेतों के बीच लो स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर का प्लांट है। छह एकड़ में फैला जेलियो ईवी का यह प्लांट पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी से संचालित है। इस प्लांट में आसपास के गांवों के युवा काम करते हैं।

यहां बनने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर पूरे देश में जा रहे हैं। कंपनी के चेयरमैन नीरज आर्या कहते हैं कि 'गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं है। इसलिए कोशिश रहती है कि हमारा हर प्लांट गांवों में स्थापित हो, ताकि वहां ग्रोथ हो सके। अब तक चार प्लांट लगाए गए हैं।

इनमें से तमिलनाडु के कोयंबटूर को छोड़कर बाकी तीनों प्लांट गांवों में ही लगाए गए हैं। ये हिसार में लाडवा, पातन और ओडिशा में कटक के पास तांगी गांव में हैं।' कंपनी की शुरुआत नीरज के बेटे कुणाल ने साल 2022 में हिसार शहर के आर्यनगर में एक किराए के शेड में की थी।

उस समय हर महीने करीब एक हजार इलेक्ट्रिक स्कूटर तैयार होते थे। डिमांड ज्यादा बढ़ने के कारण साल 2024 में प्लांट लाडवा में शुरू किया गया। अब यहां प्रतिमाह करीब 15 हजार ईवी स्कूटर बन रहे हैं।

2025 में कंपनी शेयर मार्केट में लिस्टेड हुई। 5 करोड़ रुपए की लागत से शुरू की गई कंपनी की मौजूदा वैल्यू 1056 करोड़ रुपए है। कंपनी में पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर की मैन्युफैक्चरिंग के लिए 100 फीसदी सामान चीन से मंगाया जाता था।

अब मेक इन इंडिया के तहत 50 फीसदी सामान स्वदेशी इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य इसी साल के अंत तक इसे 75 फीसदी तक ले जाना है। कंपनी के एमडी कुणाल का कहना है कि लोगों में ईवी को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

इससे जहां पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, वहीं खर्च भी कम हुआ है। गांवों में लोग ईवी को लेकर अधिक उत्सुक हैं। युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के कारण पिछले तीन माह में इलेक्ट्रिक स्कूटर की डिमांड 30 फीसदी बढ़ी है।